Bangladesh Election: बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को हुए संसदीय चुनाव ने देश की राजनीति की दिशा ही बदल दी है. इस चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने भारी बहुमत हासिल करते हुए सत्ता में दमदार वापसी की है. पार्टी के प्रमुख तारिक रहमान की निर्णायक जीत को लोग सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि “नई शुरुआत” के तौर पर देख रहे हैं. यह चुनाव इसलिए भी ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि शेख हसीना सरकार के गिरने के बाद यह पहला बड़ा आम चुनाव था. चुनाव से पहले देश में राजनीतिक अस्थिरता, हिंसा और सुरक्षा को लेकर चिंता का माहौल बना हुआ था. कई इलाकों में बम धमाकों और झड़पों की खबरें भी आई थीं, जिसके कारण दुनिया भर की नजरें बांग्लादेश पर टिकी हुई थीं.
तारिक रहमान कौन हैं और उनकी जीत क्यों अहम है?
तारिक रहमान बांग्लादेश की राजनीति का जाना-पहचाना नाम हैं. वे पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं और लंबे समय से BNP की कमान संभाल रहे हैं. शेख हसीना के लंबे शासन के बाद BNP की यह वापसी बांग्लादेश की राजनीति में पावर बैलेंस बदलने वाली घटना मानी जा रही है.
लोगों ने क्यों दिया तारिक रहमान को मौका?
- शेख हसीना सरकार के दौरान बढ़ती बेरोजगारी और महंगाई से लोग नाराज थे
- छात्र आंदोलनों और राजनीतिक टकराव से जनता थक चुकी थी
- लोगों को बदलाव और नई शुरुआत की उम्मीद थी
- BNP ने चुनाव प्रचार में “लोकतंत्र की बहाली” और “आम आदमी की आवाज” को मुद्दा बनाया
इस जीत के बाद समर्थकों में जश्न का माहौल है, वहीं विपक्ष के खेमे में मायूसी देखी जा रही है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी बधाई
तारिक रहमान की जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक रूप से उन्हें बधाई दी. सोशल मीडिया पोस्ट में पीएम मोदी ने कहा कि यह जीत बांग्लादेश की जनता द्वारा तारिक रहमान के नेतृत्व पर जताए गए विश्वास का प्रतीक है. पीएम मोदी ने अपने संदेश में यह भी साफ किया कि,
“भारत लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश का समर्थन करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.”
उन्होंने दोनों देशों के बीच बहुआयामी साझेदारी को और मजबूत करने के लिए तारिक रहमान के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई.यह संदेश इस बात का संकेत है कि भारत नई सरकार के साथ रिश्तों को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाना चाहता है.
भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर क्या पड़ेगा असर?
शेख हसीना सरकार के दौरान भारत और बांग्लादेश के रिश्ते काफी मजबूत माने जाते थे. सुरक्षा, व्यापार, सीमा प्रबंधन और कनेक्टिविटी जैसे कई मुद्दों पर दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ा था. अब BNP की सरकार बनने के बाद सवाल उठ रहे हैं की क्या भारत-बांग्लादेश रिश्तों में बदलाव आएगा?
हालाँकि विशेषज्ञों के मुताबिक BNP सरकार भारत के साथ रिश्तों को पूरी तरह खराब नहीं करना चाहेगी क्यूंकि आर्थिक सहयोग और व्यापार दोनों देशों के लिए जरूरी है. वहीं ,सीमा सुरक्षा और अवैध घुसपैठ जैसे मुद्दों पर बातचीत जारी रहेगी.
हालांकि, यह भी माना जा रहा है कि BNP की विदेश नीति में कुछ हद तक संतुलन बदलेगा और बांग्लादेश दूसरे देशों के साथ रिश्तों को नए सिरे से परिभाषित कर सकता है.
पाकिस्तान के साथ रिश्तों में गर्माहट?
BNP का इतिहास पाकिस्तान के प्रति अपेक्षाकृत नरम रुख से जुड़ा रहा है. ऐसे में तारिक रहमान की जीत के बाद यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या बांग्लादेश-पाकिस्तान रिश्तों में सुधार होगा?
वहीं, राजनीतिक जानकारों का कहना है कि BNP सरकार पाकिस्तान के साथ रिश्तों को बेहतर बनाने की कोशिश कर सकती है. व्यापार और कूटनीतिक स्तर पर संपर्क बढ़ सकता है, हालांकि 1971 के युद्ध की ऐतिहासिक कड़वाहट अब भी एक बड़ा मुद्दा है.
वहीं, भारत के लिए यह एक रणनीतिक चिंता का विषय हो सकता है कि बांग्लादेश कहीं पाकिस्तान के ज्यादा करीब न चला जाए.
चुनावी हिंसा और लोकतंत्र पर सवाल
इस चुनाव के दौरान कई जगहों पर हिंसा की खबरें सामने आईं. गोपालगंज, मुंशीगंज और खुलना जैसे इलाकों में झड़प और बम धमाकों की घटनाएं हुईं.इससे चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए.
हालांकि चुनाव आयोग ने दावा किया है कि मतदान कुल मिलाकर शांतिपूर्ण तरीके से हुआ और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन किया गया.
आम बांग्लादेशी जनता को क्या उम्मीदें हैं?
चुनाव के बाद आम लोगों की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। जनता चाहती है कि नई सरकार महंगाई कम करे, युवाओं को रोजगार दे, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाए और राजनीतिक हिंसा पर लगाम लगाए. तारिक रहमान के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती चुनावी वादों को जमीन पर उतारने की होगी.
आगे की चुनौतियां और मौके
तारिक रहमान की सरकार के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं:
- राजनीतिक स्थिरता बनाए रखना
- अंतरराष्ट्रीय मंच पर बांग्लादेश की छवि सुधारना
- भारत, चीन और पाकिस्तान के बीच संतुलन बनाना
- देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना
अगर नई सरकार इन चुनौतियों से सही तरीके से निपट पाती है, तो बांग्लादेश एक नए दौर में प्रवेश कर सकता है.



