Ekadashi kab hai: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को सबसे पवित्र और फलदायी व्रतों में से एक माना जाता है. पंचांग के अनुसार साल में कुल 24 एकादशी पड़ती हैं और हर एकादशी का अपना विशेष महत्व होता है. इन्हीं में से एक है आमलकी एकादशी, जिसे अमला एकादशी और रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है.
यह एकादशी फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष में आती है और इसका संबंध भगवान विष्णु और आमलकी के वृक्ष से माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत और पूजन करने से पापों का नाश होता है और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है. लेकिन साल 2026 में आमलकी एकादशी की तारीख को लेकर लोगों में भ्रम है कि व्रत 27 फरवरी को रखा जाए या 28 फरवरी को. आइए आसान भाषा में समझते हैं सही तिथि, व्रत नियम, पूजा विधि और पारण का समय.
2026 में आमलकी एकादशी कब है? 27 या 28 फरवरी?
पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि की शुरुआत, 27 फरवरी 2026 को रात 12:33 बजे से होकर उसी दिन रात 10:32 बजे तक रहेगी. हिंदू धर्म में व्रत की गणना उदय तिथि के अनुसार की जाती है. यानी जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी तिथि होती है, उसी दिन व्रत रखा जाता है. इसलिए आमलकी एकादशी 2026 का व्रत 27 फरवरी (शुक्रवार) को रखा जाएगा. यानि, 28 फरवरी को एकादशी तिथि नहीं रहेगी, इसलिए उस दिन व्रत नहीं रखा जाएगा.
आमलकी एकादशी व्रत का पारण कब करें?
व्रत का पारण द्वादशी तिथि को किया जाता है. पारण समय 28 फरवरी 2026 को सुबह 6:47 बजे से 9:06 बजे के बीच. ध्यान रखें कि एकादशी व्रत का पारण समय पर करना बहुत जरूरी माना जाता है. देर से पारण करने पर व्रत का पूरा फल नहीं मिलता.
आमलकी एकादशी क्यों कहलाती है ‘रंगभरी एकादशी’?
वाराणसी में आमलकी एकादशी को रंगभरी एकादशी कहा जाता है. मान्यता है कि इसी दिन से होली के रंगों की शुरुआत होती है. काशी में इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष झांकी निकलती है और मंदिरों में गुलाल उड़ाया जाता है. इसी वजह से इसे रंगभरी एकादशी के नाम से जाना जाता है.
आमलकी एकादशी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु का वास माना जाता है. इस दिन आंवले की पूजा करने से सभी पाप नष्ट होते हैं. विष्णु भक्ति से जीवन में सुख-शांति आती है. आमलकी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है. यह व्रत संतान सुख, स्वास्थ्य और धन-समृद्धि देने वाला माना जाता है. वहीं,आमलकी एकादशी का पुराणों में वर्णन है कि राजा चंद्रवंश ने इस व्रत को करके महान पुण्य प्राप्त किया था.
आमलकी एकादशी व्रत की पूजा विधि
व्रत रखने वाले भक्त इस तरह पूजा कर सकते हैं:
सुबह क्या करें?
- सूर्योदय से पहले उठें, स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और भगवान विष्णु का ध्यान करें
पूजा विधि:
- घर में विष्णु जी की मूर्ति या तस्वीर रखें
- आंवले के वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं
- आंवला अर्पित करें
- विष्णु सहस्त्रनाम या ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें
भोग में क्या चढ़ाएं?
- भोग में फल, तुलसी,पंचामृत और आंवला या आंवले से बना प्रसाद चढ़ाएं.
व्रत में क्या खाएं और क्या न खाएं?
व्रत में फल, दूध,दही,साबूदाना,सिंघाड़े और आंवला का आटा खा सकते हैं. वहीं, अनाज, चावल, दाल, नमक (कुछ लोग सेंधा नमक लेते हैं), तामसिक भोजन, प्याज और लहसुन का सेवन न करे.
आमलकी एकादशी पर क्या करें?
आमलकी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा करें, आंवले का दान करें, जरूरतमंदों को भोजन कराएं, व्रत कथा पढ़ें या सुनें और दिन भर मन में सकारात्मक विचार रखें.
आमलकी एकादशी पर क्या न करें?
आमलकी एकादशी पर किसी से झगड़ा न करें, बुरा बोलने से बचें, मांस-मदिरा से दूरी रखें, झूठ न बोलें और क्रोध और ईर्ष्या से बचें.
आंवला क्यों है इतना खास?
आंवला आयुर्वेद में अमृत के समान माना गया है.आंवला आयुर्वेद के कई फायदे है, जैसे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, त्वचा और बालों के लिए लाभकारी, पाचन सुधारता है, शरीर को डिटॉक्स करता है और धार्मिक रूप से आंवले को भगवान विष्णु का प्रिय फल माना गया है.
आमलकी एकादशी का वैज्ञानिक पक्ष
वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो:
- फाल्गुन मास के समय मौसम बदल रहा होता है
- शरीर को रोगों से लड़ने के लिए पोषण की जरूरत होती है
- आंवले में विटामिन C भरपूर मात्रा में होता है
- व्रत रखने से शरीर को डिटॉक्स का मौका मिलता है
इस तरह धार्मिक परंपरा के पीछे स्वास्थ्य लाभ भी छिपा है
क्यों बढ़ रहा है आमलकी एकादशी का महत्व आज के समय में?
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं. जिससे उनका खानपान बिगड़ गया है. आज के जीवन में आध्यात्मिक शांति की कमी देखि जा रही है, ऐसे में एकादशी जैसे व्रत मन को शांत करने, संयम सिखाने और शरीर को आराम देने का माध्यम बनते जा रहे हैं.
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