ब्रेन ट्यूमर एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है, जिसमें दिमाग की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं। पहले माना जाता था कि ये सिर्फ बुजुर्गों को ही होता है, लेकिन अब इसका खतरा बच्चों और युवाओं में भी देखा जा रहा है। डॉक्टर्स बताते हैं कि कुछ खास परिस्थितियों में इस बीमारी का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। अगर समय रहते इसके लक्षण पहचान लिए जाएं तो इससे बचाव किया जा सकता है।
क्यों बनता है ब्रेन ट्यूमर ?
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दिमाग हमारे शरीर का सबसे जरूरी हिस्सा है, जो सभी अंगों को कंट्रोल करता है। जब ब्रेन की कोशिकाएं किसी कारण से तेजी से बढ़ने लगती हैं, तो ट्यूमर बनता है। ये ट्यूमर कभी-कभी कैंसर में भी बदल सकता है, जो जानलेवा साबित होता है। इसलिए डॉक्टर्स हमेशा दिमाग की सेहत को लेकर सतर्क रहने की सलाह देते हैं।
कब मनाया जाता है ब्रेन ट्यूमर डे ?

लोगों में ब्रेन ट्यूमर को लेकर जागरूकता बढ़ाने और मरीजों, डॉक्टरों व रिसर्च करने वालों को जोड़ने के लिए हर साल 8 जून को वर्ल्ड ब्रेन ट्यूमर डे मनाया जाता है।
दुनियाभर में बढ़ रहे हैं ब्रेन ट्यूमर के मामले
साल 2022 के आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया भर में ब्रेन और सेंट्रल नर्वस सिस्टम के 3.22 लाख नए मामले सामने आए। वहीं, हर साल ब्रेन ट्यूमर से करीब 2.5 लाख लोगों की मौत होती है। ऐसे में सभी को इस बीमारी और इसके कारणों के प्रति जागरूक रहना चाहिए।
किसे ज्यादा होता है ब्रेन ट्यूमर का खतरा?

डॉक्टर्स कहते हैं कि कुछ परिस्थितियों में इस बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। जिन लोगों को सावधान रहना चाहिए, वो हैं:
- जिनके परिवार में पहले किसी को ब्रेन ट्यूमर हो चुका हो।
- जिन्हें बचपन में सिर पर रेडियोथेरेपी दी गई हो।
- 60 साल से ज्यादा उम्र के लोग, हालांकि अब यह बच्चों में भी देखा जा रहा है।
- जो लोग कीटनाशक और हानिकारक रसायनों के ज्यादा संपर्क में रहते हैं।
- जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर है।
- रेडिएशन वाले उपकरण या वातावरण में लंबे समय तक रहने वाले लोग।
रेडियोथेरेपी और बार-बार स्कैन कराने वालों को सतर्क रहना चाहिए
डॉक्टर्स का कहना है कि जिन लोगों ने रेडियोथेरेपी ली है या बार-बार सीटी स्कैन, एमआरआई और एक्स-रे कराए हैं, उनमें भी ब्रेन ट्यूमर का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे लोगों को नियमित जांच कराते रहना चाहिए और डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
लक्षणों को नजरअंदाज न करें

ब्रेन ट्यूमर अचानक नहीं होता। इसके कई कारण होते हैं। अगर हम अपने शरीर के संकेतों को समय रहते पहचानें, जैसे लगातार सिरदर्द, उल्टी आना, देखने या सुनने में दिक्कत होना, तो ट्यूमर और उससे जुड़ी समस्याओं को समय रहते रोका जा सकता है।
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