Stock Market India: भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की वापसी ने नई उम्मीद जगाई है। जिसमें पिछले ही हफ्ते बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली थी, लेकिन इसके बावजूद विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में लगातार खरीदारी जारी रखी। साथ ही,फरवरी महीने में सिर्फ 13 तारीख तक ही एफपीआई निवेश का आंकड़ा लगभग 20,000 करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया है, जो तीन महीने की लगातार बिकवाली के बाद बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में ट्रेड डील ने विदेशी निवेशकों के भरोसे को मजबूत किया है। इस समझौते से जुड़े फ्रेमवर्क और फैक्टशीट जारी होने के बाद वैश्विक निवेशकों का रुख दोबारा भारतीय बाजार की ओर मुड़ा है। वहीं, डिपॉजिटरी आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में 13 तारीख तक एफपीआई भारतीय शेयरों में 19,675 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश कर चुके हैं।
तीन महीने बाद लौटी खरीदारी
बता दें कि इससे पहले नवंबर 2025 से जनवरी 2026 तक विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे थे। जनवरी में एफपीआई ने भारतीय बाजार से 35,962 करोड़ रुपये निकाले थे। दिसंबर 2025 में यह निकासी 22,611 करोड़ रुपये रही, जबकि नवंबर में 3,765 करोड़ रुपये की बिकवाली दर्ज की गई थी। ऐसे में फरवरी में आई यह तेज खरीदारी बाजार के लिए राहत भरी खबर मानी जा रही है।
बताया जा रहा है कि, पिछले साल विदेशी निवेश के लिहाज से भारतीय बाजार ज्यादा मजबूत प्रदर्शन नहीं कर पाया था। जिसमें वैश्विक अनिश्चितताओं, ब्याज दरों में बदलाव और आईटी सेक्टर में कमजोरी ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया था। हालांकि अब ट्रेड डील और स्थिर आर्थिक संकेतकों के चलते स्थिति बदलती दिख रही है।

आईटी शेयरों में गिरावट से बाजार पर दबाव
एक ओर जहां एफपीआई की वापसी सकारात्मक संकेत दे रही है, वहीं दूसरी ओर आईटी शेयरों में तेज गिरावट ने बाजार पर दबाव बढ़ाया है। अमेरिका में एआई टेक्नोलॉजी से जुड़े नए टूल्स की एंट्री के बाद वैश्विक स्तर पर आईटी कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी गई। इसका असर भारतीय आईटी दिग्गजों जैसे टीसीएस और इन्फोसिस पर भी पड़ा, जिनके शेयरों में कमजोरी दर्ज की गई।
दरअसल, आईटी सेक्टर की इस गिरावट का सीधा असर प्रमुख सूचकांकों पर दिखाई दिया। बीते सप्ताह सेंसेक्स में कुल 953.64 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन सेंसेक्स 1,048.16 अंक टूटकर 82,626.76 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी भी 336.10 अंक गिरकर 25,471.10 पर बंद हुआ।
आगे क्या रह सकता है रुख?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, विदेशी निवेशकों की वापसी मध्यम अवधि में बाजार को सहारा दे सकती है। यदि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां स्थिर रहती हैं और भारत-अमेरिका व्यापार सहयोग आगे बढ़ता है, तो एफपीआई निवेश में और तेजी देखने को मिल सकती है। हालांकि आईटी सेक्टर की कमजोरी और वैश्विक टेक्नोलॉजी ट्रेंड अभी भी जोखिम पैदा कर सकते हैं। जिसमें निवेशकों को फिलहाल सतर्क रणनीति अपनानी चाहिए और सेक्टर आधारित निवेश पर ध्यान देना चाहिए। बैंकिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में स्थिरता देखने को मिल रही है, जो आगे बाजार को मजबूती दे सकते हैं।
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