Budget 2026: केंद्र सरकार ने रविवार के 1 फरवरी 2026 को सुबह 11 बजे संसद में केंद्रीय बजट 2026 को पेश करने जा रही है। वहीं, इस बजट को लेकर देश के सैलरीड वर्ग को खास उम्मीदें हैं। खासतौर पर इनकम टैक्स से जुड़े नियमों में राहत को लेकर लोगों की नजरें टिकी हुई हैं।बता दें कि, टैक्स एक्सपर्ट्स और जानकारों का मानना है कि बजट 2026 का फोकस देश में खपत (कंजम्पशन) बढ़ाने, टैक्स सिस्टम को सरल बनाने और टैक्स बेस को और व्यापक करने पर हो सकता है।
दरअसल, एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस बार बजट में किसी बड़ी टैक्स कटौती की संभावना कम साथ ही, कुछ व्यावहारिक सुधार और छोटे बदलाव सैलरीड टैक्सपेयर्स को राहत दे सकते हैं।
टैक्स स्लैब में सीमित राहत की संभावना
टैक्स एक्सपर्ट्स के अनुसार Budget 2026 में इनकम टैक्स स्लैब में बहुत बड़े बदलाव की जा सकती है। इसकी वजह यह है कि पिछले बजट में टैक्स स्लैब में बड़े बदलाव किए गए थे। हालांकि, महंगाई को ध्यान में रखते हुए टैक्स स्लैब में मामूली एडजस्टमेंट किया जा सकता है। जिसमें महंगाई बढ़ने से लोगों की वास्तविक क्रय शक्ति कम हो जाती है और आय बढ़ने के बावजूद वे ऊंचे टैक्स स्लैब में पहुंच जाते हैं। ऐसे में स्लैब को महंगाई के अनुसार समायोजित करना टैक्सपेयर्स के लिए राहत भरा हो सकता है।
नई टैक्स व्यवस्था के साथ
जानकारी के लिए बता दें कि सैलरीड कर्मचारियों को ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है। जिसमें आखिरी बार इसमें बढ़ोतरी को लेकर बजट 2024 में की गई थी। वहीं, महंगाई लगातार बढ़ रही है, ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि Budget 2026 में स्टैंडर्ड डिडक्शन की सीमा बढ़ाई जा सकती है। वहीं, अगर ऐसा होता है तो सैलरीड कर्मचारियों की डिस्पोजेबल इनकम में सीधा इजाफा होगा और खर्च करने की क्षमता भी बढ़ेगी।
TDS सिस्टम को सरल बनाने की प्रक्रिया
दरअसल, वर्तमान में अलग-अलग तरह के लेन-देन पर कई तरह की TDS दरें लागू हैं, जिसमें टैक्स सिस्टम काफी कठिन हो गया है। साथ ही Budget 2026 में सरकार TDS सिस्टम को सरल बनाने की तैयारी कर सकती है। इसमें एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार अधिकतर ट्रांजैक्शंस के लिए 2 से 3 स्टैंडर्ड TDS रेट लागू कर सकती है। साथ ही, इससे टैक्स कंप्लायंस आसान होगा और आम टैक्सपेयर्स को भी समझने में सुविधा मिलेगी।

ओल्ड टैक्स रिजीम जारी रह सकती है
सरकार लंबे समय से संकेत दे रही है कि भविष्य में ओल्ड टैक्स रिजीम को धीरे-धीरे खत्म किया जा सकता है। हालांकि, बजट 2026 में इसके पूरी तरह हटने की कोशिश कम मानी जा रही है। साथ ही, अभी भी बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स डिडक्शंस और छूट के कारण ओल्ड टैक्स रिजीम को चुनते हैं। ऐसे में सरकार इसे चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर सकती है, न कि एक साथ।
टैक्स प्रशासन में और सुधार की उम्मीद
बता दें कि, बीते कुछ वर्षों में टैक्स असेसमेंट की प्रक्रिया को डिजिटल किया गया है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है। इसके बावजूद असेसमेंट और अपील से जुड़े मामलों के निपटारे में अभी भी देरी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। बजट 2026 में टैक्स कानूनों को और सरल बनाने और विवादों के समाधान को तेज करने के लिए नए सुधारों की घोषणा की जा सकती है। इससे टैक्सपेयर्स को लंबे समय तक चलने वाले विवादों से राहत मिल सकती है।
होम लोन ब्याज पर छूट बढ़ने की अपील
इनकम टैक्स एक्ट की धारा 24(b) के तहत होम लोन के ब्याज पर अधिकतम ₹2 लाख तक की डिडक्शन मिलती है। यह सीमा करीब एक दशक पहले तय की गई थी। मौजूदा समय में प्रॉपर्टी की कीमतें काफी बढ़ चुकी हैं, ऐसे में यह सीमा अब कम प्रभावी मानी जा रही है। बजट 2026 में इस सीमा को बढ़ाने की मांग जोर पकड़ रही है। अगर सरकार इसमें बढ़ोतरी करती है तो घर खरीदने वालों को बड़ी राहत मिल सकती है।
रोजगार बढ़ाने के लिए सेक्शन 80JJAA में राहत की उम्मीद
सरकार रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80JJAA के तहत मिलने वाली कटौती में बदलाव कर सकती है। इस सेक्शन के तहत कंपनियों को नए कर्मचारियों की लागत पर टैक्स छूट मिलती है। मौजूदा आर्थिक हालात में रोजगार बढ़ाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। ऐसे में इस सेक्शन के तहत राहत बढ़ाने से कंपनियों को नई भर्तियां करने के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है।
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