Budget 2026: भारत की खेती अब केवल हल और बैल तक सीमित नहीं रह गई है। बल्कि, समय के अनुसार खेती का रूप भी बदला गया है। इसके साथ ही, किसानों के सामने नए अवसर और नई चुनौतियां भी आई हैं। जिसमें अब खेती में नर्सरी, मिट्टी जांच, ड्रोन से निगरानी, मोबाइल ऐप से सलाह, डेयरी, मछली पालन और फूड प्रोसेसिंग जैसे काम भी शामिल हो चुके हैं। वहीं, ऐसे में Budget 2026 से किसानों को बड़ी उम्मीदें हैं। वहीं, यह बजट अगर सही दिशा में कदम उठाता है, तो खेती को मुनाफे का मजबूत जरिया बनाया जा सकता है।
भारत में खेती केवल अनाज उगाने का साधन नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आजीविका है। आज भी देश की लगभग आधी आबादी खेती और उससे जुड़े कामों पर निर्भर है। साल 2023-24 में खेती का योगदान देश की अर्थव्यवस्था में करीब 18 प्रतिशत रहा है। वहीं, धीरे-धीरे किसान पारंपरिक फसलों से आगे बढ़कर सब्जी, फल, दूध, मछली पालन और खेती से जुड़ी छोटी फैक्ट्रियों की ओर बढ़ रहे हैं। इससे उनकी आय बढ़ाने के नए रास्ते खुले हैं।
छोटे खेत, बड़ी समस्या
दरअसल, भारत की खेती की सबसे बड़ी परेशानी छोटे खेत हैं। वहीं, आंकड़ों के मुताबिक करीब 86 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत हैं, जिनके पास बहुत कम जमीन है। वहीं, कम जमीन होने से किसान ज्यादा उत्पादन नहीं कर पाते और बाजार में अपनी फसल की सही कीमत भी नहीं ले पाते। साथ ही, ऐसे किसानों के लिए बजट 2026 में सामूहिक खेती को बढ़ावा देने की जरूरत है। अगर किसान मिलकर काम करें, तो बीज, खाद और मशीनें सस्ती मिल सकती हैं और फसल बेचने में भी ताकत बढ़ती है।

किसान समूह और FPO पर जोर
बताया जा रहा है कि, सरकार ने किसानों को संगठित करने के लिए एफपीओ (FPO) यानी किसान उत्पादक संगठन बनाए हैं। जिसमें जब कई किसान एक ही फसल मिलकर उगाते हैं, तो उसे उत्पादन क्लस्टर कहा जाता है। वहीं, बजट 2026 में इन एफपीओ को मजबूत करने के लिए ज्यादा फंड, प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ने की व्यवस्था होनी चाहिए। साथ ही, गांव की महिलाएं और स्वयं सहायता समूह भी इन संगठनों से जुड़कर खेती में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी और गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
खेती में नए रोजगार के अवसर
बता दें कि, आज की खेती केवल खेत में काम करने तक सीमित नहीं है। बल्कि, नर्सरी चलाना, मिट्टी और पानी की जांच, ड्रोन सेवा, मोबाइल और ऑनलाइन सलाह जैसे नए काम तेजी से बढ़ रहे हैं। साथ ही, गांव के युवा और महिलाएं अगर इन कामों को अपनाएं, तो उन्हें गांव में ही रोजगार मिल सकता है। वहीं, बजट 2026 में ऐसे छोटे कृषि व्यवसायों के लिए सस्ती लोन, सब्सिडी और ट्रेनिंग की व्यवस्था जरूरी है। इससे खेती को रोजगार का अच्छा साधन बनाया जा सकता है।
पानी होगा तो खेती बचेगी
खेती के लिए पानी सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। जिसमें देश की बड़ी खेती आज भी बारिश पर निर्भर है। वहीं, अगर बारिश कम हुई तो फसल खराब हो जाती है और किसान कर्ज में डूब जाता है। इसलिए बजट 2026 में तालाब, चेक डैम, कुएं, वर्षा जल संग्रह और टपक सिंचाई जैसी योजनाओं पर ज्यादा खर्च होना चाहिए। सोलर पंप को बढ़ावा देने से बिजली का खर्च भी घटेगा। अगर पानी की सही व्यवस्था होगी, तो किसान बिना डर के खेती कर पाएंगे।
प्राकृतिक खेती और मौसम की मार से सुरक्षा
मौसम में लगातार बदलाव हो रहा है। कभी सूखा, कभी बाढ़ और कभी ओलावृष्टि से फसल को नुकसान होता है। प्राकृतिक और जैविक खेती से मिट्टी की सेहत सुधरती है और खेती का खर्च भी कम होता है। बजट 2026 में ऐसी खेती को बढ़ावा देना जरूरी है। साथ ही फसल बीमा, मौसम की सही जानकारी और अच्छे बीज किसानों तक समय पर पहुंचने चाहिए, ताकि वे नुकसान से बच सकें।
योजनाओं का सही लाभ
सरकार की कई योजनाएं खेती के लिए चल रही हैं, लेकिन कई बार इनका लाभ जरूरतमंद किसानों तक नहीं पहुंच पाता। जिसमें पीएम धन-धान्य कृषि योजना जैसी योजनाएं कमजोर कृषि क्षेत्रों में बड़ा बदलाव ला सकती हैं। बजट में इस बात पर ध्यान होना चाहिए कि छोटे किसान, बारिश पर निर्भर इलाके और महिलाएं इन योजनाओं से जुड़ें। जब योजनाएं जमीन पर सही ढंग से लागू होंगी, तभी बदलाव दिखेगा।
कर्ज और भंडारण से बढ़ेगी आय
किसानों को सही समय पर सस्ता कर्ज मिलना बेहद जरूरी है। बजट 2026 में खेती के लिए कर्ज की सीमा बढ़ाई जानी चाहिए। साथ ही गोदाम, कोल्ड स्टोरेज और फसल भंडारण की व्यवस्था मजबूत करनी होगी। इससे किसान अपनी फसल तुरंत बेचने को मजबूर नहीं होंगे और सही दाम मिलने पर ही बिक्री कर पाएंगे।
विकसित भारत की राह में मजबूत खेती
जानकारी के लिए बता दें कि, अगर भारत को 2047 तक विकसित देश बनाना है, तो खेती को मजबूत करना बहुत जरूरी है।वहीं, बजट 2026 भारतीय खेती के लिए नई दिशा तय कर सकता है। सही नीति, पानी, तकनीक और सहयोग से किसान खुशहाल बनेंगे। मजबूत किसान ही मजबूत भारत की नींव रखेंगे।
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