Vande Mataram Debate: संसद में आज मंगलवार को राज्यसभा में हमारे राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम पर अहम चर्चा की गई। इस चर्चा की शुरूआत केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शुरुआत की, उन्होंने कहा कि जो लोग वंदे मातरम का मतलब नहीं समझते वो लोग इसे राजनीतिक चुनावी मुद्दे से जोड़ रहे हैं।
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सदन में अमित शाह ने यहां भी कहा की जवाहर लाल नेहरू से लेकर गांधी में शुरू से ही उनके खून में वंदे मातरम का विरोध है, जिसके चलते वंदे मातरम जब 100 साल पुराना हुआ था, तो उस टाइम पर पूरे देश को बंदी बना दिया था।
आजादी के युद्धघोष का नारा बना वंदे मातरम्
केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि यह वंदे मातरम् का गान वंदे मातरम् का गीत यह भारत माता को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने का नारा बना था। आजादी के युद्धघोष का नारा बन चुका था। आजादी के संग्राम का एक बहुत बड़ा प्रेरणा स्त्रोत बना था और शहीदों को अंतिम बलिदान सर्वोच्च बलिदान देते व्यक्त अगले जन्म में भी भारत में ही जन्म लेकर फिर से मां भारतीय के लिए बलिदान करने की प्रेरणा वंदे मातरम् से मिलती है। वंदे मातरम् की दोनों सदनों में
इस चर्चा से वंदे मातरम् की महिमा मंडल से वंदे मातरम् के गौरव गान से हमारे बच्चे किशोर, युवा और आने वाली कई पीड़िया वंदे मातरम् के महत्व को भी समझेगी और उसको राष्ट्र के पुन निर्माण का एक प्रकार से आधार भी बनाएगी।

प्रियंका गांधी के बयान के बाद शुरू हुई बहस
दरअसल संसद में यह बहस प्रियंका गांधी के बयान के बाद से शुरू हुई है, जब उन्होंने कहा कि वंदे मातरम की चर्चा क्यों जरूरी है और साथ ही कहा कि वंदे मातरम गीत 150 साल से हमारे देश की आत्मा का हिस्सा रहा है। ऐसे में इस पर सवाल उठाया गया को आज फिर बहस क्यों हो रही है, जिसके चलते प्रियंका ने कहा था की इसपर बहस इसलिए हो रही है क्योंकि बंगाल में चुनाव होने वाले है जिसमें पीएम मोदी अपनी भूमिका निभाना चाहते हैं।
वंदे मातरम् पर पहले ही तय हुई थी चर्चा
हालांकि वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने के मौके पर भारत सरकार ने पुरे साल के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए है, जिसके चलते ओम बिरला ने 2 दिसंबर को सही दलों की प्रतिनिधियों की बैठक की थी, जिसके दौरान ये तय किया गया था कि वंदे मातरम पर बहस 8 दिसंबर को लोकसभा में और 9 दिसंबर को राज्यसभा में होगी।
आज के संसद में दोनों विपक्ष पार्टियों ने वंदे मातरम को लेकर अपने-अपने विचार सामने रखें। जिसमें अमित शाह ने राष्ट्रीय भावनाओं का मामला सामने रखा और वही दूसरी तरफ प्रियंका गांधी ने इसे चुनावी संदर्भ से जोड़ा।
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