Falta Assembly Repoll: पश्चिम बंगाल की दक्षिण 24 परगना जिले की हाई-प्रोफाइल फलता विधानसभा सीट पर बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिल रहा है। बता दें की तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार जहांगीर खान ने अचानक चुनावी मैदान से हटने का फैसला कर लिया है। जिसके वजह से पूरे बंगाल के राजनीतिक समीकरणों में हलचल मच गई है।
जानकारी के लिए बता दें की फलता सीट पहले से ही संवेदनशील मानी जाती है। ऐसे में यहां चुनावी हिंसा के आरोपों के बाद 29 अप्रैल को हुई वोटिंग को कैंसिल कर दिया गया था। अब 21 मई को दोबारा मतदान होना था, लेकिन मतदान से ठीक पहले ही TMC उम्मीदवार का पीछे हटना बड़ा सवाल बन गया है।
क्यों लिया गया चुनाव से हटने का फैसला?
दरअसल जहांगीर खान के चुनावी मैदान छोड़ने के पीछे कई राजनीतिक और प्रशासनिक कारण बताए जा रहे हैं। जिसमें हाल के दिनों इलाके में पुलिस कार्रवाई तेज हुई और कई मामलों में उनके करीबी लोगों पर कानूनी शिकंजा कसा गया।जिसके बाद उनके करीबी और पंचायत समिति के उपाध्यक्ष पर हिंसा और जानलेवा हमले के आरोप में FIR दर्ज होने के बाद माहौल और तनावपूर्ण हो गया था। इसके बाद से ही जहांगीर खान पर दबाव बढ़ता गया।
जानकारी के मुताबिक, लगातार निगरानी, प्रशासनिक दबाव और संगठनात्मक समर्थन की कमी ने उनकी चुनावी रणनीति को कमजोर कर दिया है। जिसके बाद उन्होंने चुनावी प्रक्रिया से खुद को अलग करने का फैसला कर लिया है।
BJP के लिए कैसे बदला सीन?
बताया जा रहा है की जहांगीर खान के हटने से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार को सीधा फायदा मिलता दिख रहा है। जिससे इस सीट पर बीजेपी से देवांशु पांडा चुनावी मैदान में हैं।
अब ऐसे में राजनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह मुकाबला पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। भले ही TMC का मुख्य चेहरा मैदान से हट गया हो, लेकिन वोटिंग अभी भी होगी और परिणाम जनता के मतदान पर निर्भर करेगा।
अन्य उम्मीदवार भी मैदान में शामिल
आपकी जानकरी के लिए बता दें की फलता सीट पर मुकाबला सिर्फ TMC और BJP तक सीमित नहीं है। यहां से सीपीएम और कांग्रेस के उम्मीदवार भी चुनाव लड़ रहे हैं।
- सीपीएम उम्मीदवार: शंभू कुर्मी
- कांग्रेस उम्मीदवार: अब्दुर रज्जाक
21 मई को मतदान पर कोई असर नहीं
चुनाव आयोग के अनुसार, जहांगीर खान के चुनाव से हटने के बावजूद 21 मई को तय मतदान कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं किया गया है। जिसमें मतदाता पहले की तरह अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे। साथ ही, यह भी महत्वपूर्ण है कि उनका नाम बैलेट या ईवीएम से हटाने की प्रक्रिया सीमित समय में संभव नहीं होती, इसलिए उनका नाम अभी भी मतदान लिस्ट में रहेगा।
15 साल का TMC गढ़ खतरे में?
फलता विधानसभा सीट को लंबे समय से TMC का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। पिछले लगभग 15 सालों से यहां पार्टी का दबदबा रहा है। लेकिन इस बार परिस्थितियां अलग हैं। राज्य में सत्ता परिवर्तन और प्रशासनिक बदलावों के बाद राजनीतिक माहौल तेजी से बदला है। इसी बदलाव का असर फलता सीट पर भी साफ दिखाई दे रहा है।
शुभेंदु अधिकारी की सक्रियता
BJP की तरफ से राज्य के वरिष्ठ नेता और रणनीतिकार शुभेंदु अधिकारी ने इस सीट पर खास ध्यान दिया है। जिसमें उन्होंने कई रैलियां कीं और पार्टी उम्मीदवार के समर्थन में प्रचार तेज किया। साथ ही, उन्होंने खुले मंच से TMC पर निशाना साधते हुए मतदाताओं से बदलाव के पक्ष में वोट करने की अपील की। उनकी सक्रियता से बीजेपी कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ा है।
अजय पाल शर्मा का सख्त रुख
इस पूरे चुनावी घटनाक्रम में एक नाम और चर्चा में रहा, अजय पाल शर्मा। जिसमं उन्हें चुनाव आयोग द्वारा पर्यवेक्षक के रूप में भेजा गया था। ऐसे में उनके सख्त और सीधे बयान ने इलाके की राजनीति में हलचल पैदा कर दी थी। उनके बयान को लेकर TMC और बीजेपी दोनों ही खेमों में चर्चा होती रही।

“पुष्पा” बयान से शुरू हुआ विवाद
बता दें की चुनाव प्रचार के दौरान जहांगीर खान ने खुद को “पुष्पा” की तरह प्रस्तुत किया था और कहा था कि “झुकेगा नहीं।” अब इस बयान ने सोशल मीडिया और चुनावी रैलियों में काफी सुर्खियां बटोरी थीं। लेकिन जैसे-जैसे प्रशासनिक कार्रवाई और राजनीतिक दबाव बढ़ा, उनका यह आक्रामक राजनीतिक अंदाज कमजोर पड़ता गया। अब ऐसे में चुनाव से हटने के फैसले ने सभी को चौंका दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि जहांगीर खान का चुनाव से हटना सिर्फ व्यक्तिगत फैसला नहीं बल्कि बदलते राजनीतिक माहौल का संकेत है। जिसमें कुछ एक्सपर्ट्स के अनुसार, यह कदम आने वाले समय में TMC के लिए रणनीतिक नुकसान भी साबित हो सकता है, क्योंकि इससे पार्टी की स्थानीय पकड़ कमजोर हो सकती है। वहीं BJP खेमे में इसे मनोवैज्ञानिक बढ़त के रूप में देखा जा रहा है।
क्या पूरी तरह खत्म हो गया मुकाबला?
दरअसल TMC उम्मीदवार के हटने के बाद भी चुनावी मुकाबला पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। सीपीएम और कांग्रेस के उम्मीदवार अभी भी मैदान में हैं और वोटों का विभाजन निर्णायक भूमिका निभा सकता है। फलता सीट पर जातीय, स्थानीय और संगठनात्मक समीकरण हमेशा से महत्वपूर्ण रहे हैं। ऐसे में अंतिम परिणाम 21 मई के मतदान पर ही निर्भर करेगा।
ये भी पढ़ें: No Namaz on Roads: सड़क पर नमाज पढ़ने पर सीएम योगी सख्त, बोले- ‘प्यार से समझाएंगे, नहीं माने तो दूसरा तरीका अपनाएंगे’



