डिजिटल दुनिया की डिजिटल पीढ़ी
Gen Z – यानी वे युवा जो 1997 से 2012 के बीच जन्मे हैं – आज की सबसे तेजी से उभरती पीढ़ी है। ये तकनीक में माहिर हैं, सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं, फ्रीलांसिंग और स्टार्टअप की दुनिया में कदम रख चुके हैं। लेकिन इस चमकते डिजिटल युग में क्या उन्हें अपने पैसों को सही तरीके से समझने और संभालने की शिक्षा मिली है? यही सवाल हमें ले आता है एक बेहद जरूरी विषय पर – फाइनेंशियल लिटरेसी (वित्तीय साक्षरता)।
फाइनेंशियल लिटरेसी क्या है और क्यों जरूरी है?
वित्तीय साक्षरता का अर्थ है पैसों के सही इस्तेमाल, बचत, निवेश, बजट बनाने और कर्ज को समझने की क्षमता।
इसके अंतर्गत ये बातें आती हैं:
मासिक बजट कैसे बनाएं
कितनी आय में कितनी बचत करनी चाहिए
इमरजेंसी फंड क्या होता है
निवेश के स्मार्ट विकल्प कौन से हैं
कर्ज लेने से पहले क्या सोचना चाहिए
यानी कुल मिलाकर, पैसे को सिर्फ खर्च करना नहीं, समझदारी से चलाना आना चाहिए।
Gen Z की पैसों को लेकर सोच कैसी है?
Gen Z पहले की किसी भी पीढ़ी से अलग सोच रखती है।ये पीढ़ी कम उम्र में ही पैसे कमाना चाहती है फ्रीलांसिंग, क्रिएटर इकोनॉमी, स्टार्टअप और रिमोट जॉब्स के जरिए आय के नए रास्ते ढूंढ रही है स्टॉक्स, क्रिप्टोकरेंसी, NFTs जैसे जोखिम भरे निवेश में दिलचस्पी ले रही है “YOLO” (You Only Live Once) और “FOMO” (Fear Of Missing Out) जैसे ट्रेंड्स ने इन्हें इंस्टैंट ग्रैटिफिकेशन की ओर मोड़ा है। हालांकि सोच सकारात्मक है, लेकिन इसमें अक्सर लॉन्ग टर्म फाइनेंशियल प्लानिंग की कमी देखी जाती है।
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कहाँ रह जाती है कमी?
Gen Z की सबसे बड़ी समस्या है –
अधूरी जानकारी और गलत प्राथमिकताएं।
स्कूल-कॉलेज में फाइनेंशियल लिटरेसी नहीं पढ़ाई जाती
सोशल मीडिया से मिली अधूरी या भ्रामक जानकारी
EMI और “Buy Now Pay Later” जैसे विकल्पों के चक्कर में कर्ज के जाल में फँसना
सेविंग और इंवेस्टमेंट की आदतें कम
क्रेडिट कार्ड का गलत इस्तेमाल, बिना समझे खर्च बढ़ा देना
इन सभी कारणों से कई बार आर्थिक संकट झेलने की नौबत आ जाती है।
Gen Z को क्या करना चाहिए? – व्यावहारिक उपाय
- बजट बनाना सीखें:
हर महीने आय और खर्च का लेखा-जोखा रखें। अनावश्यक खर्चों को पहचानें और नियंत्रित करें। - इमरजेंसी फंड बनाएं:
कम से कम 3–6 महीने के खर्च जितनी राशि एक सेफ खाते में रखें। - निवेश की आदत डालें:
FD, SIP, म्यूचुअल फंड्स जैसे सुरक्षित और लॉन्ग टर्म विकल्पों को अपनाएं। - क्रेडिट कार्ड का सोच-समझकर प्रयोग करें:
उतना ही खर्च करें जितना चुका सकें। केवल रिवॉर्ड्स के लिए अनावश्यक खर्च ना करें। - फाइनेंशियल एजुकेशन को प्राथमिकता दें:
ऑनलाइन कोर्स, YouTube चैनल्स, किताबों और पर्सनल फाइनेंस ऐप्स से नियमित ज्ञान लें।

डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और सरकार की भूमिका
स्कूल स्तर पर वित्तीय शिक्षा को अनिवार्य किया जाना चाहिए
बैंकों और फिनटेक कंपनियों को युवाओं के लिए इंटरएक्टिव कोर्स और वर्कशॉप चलाने चाहिए
सरकारी योजनाओं (जैसे सुकन्या समृद्धि योजना, PPF, NPS) की जानकारी सरल भाषा में युवाओं तक पहुंचाई जानी चाहिए
निष्कर्ष: फाइनेंशियल फ्रीडम केवल आय से नहीं, समझ से मिलती है
Gen Z में ऊर्जा है, नए प्रयोगों की हिम्मत है, और पैसे कमाने की असीम संभावनाएं हैं। लेकिन बिना सही वित्तीय समझ के ये सब अधूरा है।
आज का युवा जितनी जल्दी कमाना सीख रहा है, उतनी ही जल्दी उसे संभालना और बचाना भी सीखना होगा।
“पैसा कमाना एक कला है, पर उसे संभालना एक विज्ञान – और दोनों की ज़रूरत है एक सुनहरे भविष्य के लिए।”
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