लद्दाख की ठंडी रातें वैसे ही रहस्यमयी मानी जाती हैं, लेकिन 19 और 20 जनवरी 2026 की दरम्यानी रात कुछ ऐसी थी, जिसने वैज्ञानिकों से लेकर आम लोगों तक सभी को हैरान कर दिया.हानले स्थित Hanle Dark Sky Reserve में गहरे नीले आसमान ने अचानक खून जैसे लाल रंग की चमक ओढ़ ली. यह नजारा किसी साइंस फिक्शन फिल्म का सीन नहीं था, बल्कि एक बेहद दुर्लभ और वैज्ञानिक रूप से अहम प्राकृतिक घटना थी Red Aurora. इस अनोखी घटना ने वैज्ञानिकों के साथ-साथ देश-विदेश के पर्यटकों और एस्ट्रोफोटोग्राफर्स का भी ध्यान खींच लिया है.
क्या है यह Red Aurora, जिसने सबको चौंका दिया?
आमतौर पर जब हम Aurora (नॉर्दर्न या साउदर्न लाइट्स) की बात करते हैं, तो हमारे दिमाग में हरे या नीले रंग की रोशनियां आती हैं, जो अत्यंत ठंडे इलाकों में दिखाई देती हैं. लेकिन हानले में दिखी यह लाल ऑरोरा बेहद खास थी.वैज्ञानिकों के अनुसार, यह घटना सूरज से उठे एक बेहद शक्तिशाली Solar Storm का नतीजा थी, जिसने पृथ्वी के आकर्षक क्षेत्र को जोरदार तरीके से प्रभावित किया.
सूरज से उठा X-क्लास सोलर फ्लेयर
19 जनवरी 2026 को सूरज पर एक बहुत ही शक्तिशाली गतिविधि दर्ज की गई. इस दिन सूरज से X-क्लास सोलर फ्लेयर निकला, जिसे सौर फ्लेयर की सबसे ताकतवर श्रेणी माना जाता है. इसके साथ ही Coronal Mass Ejection (CME) के रूप में प्लाज्मा और गैस का एक विशाल बादल भी निकला. यह बादल करीब 1700 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से पृथ्वी की ओर बढ़ा और हैरानी की बात यह रही कि यह महज 25 घंटों में पृथ्वी के वायुमंडल से टकरा गया.
2003 के बाद सबसे शक्तिशाली जियोमैग्नेटिक तूफान
जब यह सूर्य कणों से भरा बादल पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराया, तो एक जबरदस्त Geomagnetic Storm पैदा हुआ. वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह तूफान G4 और S4 लेवल का था, जिसे 2003 के बाद सबसे तीव्र आकर्षक तूफानों में से एक माना जा रहा है. इस तूफान का असर सिर्फ अंतरिक्ष तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका दृश्य प्रभाव पृथ्वी पर भी साफ नजर आया और वही था हानले का लाल आसमान.
हानले में ही क्यों दिखी Red Aurora?
यह सवाल हर किसी के मन में उठ रहा है कि आखिर भारत के हानले जैसे इलाके में ऑरोरा कैसे दिखी, वैज्ञानिक बताते हैं कि आमतौर पर ऑरोरा पृथ्वी के ध्रुवीय क्षेत्रों जैसे नॉर्वे, आइसलैंड या अंटार्कटिका में दिखाई देती हैं और उनका रंग ज्यादातर हरा होता है. लेकिन जब सौर तूफान बेहद शक्तिशाली होता है, तो उसके कण पृथ्वी के आकर्षक क्षेत्र को पार करते हुए कम अक्षांश (latitude) वाले इलाकों तक पहुंच सकते हैं.
लाल रंग का वैज्ञानिक रहस्य
विशेषज्ञों के अनुसार, जब सूरज से आए ऊर्जावान कण पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल में करीब 300 किलोमीटर की ऊंचाई पर मौजूद ऑक्सीजन एटम्स से टकराते हैं, तो लाल रंग की रोशनी पैदा होती है. अत्यधिक ठंडे क्षेत्रों में आमतौर पर यह टकराव कम ऊंचाई पर होता है, जिससे हरा रंग दिखाई देता है. लेकिन हानले जैसे लो-लैटिट्यूड क्षेत्र में यह टकराव ज्यादा ऊंचाई पर हुआ, इसलिए आसमान लाल नजर आया.
वैज्ञानिकों के लिए क्यों है यह घटना खास?
वैज्ञानिकों के लिए यह घटना किसी खजाने से कम नहीं है. हानले पहले से ही खगोल विज्ञान के लिए जाना जाता है, क्योंकि यहां प्रकाश प्रदूषण बेहद कम है और आसमान साफ दिखाई देता है और इस Red Aurora ने वैज्ञानिकों को यह समझने का एक नया मौका दिया है कि शक्तिशाली सौर तूफान पृथ्वी को कैसे प्रभावित करते हैं, कम अक्षांश वाले क्षेत्रों में ऑरोरा कैसे बनती है और भविष्य में ऐसे तूफानों से संचार और सैटेलाइट सिस्टम पर क्या असर पड़ सकता है.
पर्यटकों और फोटोग्राफर्स में उत्साह
इस घटना के बाद हानले में मौजूद पर्यटकों और एस्ट्रोफोटोग्राफर्स के बीच जबरदस्त उत्साह देखा गया. कई लोगों ने इस दुर्लभ नजारे की तस्वीरें और वीडियो कैद किए, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा हैं. लोगों का कहना है कि उन्होंने अपनी जिंदगी में पहली बार ऐसा आसमान देखा, जो शांत भी था और डरावना भी मानो प्रकृति अपनी पूरी ताकत के साथ सामने आ गई हो.
क्या आम लोगों के लिए था कोई खतरा?
इस तरह के सौर तूफानों से आम लोगों को सीधे तौर पर कोई बड़ा खतरा नहीं होता. हालांकि, वैज्ञानिक बताते हैं कि बेहद शक्तिशाली जियोमैग्नेटिक तूफान सैटेलाइट संचार, GPS सिस्टम, रेडियो सिग्नल और पावर ग्रिड जैसी तकनीकों को प्रभावित कर सकते हैं. लेकिन इस बार किसी बड़े नुकसान की खबर सामने नहीं आई है.
भविष्य में और दिखेंगी ऐसी घटनाएं?
विशेषज्ञों का मानना है कि सूरज इस समय अपने Solar Maximum Phase की ओर बढ़ रहा है, जिसमें ऐसी गतिविधियां बढ़ सकती हैं. इसका मतलब है कि आने वाले महीनों या सालों में भी इस तरह की दुर्लभ घटनाएं देखने को मिल सकती हैं. हालांकि, Red Aurora का इस तरह भारत में दिखना अब भी बेहद असामान्य माना जाता है.
हानले है भारत का दिव्य खजाना
हानले पहले से ही भारत के सबसे अहम दिव्य स्थलों में गिना जाता है. यहां मौजूद वेधशालाएं और डार्क स्काई रिजर्व वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड को करीब से समझने का मौका देते हैं. इस ताजा घटना ने हानले की पहचान को और मजबूत कर दिया है और यह जगह अब सिर्फ वैज्ञानिकों ही नहीं, बल्कि आम लोगों के लिए भी जिज्ञासा का केंद्र बन गई है.



