Haryana Health Alert: हरियाणा के पलवल जिले के छैंसा गांव में हेपेटाइटिस-बी संक्रमण फैलता जा रहा है। जिसमें पिछले 14-15 दिनों में 20 से ज्यादा लोगों की मौत से गांव में दहशत फैल गई है। जिसके बाद लोग इसे मौत का गांव कहने लगे हैं और बाहर से आने-जाने से डर रहे हैं। बताया जा रहा है कि शुरुआती लक्षण सर्दी, जुकाम और बुखार जैसे दिखते हैं, लेकिन बाद में हालत गंभीर हो जाती है।
मौतों का आंकड़ा
ग्रामीणों का कहना है कि दो हफ्तों में 15 से 20 या इससे ज्यादा मौतें हुई हैं। जिसमें बच्चे, किशोर, युवा और बुजुर्ग शामिल हैं। बताया जा रहा है कि, कुछ नाम ऐसे भी सामने आए हैं जैसे 8 साल की पायल, 11 साल के हुफैज, 14 साल की सारिका, 16 साल की हुमा, 20 साल का दिलशाद, 42 साल का शमसुद्दीन, 67 साल की जमीला आदि।
जानकारी के मुताबिक, स्वास्थ्य विभाग ने अब तक 7 मौतों की पुष्टि की है, जिनमें से 4 मौतें हेपेटाइटिस-बी (और कुछ में हेपेटाइटिस-सी) से जुड़ी बताई गई हैं। बाकी मौतों के कारणों की जांच जारी है। वहीं, कुछ मामलों में लिवर फेलियर या मल्टी ऑर्गन फेलियर की बात कही जा रही है।
बीमारी के लक्षण और फैलाव
दरअसल, बीमारी शुरू में सामान्य लगती है। मरीज को बुखार, ठंड लगना, जुकाम, कमजोरी, पीलिया जैसे लक्षण होते हैं। बाद में लिवर खराब हो जाता है और मौत हो सकती है। हेपेटाइटिस-बी मुख्य रूप से संक्रमित खून, इस्तेमाल की गई सुई (खासकर नशे में साझा सुई), असुरक्षित यौन संबंध या मां से बच्चे में फैलता है। जिसमें अधिकारियों का कहना है कि गांव में प्रवासी मजदूरों, ट्रक चालकों या नशे की आदत वाले लोगों से जुड़े हाई रिस्क व्यवहार हो सकते हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि दूषित पानी मुख्य कारण है। बताया जा रहा है कि गुरुग्राम नहर में औद्योगिक कचरा गिरने से पानी खराब हो गया है। जिसके बाद पानी के सैंपल में ई-कोलाई बैक्टीरिया मिला है और क्लोरीन की कमी पाई गई है। कुछ अवैध कनेक्शन काटे गए हैं। हालांकि प्रशासन ने अभी पानी को मौतों का मुख्य कारण नहीं माना है। जांच जारी है।
प्रशासन की कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग ने गांव में हेल्थ कैंप लगाए हैं। घर-घर जाकर ब्लड सैंपल लिए जा रहे हैं। अब तक 400 से ज्यादा लोगों की जांच हुई है और 300 से अधिक ब्लड सैंपल भेजे गए हैं। पॉजिटिव मिलने पर मरीजों को तुरंत अस्पताल में भर्ती किया जा रहा है। पलवल सिविल अस्पताल में इलाज चल रहा है। जागरूकता अभियान चला रहे हैं कि लोग जांच कराएं। एडवाइजरी जारी की गई है।एक अमानवीय घटना भी सामने आई। 14 साल के लड़के सारिक की मौत अस्पताल में आईसीयू बेड न मिलने से हुई। परिजनों ने समय पर इलाज न मिलने का आरोप लगाया है।

गांव की हालत
जानकारी के अनुसार, 5,000 से ज्यादा की आबादी वाले इस गांव में हर घर में कोई न कोई बीमार है। लोग डरे हुए हैं। जिसके बाद बाहर से आने वाले भी गांव में घुसने से कतराते हैं।वहीं, स्वास्थ्य विभाग की टीमें 24 घंटे नजर रख रही हैं। पानी की जांच और सफाई पर जोर दिया जा रहा है।
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