G7 Summit 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज फ्रांस के खूबसूरत शहर एवियां-ले-बैंस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। दुनिया की सात सबसे बड़ी विकसित अर्थव्यवस्थाओं के इस प्रतिष्ठित मंच पर भारत एक बार फिर विशेष आमंत्रित देश के रूप में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका और प्रभाव का प्रतीक माना जा रहा है। G7 सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया कई बड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता, ऊर्जा सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बढ़ता प्रभाव, यूक्रेन संकट, पश्चिम एशिया की स्थिति और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला जैसे मुद्दे दुनिया के सामने बड़ी चुनौतियां बने हुए हैं। ऐसे में भारत की भागीदारी को काफी अहम माना जा रहा है।
फ्रांस पहुंचेंगे पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने यूरोप दौरे के तहत आज फ्रांस के एवियां पहुंचेंगे। फ्रांस इस वर्ष G7 की अध्यक्षता कर रहा है और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों इस सम्मेलन की मेजबानी कर रहे हैं। सम्मेलन 15 से 17 जून तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें G7 देशों के अलावा भारत, ब्राजील, केन्या और दक्षिण कोरिया जैसे देशों को भी आमंत्रित किया गया है। भारत को लगातार कई वर्षों से G7 सम्मेलन में आमंत्रित किया जा रहा है, जो वैश्विक मामलों में उसकी बढ़ती अहमियत को दर्शाता है।
वैश्विक मुद्दों पर रखेंगे भारत का पक्ष
सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी विभिन्न सत्रों में हिस्सा लेंगे। इनमें वैश्विक आर्थिक स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। भारत लंबे समय से “वसुधैव कुटुम्बकम्” और “ग्लोबल साउथ” की आवाज़ को दुनिया के सामने रखने की बात करता रहा है। ऐसे में उम्मीद है कि प्रधानमंत्री मोदी विकासशील देशों की चुनौतियों, जलवायु वित्त, तकनीकी पहुंच और समावेशी विकास जैसे मुद्दों को मजबूती से उठाएंगे।
ट्रंप से मुलाकात पर दुनिया की नजर
G7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। रिपोर्टों के अनुसार दोनों नेताओं के बीच 17 जून को द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है। यह पिछले लगभग 16 महीनों में दोनों नेताओं की पहली आमने-सामने की मुलाकात होगी। बैठक में व्यापार, निवेश, सप्लाई चेन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रक्षा सहयोग और वैश्विक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से यह मुलाकात काफी महत्वपूर्ण हो सकती है।
कई देशों के नेताओं से होगी बातचीत
प्रधानमंत्री मोदी केवल ट्रंप ही नहीं बल्कि कनाडा, ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस और अन्य देशों के नेताओं से भी द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। इन बैठकों का उद्देश्य व्यापारिक संबंधों को मजबूत करना, निवेश बढ़ाना, नई तकनीकों में सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाना होगा। विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बैठकों से भारत को वैश्विक स्तर पर अपने हितों को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है।
AI और टेक्नोलॉजी पर विशेष फोकस
इस बार के G7 सम्मेलन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सबसे महत्वपूर्ण विषयों में शामिल है। दुनिया भर में AI तेजी से अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योगों को बदल रहा है। इसके अवसरों के साथ-साथ इसके जोखिमों पर भी चर्चा हो रही है। भारत पहले ही AI के जिम्मेदार और समावेशी उपयोग की वकालत करता रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी इस विषय पर भारत का दृष्टिकोण साझा कर सकते हैं।
ऊर्जा सुरक्षा पर भी होगी चर्चा
रूस-यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया में तनाव के कारण ऊर्जा बाजारों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। G7 सम्मेलन में ऊर्जा आपूर्ति, तेल और गैस की उपलब्धता तथा नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होगी। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता है, इसलिए इस विषय पर भारत का दृष्टिकोण काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।
यूक्रेन और पश्चिम एशिया पर नजर
यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया की स्थिति भी सम्मेलन के प्रमुख एजेंडों में शामिल हैं। G7 देश यूक्रेन को समर्थन देने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने पर विचार-विमर्श करेंगे। वहीं पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर उसके प्रभाव को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है। भारत लगातार संवाद और कूटनीति के माध्यम से समाधान निकालने की बात करता रहा है।
ग्लोबल साउथ की आवाज बनेगा भारत
भारत खुद को विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ की आवाज के रूप में स्थापित कर चुका है। G20 की अध्यक्षता के दौरान भारत ने जिन मुद्दों को उठाया था, उन्हें अब G7 जैसे मंचों पर भी आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के देशों की चिंताओं को अंतरराष्ट्रीय एजेंडे में शामिल कराने में भारत अहम भूमिका निभा सकता है।
भारत की बढ़ती वैश्विक साख
पिछले कुछ वर्षों में भारत की वैश्विक भूमिका लगातार मजबूत हुई है। दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के बाद भारत को वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक चर्चाओं में अधिक महत्व मिल रहा है। G7 जैसे मंचों पर बार-बार भारत को आमंत्रित किया जाना इसी बढ़ती साख का संकेत माना जाता है।
क्या निकल सकता है सम्मेलन से?
विश्लेषकों का मानना है कि इस सम्मेलन से वैश्विक अर्थव्यवस्था, AI, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण संदेश सामने आ सकते हैं। साथ ही भारत के लिए यह अवसर होगा कि वह अपने आर्थिक विकास, डिजिटल परिवर्तन और वैश्विक साझेदारी के मॉडल को दुनिया के सामने रख सके।
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