US Pacific Command India Wrong Map: अमेरिका ने एक बार फिर से दुनिया को हैरान कर देने वाला मुद्दा उठाया है, जिससे भारत और रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञों ने कई तरह के बड़े सवाल खड़े कर दिए है। दरअसल, अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) ने अपने प्रसिद्ध ‘यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड’ (USINDOPACOM) का नाम बदल दिया है। अब एक बार फिर से इसका नया नाम ‘यूएस पैसिफिक कमांड’ (USPACOM) है। उनका यह फैसला सिर्फ नाम बदलने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक नक्शा भी जारी किया, जिसने अब एक नया बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। बताया जा रहा है कि यह नक्शा भारत के लिए सही नहीं है। क्योंकि इसमें पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) को पाकिस्तान का हिस्सा दिखाया जा रहा है, जो भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ है।
भारत के नक्शे को लेकर बढ़ा विवाद
अमेरिकी पैसिफिक कमांड की वेबसाइट पर जारी ‘Area of Responsibility Map’ में भारत का ऐसा नक्शा दिखाया गया है, जिसमें जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों को भारत के क्षेत्र से अलग दिखाई देता है। नक्शे में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) और अक्साई चिन को भारत के मुख्य नक्शे से बाहर रखा गया है।
भारत लंबे समय से यह बात साफ तौर पर कहता रहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के सभी हिस्से, जिनमें PoK और अक्साई चिन भी शामिल हैं, भारत का अभिन्न अंग हैं। ऐसे में अमेरिकी सैन्य कमान द्वारा जारी यह नक्शा भारत के लिए चिंता का विषय बन गया है। वही, इस नक्शे को लेकर कई रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की प्रस्तुति भारत की आधिकारिक स्थिति के अनुरूप नहीं है और इससे अनावश्यक विवाद पैदा हो सकता है।
8 साल बाद फिर बदला नाम
अमेरिका ने वर्ष 2018 में अपने ‘पैसिफिक कमांड’ (Pacific Command) का नाम बदलकर ‘इंडो-पैसिफिक कमांड’ (Indo-Pacific Command) किया था। उस समय इसे भारत की बढ़ती रणनीतिक भूमिका और हिंद महासागर क्षेत्र के महत्व को स्वीकार करने के रूप में देखा, लेकिन अब जब अमेरिका में ट्रंप का शासन है, तो US में नए फैसले के तहत कमांड का नाम फिर से ‘यूएस पैसिफिक कमांड’ (US Pacific Command) कर दिया। इस संदर्भ पर अमेरिकी युद्ध विभाग का कहना है कि यह बदलाव कमांड की ऐतिहासिक पहचान और उसकी विरासत को सम्मान देने के लिए जरूरी है।
विभाग के अनुसार, पुराने नाम की वापसी से कमांड के इतिहास और प्रशांत क्षेत्र में सेवा देने वाले सैन्य कर्मियों (Military Personnel) के योगदान को सम्मान मिलेगा। इसके अलावा, अमेरिका ने यह भी कहा है कि नाम बदलने का उसकी सैन्य रणनीति, जिम्मेदारियों या ऑपरेशनल गतिविधियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

अमेरिका में क्या बदलेगा इस फैसले से?
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि नाम परिवर्तन केवल प्रतीकात्मक है और इससे कमांड की भूमिका में कोई बदलाव नहीं होगा। USPACOM का जिम्मेदारी क्षेत्र पहले की तरह अमेरिका के पश्चिमी तट से लेकर भारत की पश्चिमी सीमा तक फैला है।
अमेरिका ने यह भी साफ तौर पर कहा है कि वह अपने सहयोगी देशों और साझेदारों के साथ मिलकर ‘फ्री एंड ओपन रीजन’ (Free and Open Region) बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। यानी हिंद महासागर और प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी और रणनीतिक गतिविधियां पहले की तरह जारी रहेंगी।
भारत के लिए क्यों अहम है यह कमांड?
इंडो-पैसिफिक कमांड (Indo-Pacific Command) पिछले कुछ वर्षों में भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग (India-US Defense Cooperation) का एक प्रमुख आधार बनकर उभरा था। दोनों देशों के बीच होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास, समुद्री सुरक्षा सहयोग, खुफिया जानकारी साझा करने और रक्षा साझेदारी के कई कार्यक्रम इसी ढांचे के तहत संचालित किए जाते रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘इंडो-पैसिफिक’ (Indo-Pacific) शब्द भारत को क्षेत्रीय सुरक्षा संरचना में एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में स्थापित करता था। ऐसे में ‘इंडो’ शब्द को हटाने के फैसले को कुछ विश्लेषक प्रतीकात्मक रूप से भारत की भूमिका को कम महत्व देने के रूप में भी देख रहे हैं। अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि भारत के साथ रक्षा संबंधों और रणनीतिक साझेदारी पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य कमांड में से एक
यूएस पैसिफिक कमांड (US Pacific Command) की स्थापना 1 जनवरी 1947 को की गई थी। यह अमेरिकी सैन्य व्यवस्था की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी यूनिफाइड कॉम्बैटेंट कमांड्स (Unified Combatant Commands) में से एक मानी जाती है।
द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) के बाद एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को आकार देने में इस कमांड की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। कोरियाई युद्ध, वियतनाम युद्ध और कई अन्य सैन्य अभियानों में इसका अहम योगदान रहा है। इसके अलावा यह कमांड प्राकृतिक आपदाओं, मानवीय सहायता अभियानों और क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग में भी सक्रिय भूमिका निभाती रही है।
हवाई से संचालित होता है विशाल नेटवर्क
हवाई स्थित मुख्यालय से संचालित यह कमांड दुनिया (Command World) के सबसे बड़े रणनीतिक क्षेत्रों में से एक की निगरानी करती है। इसके अधिकार क्षेत्र में प्रशांत महासागर, हिंद महासागर का बड़ा हिस्सा, पूर्वी एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण एशिया के कुछ क्षेत्र शामिल हैं।
इसकी प्रमुख जिम्मेदारियों में सैन्य तैयारियों को मजबूत रखना, सहयोगी देशों के साथ संयुक्त अभ्यास करना, समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना, आपदा राहत अभियान चलाना और किसी भी आकस्मिक स्थिति के लिए योजना तैयार करना शामिल है।
भारत-अमेरिका संबंधों पर क्या होगा असर?
इस पर अमेरिका का कहना है कि नाम बदलने से उसकी रणनीतिक प्राथमिकताओं में कोई बदलाव नहीं आया है। लेकिन भारत का गलत नक्शा (Incorrect Map of India) दिखाए जाने से विवाद बढ़ गया है और यह मुद्दा कूटनीतिक स्तर पर चर्चा का विषय बन सकता है। देखा जाए तो भारत हमेशा अपनी क्षेत्रीय अखंडता के मुद्दे पर बहुत ही ज्यादा संवेदनशील रहा है। ऐसे में अमेरिकी सैन्य कमान (US military Command) द्वारा जारी नक्शे को लेकर प्रतिक्रिया पर सभी की नजरें बनी हुई है।
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