Brahmaputra Underwater Tunnel: केंद्र सरकार ने उत्तर-पूर्व भारत के विकास को नई रफ्तार देने के लिए एक ऐतिहासिक परियोजना को मंजूरी दी है। जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे ट्विन ट्यूब रोड-कम-रेल सुरंग बनाने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई है। बताया जा रहा है कि यह सुरंग असम के गोहपुर और नुमालीगढ़ क्षेत्रों को आपस में जोड़ेगी और उत्तर-पूर्वी राज्यों की कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी।
जानकारी के अनुसार, यह देश की पहली ऐसी अंडरवाटर परियोजना होगी, जिसमें सड़क और रेल दोनों के लिए समानांतर सुरंग बनाई जाएगी। वहीं,इस महत्वाकांक्षी योजना की कुल लंबाई लगभग 34 किलोमीटर होगी, जबकि मुख्य अंडरवाटर सुरंग 15.8 किलोमीटर लंबी होगी। परियोजना की अनुमानित लागत 18,662 करोड़ रुपये तय की गई है और इसे पांच वर्षों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
दूरी और समय में बड़ी कमी
बता दें कि इस सुरंग के निर्माण के बाद गोहपुर और नुमालीगढ़ के बीच की दूरी करीब 240 किलोमीटर से घटकर सिर्फ 34 किलोमीटर रह जाएगी। वर्तमान में जहां लोगों को यह सफर तय करने में लगभग छह घंटे लगते हैं, वहीं सुरंग बनने के बाद यह यात्रा केवल 20 मिनट में पूरी हो सकेगी। इससे आम नागरिकों, व्यापारियों और पर्यटकों को बड़ा लाभ मिलेगा।
उत्तर-पूर्व को मिलेगा विकास का नया रास्ता
सरकार का कहना है कि यह परियोजना उत्तर-पूर्वी क्षेत्र को देश की मुख्यधारा से और अधिक मजबूती से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह कदम केंद्र की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ (Act East Policy) को भी मजबूत करेगा, जिसके तहत पूर्वोत्तर राज्यों में बुनियादी ढांचे और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा दिया जा रहा है। वहीं, सुरंग बनने से अरुणाचल प्रदेश और असम के बीच हाई-स्पीड कनेक्टिविटी बेहतर होगी। साथ ही सीमावर्ती इलाकों में आवाजाही आसान होने से सामरिक दृष्टि से भी यह परियोजना महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा
बेहतर सड़क और रेल संपर्क से क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद है। ब्रह्मपुत्र के आसपास के प्राकृतिक और सांस्कृतिक स्थल देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। यात्रा समय कम होने से यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। वहीं, इसके अलावा तेज परिवहन व्यवस्था से कृषि, लघु उद्योग और सीमा पार व्यापार को भी फायदा होगा। सामान की ढुलाई तेज और सस्ती होने से कारोबारियों के लिए नए अवसर खुलेंगे।
रोजगार के अवसर
परियोजना के निर्माण के दौरान बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होने का अनुमान है। जिसमें सरकारी आंकड़ों के मुताबिक निर्माण कार्य में लगभग 80 लाख मानव-दिवस रोजगार पैदा होंगे। इससे स्थानीय युवाओं को काम मिलने के साथ-साथ क्षेत्र की आय में भी वृद्धि होगी।
आधुनिक तकनीक से होगा निर्माण
यह सुरंग अत्याधुनिक इंजीनियरिंग तकनीक से बनाई जाएगी, ताकि नदी के नीचे सुरक्षित और टिकाऊ संरचना तैयार हो सके। इसमें सुरक्षा, वेंटिलेशन, आपातकालीन निकास और निगरानी जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल होंगी। सड़क और रेल दोनों के लिए अलग-अलग ट्यूब होने से यातायात सुचारु और सुरक्षित रहेगा।
सरकार की बड़ी पहल
केंद्र सरकार लगातार उत्तर-पूर्व भारत में सड़कों, रेल लाइनों, पुलों और हवाई अड्डों के निर्माण पर जोर दे रही है। इस नई सुरंग परियोजना को उसी दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि इससे न केवल क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी, बल्कि राष्ट्रीय एकता और आर्थिक प्रगति भी मजबूत होगी।
इसमें एक्सपर्ट्स का कहना है कि इतनी बड़ी अंडरवाटर सुरंग का निर्माण भारत की इंजीनियरिंग क्षमता को भी वैश्विक स्तर पर नई पहचान देगा। साथ ही, परियोजना पूरी होने के बाद यह देश के सबसे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में शामिल हो सकती है।
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