Govishti Yatra in Gorakhpur: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने आज रविवार को गोरखपुर से “गोविष्टि यात्रा” की शुरुआत की। इस दौरान उन्होंने गाय संरक्षण के मुद्दे पर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए और साथ ही योगी आदित्यनाथ को भी इस विषय पर “कमजोर” बताया। बताया जा रहा है कि उनके भाषण में धार्मिक भावनाओं के साथ-साथ राजनीतिक संदेश भी साफ तौर पर देखने को मिला।
क्या है पूरा मामला?
गोरखपुर के सहारा स्टेट स्थित भारत माता मंदिर के सामने आयोजित कार्यक्रम में शंकराचार्य ने गोविष्टि यात्रा को हरी झंडी दिखाई। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह यात्रा सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक जनजागरण अभियान है, जिसका मुख्य उद्देश्य देशभर में गाय के संरक्षण और सम्मान को लेकर लोगों को जागरूक करना है। साथ ही उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि समाज में गाय को “माता” का दर्जा दिया जाता है, लेकिन व्यवहार में उसके साथ वैसा सम्मान नहीं दिखता। इसी सोच को बदलने के लिए यह यात्रा शुरू की गई है।
धमकियों का दावा लेकिन पीछे हटने से इनकार
बता दें कि भाषण की शुरुआत में शंकराचार्य ने दावा किया कि उन्हें इस यात्रा को शुरू करने से पहले कई तरह की धमकियां मिलीं। हालांकि उन्होंने साफ कहा कि वे किसी भी तरह के दबाव या डर से पीछे हटने वाले नहीं हैं। जिसमें उन्होंने कहा कि कुछ ताकतें उनकी आवाज को दबाने की कोशिश कर रही हैं क्योंकि वे जनता के असली मुद्दे उठा रहे हैं। लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे अपने अभियान को जारी रखेंगे और गोरक्षा के मुद्दे को जनआंदोलन बनाएंगे।
सरकार पर तीखा हमला
शंकराचार्य ने अपने भाषण में केंद्र और राज्य सरकार दोनों पर निशाना साधा है। जिसमें उन्होंने कहा कि अगर सरकार वास्तव में हिंदू हितों के लिए काम कर रही होती, तो अब तक गाय की रक्षा के लिए ठोस और प्रभावी कानून लागू किए जा चुके होते। साथ ही, उन्होंने सवाल उठाया कि जब अन्य देशों में धार्मिक भावनाओं का सम्मान किया जाता है, तो भारत में गाय संरक्षण की मांग को गंभीरता से क्यों नहीं लिया जाता। उनके अनुसार, यह स्थिति बताती है कि सरकार इस मुद्दे पर पूरी तरह प्रतिबद्ध नहीं है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर टिप्पणी
शंकराचार्य ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। जिसमें उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर अपेक्षित दृढ़ता नहीं दिखा पा रहे हैं। साथ ही, यह भी कहा कि अगर नेतृत्व में इच्छाशक्ति होती, तो गाय को “राज्यमाता” घोषित करने जैसा फैसला लिया जा सकता था। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है, क्योंकि सरकार वोट बैंक की राजनीति में उलझी हुई है।

गोविष्टि यात्रा का उद्देश्य
इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य गाय के संरक्षण को लेकर देशभर में जागरूकता फैलाना है। शंकराचार्य के अनुसार, यह सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और नैतिक जिम्मेदारी का भी विषय है। उन्होंने कहा कि गाय भारतीय संस्कृति की पहचान है और उसकी रक्षा करना हर नागरिक का कर्तव्य है। इस यात्रा के दौरान वे गांव-गांव जाकर लोगों से संवाद करेंगे और उन्हें इस अभियान से जोड़ने का प्रयास करेंगे।
लोकतंत्र और मतदान पर जोर
संबोधन में शंकराचार्य ने लोकतंत्र की ताकत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि असली शक्ति जनता के पास होती है और वही सरकार को दिशा देती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने वोट का सही इस्तेमाल करें और ऐसे मुद्दों को प्राथमिकता दें जो समाज और संस्कृति से जुड़े हैं। उनके अनुसार, अगर जनता ठान ले, तो कोई भी मुद्दा सरकार के एजेंडे में शामिल हो सकता है।
धार्मिक और सांस्कृतिक तर्क
शंकराचार्य ने अपने भाषण में वेदों और शास्त्रों का भी उल्लेख किया। जिसमें कहा कि प्राचीन ग्रंथों में गाय की रक्षा को धर्म का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है। साथ ही, गोरक्षा केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि समाज की नैतिक जिम्मेदारी भी है। उनके अनुसार, गाय भारतीय समाज की आत्मा से जुड़ी हुई है और उसकी रक्षा करना जरूरी है।
वोट बैंक की राजनीति पर हमला
राजनीतिक दलों पर आरोप लगाया कि वे जनता के हित में नहीं, बल्कि वोट बैंक को ध्यान में रखकर फैसले लेते हैं। उन्होंने कहा कि कई बार ऐसे निर्णय लिए जाते हैं जो समाज के मूल्यों के खिलाफ होते हैं। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि राजनीति में सिद्धांतों से ज्यादा चुनावी फायदे को महत्व दिया जा रहा है, जो लोकतंत्र के लिए सही नहीं है।
“एक वोट, एक नोट” का आह्वान
शंकराचार्य ने लोगों से “एक वोट, एक नोट” अभियान में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि गोरक्षा और धार्मिक स्थलों के विकास के लिए जनता का सहयोग जरूरी है। उन्होंने यह भी बताया कि हर विधानसभा क्षेत्र में “रामाधाम” बनाने की योजना है, जहां गायों की सेवा और संरक्षण किया जाएगा।
81 दिन की यात्रा और आंदोलन की योजना
गोविष्टि यात्रा को लेकर उन्होंने एक बड़ी योजना का खुलासा किया है। जिसमें उनका कहना है कि यह यात्रा 81 दिनों तक चलेगी और इस दौरान 81 अलग-अलग “संघर्षों” या मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को जागरूक करना और एक बड़े जनआंदोलन की नींव रखना है।
राजनीति से दूरी का दावा
भाषण के अंत में शंकराचार्य ने कहा कि उनका किसी भी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल सनातन धर्म और समाज के हित में काम करना है।साथ ही, उन्होंने विश्वास जताया कि उन्हें देशभर में लोगों का समर्थन मिलेगा और यह अभियान आगे चलकर एक बड़ा आंदोलन बनेगा।
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