Winter Olympics 2026: इटली में आयोजित विंटर ओलंपिक्स 2026 भारत के लिए खास यादगार साबित हो रहे हैं। बता दें कि कश्मीर के स्कीयर आरिफ खान ने पुरुषों की स्लैलम प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर इतिहास रच दिया है। वह लगातार दो विंटर ओलंपिक में भाग लेने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए हैं। इस उपलब्धि ने भारत के विंटर स्पोर्ट्स को नई पहचान दी है।
जानकारी के अनुसार, स्लैलम इवेंट में कुल 96 स्कीयर ने हिस्सा लिया। वहीं, इस प्रतियोगिता में स्विट्जरलैंड के लोइक मीलार्ड ने 1 मिनट 53.61 सेकंड का समय निकालकर गोल्ड मेडल जीता है। साथ ही, ऑस्ट्रिया के फैबियो गस्ट्रेन ने सिल्वर और नॉर्वे के हेनरिक क्रिस्टोफरसन ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया है। वहीं आरिफ खान 39वें स्थान पर रहे। हालांकि यह पोजीशन भारत के लिए सिर्फ रैंकिंग नहीं, बल्कि एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
लगातार दो ओलंपिक में भाग लेने का रिकॉर्ड
आरिफ खान इससे पहले बीजिंग 2022 विंटर ओलंपिक्स में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। अब 2026 में दोबारा क्वालिफाई कर उन्होंने नया इतिहास बनाया है। इस बार ओपनिंग सेरेमनी में भारतीय तिरंगा उठाने का सम्मान भी उन्हें मिला, जो उनके बढ़ते कद को दर्शाता है।
कश्मीर के गुलमर्ग से आने वाले 35 वर्षीय आरिफ ने अपने ओलंपिक सफर को संघर्ष, मेहनत और धैर्य से बनाया है। उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा था कि हर एथलीट का सपना ओलंपिक में खेलना होता है और वह इस सपने को जी रहे हैं।
लद्दाख के स्टैनजिन लुंडुप का ओलंपिक डेब्यू
इस विंटर ओलंपिक में भारत के लिए एक और अहम पल तब आया, जब स्टैनजिन लुंडुप ने क्रॉस-कंट्री स्कीइंग में डेब्यू किया। लद्दाख के इस खिलाड़ी ने पुरुषों की 10 किलोमीटर फ्रीस्टाइल रेस में हिस्सा लिया और 111 एथलीटों में 104वें स्थान पर रहे। जिसमें 28 मिनट 26.7 सेकंड का समय निकाला।हालांकि वह पदक की दौड़ में नहीं थे, लेकिन उनका ओलंपिक तक पहुंचना ही भारत के विंटर स्पोर्ट्स के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। लद्दाख जैसे दूरदराज क्षेत्र से खिलाड़ी का इस स्तर तक पहुंचना कई युवाओं को प्रेरित करेगा।
चोट, पैसों की कमी और कठिन ट्रेनिंग का सफर
आरिफ खान का ओलंपिक सफर आसान नहीं रहा। उन्हें कई बार चोटों का सामना करना पड़ा और आर्थिक समस्याओं से भी जूझना पड़ा है। वहीं, लंबे समय तक घर से दूर रहकर ट्रेनिंग करनी पड़ी। क्वालिफिकेशन हासिल करने के बाद उन्होंने कहा था कि हर ओलंपिक अलग चुनौती लेकर आता है।पहली बार आर्थिक दिक्कतें थीं और इस बार चोट से उबरना पड़ा। पिछली बार उनका लक्ष्य सिर्फ दोनों रन पूरे करना और देश को गर्व महसूस कराना था, लेकिन इस बार वह बेहतर प्रदर्शन करना चाहते थे और ऊंचे स्तर पर मुकाबला करने का इरादा लेकर उतरे।

युवाओं के लिए प्रेरणा
आरिफ खान का कहना है कि उनका सफर सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है। वह चाहते हैं कि देश के युवा देखें कि छोटे शहर या पहाड़ी इलाकों से आने के बावजूद बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं। उनकी मेहनत और निरंतरता भारत में विंटर स्पोर्ट्स की नई पीढ़ी को प्रेरित कर रही है।
भारत का विंटर ओलंपिक इतिहास
भारत अभी तक विंटर ओलंपिक में कोई पदक नहीं जीत पाया है, लेकिन आरिफ खान और स्टैनजिन लुंडुप जैसे खिलाड़ियों की भागीदारी उम्मीद जगा रही है कि भविष्य में देश का खाता जरूर खुलेगा। वहीं, भारत की विंटर ओलंपिक यात्रा की शुरुआत गुल मुस्तफा देव से हुई थी, जिन्होंने कैलगरी 1988 विंटर ओलंपिक्स में हिस्सा लेकर देश के लिए राह बनाई थी। उनके बाद आने वाली पीढ़ियों ने इस सफर को आगे बढ़ाया और आज आरिफ खान जैसे खिलाड़ी उसी परंपरा को मजबूत कर रहे हैं।
आगे की उम्मीदें
जानकारी के लिए बता दें कि इस बार भारत को पदक नहीं मिला, लेकिन खिलाड़ियों की बढ़ती भागीदारी और बेहतर प्रदर्शन भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यदि सही सुविधाएं, ट्रेनिंग और आर्थिक सहयोग मिले तो भारत भी विंटर स्पोर्ट्स में बड़ी सफलता हासिल कर सकता है।
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