India EU Trade Deal: भारत और अमेरिका से ट्रेड तनाव के बीच प्लान-B पर तेजी से काम शुरू किया जा रहा है। वहीं, अब यूरोपीय संघ (EU) के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की बड़ी डील लगभग तय हो गई है। जिसमें यह खास डील दुनिया की सबसे बड़ी ट्रेड पार्टनरशिप बन सकती है। वहीं, EU की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इसे मदर ऑफ ऑल डील्स यानी सभी डीलों की मां कहा है। बताया जा रहा है कि, अगले हफ्ते 27 जनवरी 2026 को भारत-EU शिखर सम्मेलन में इस खास डील की घोषणा हो सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, EU काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा और उर्सुला वॉन डेर लेयेन इस समिट में हिस्सा लेंगे। यह समिट दिल्ली में होगा, जहां EU के नेता भारत के गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि भी होंगे।
जानकारी के लिए बता दें कि, यह FTA 2007 से चल रही बातचीत का नतीजा है, जिसे 2022 में फिर से शुरू किया गया था। वहीं, अब दोनों पक्ष अंतिम चरण में पहुंच चुके हैं। साथ ही, डील होने के बाद इसे EU परिषद और यूरोपीय संसद से मंजूरी लेनी होगी। जिसमें एक साल या ज्यादा समय भी लग सकता है। वहीं, उसके बाद ही यह पूरी तरह लागू होगा। जिसमें भारत और EU मिलकर दुनिया की लगभग 2 अरब आबादी और ग्लोबल GDP के करीब चौथाई हिस्से को जोड़ेंगे। EU 27 देशों का ब्लॉक है, जहां 450 मिलियन से ज्यादा लोग रहते हैं और इसकी अर्थव्यवस्था 20 ट्रिलियन डॉलर से बड़ी है। जिससे भारत दुनिया की सबसे बढ़ती अर्थव्यवस्था है। यह डील दोनों के लिए काफी फायदेमंद होगी।
भारत-EU ट्रेड के आंकड़े
बता दें कि, 2024-25 में भारत और EU के बीच कुल व्यापार करीब 136.5 अरब डॉलर (लगभग 11.8 लाख करोड़ रुपये) का था। भारत का एक्सपोर्ट 75.8 अरब डॉलर और इम्पोर्ट 60.7 अरब डॉलर रहा है। जिसमें FTA के बाद भारत का एक्सपोर्ट तेजी से बढ़ेगा। वहीं, अनुमान जताया जा रहा है कि यह व्यापार 200 से 250 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
भारत को क्या फायदे मिलेंगे
- टैरिफ कम होंगे — EU भारतीय प्रोडक्ट्स पर औसत 3.8% टैरिफ है, गारमेंट्स और ज्वेलरी पर 10% तक। FTA से ये टैरिफ खत्म या बहुत कम हो जाएंगे।
- एक्सपोर्ट बढ़ेगा — टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट्स, फार्मा, चमड़ा, जूते, जेम्स एंड ज्वेलरी, आईटी सर्विसेज, मशीनरी और केमिकल्स का एक्सपोर्ट तेज होगा।
- नई मार्केट एंट्री — भारत के प्रोडक्ट्स यूरोप में सस्ते होंगे, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
- डिफेंस और मैन्युफैक्चरिंग — यूरोप अमेरिका पर निर्भरता कम करने के लिए भारत से हथियार और डिफेंस इक्विपमेंट खरीद सकता है।
- इन्वेस्टमेंट और जॉब्स — EU से भारत में बड़े निवेश आएंगे। नई फैक्टरियां खुलेंगी, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर होगा और रोजगार बढ़ेगा।
- कम लागत वाले रॉ मटेरियल — यूरोप से सस्ते रॉ मटेरियल आएंगे, जिससे भारत में प्रोडक्शन सस्ता होगा।

EU को क्या फायदे हैं
दरअसल, EU को भारत का बड़ा उपभोक्ता मार्केट मिलेगा। साथ ही, भारत में ऑटोमोबाइल, मशीनरी, एयरक्राफ्ट, वाइन, रसायन और अन्य प्रोडक्ट्स की बिक्री बढ़ेगी। EU को भारत से सस्ते प्रोडक्ट्स मिलेंगे और सप्लाई चेन मजबूत होगी।
कृषि और डेयरी बाहर
FTA में कृषि और डेयरी सेक्टर को बाहर रखा जाएगा। जिसमें भारत अपनी किसानों की रक्षा के लिए यह शर्त रख रहा है। EU 95% से ज्यादा वस्तुओं पर टैरिफ हटाने की मांग कर रहा है, जबकि भारत इसे 90% तक सीमित रखना चाहता है।
चीन पर निर्भरता होगी कम
बता दें कि, यह डील भारत के लिए चीन पर निर्भरता कम करने का बड़ा अहम कदम है। जिसमें EU एक भरोसेमंद सप्लाई चेन पार्टनर बनेगा। जैसे इलेक्ट्रिक व्हीकल, रिन्यूएबल एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे सेक्टर में फंडिंग और टेक्नोलॉजी मिलेगी। वहीं, अमेरिका के दबाव से यूरोप परेशान है, इसलिए भारत जैसे तेज बढ़ते बाजार की ओर देख रहा है।यह भारत का 9वां FTA होगा। अमेरिका से ट्रेड तनाव और टैरिफ बढ़ने के बीच EU के साथ यह डील भारत की स्ट्रैटेजी का हिस्सा है। इससे भारत वैश्विक ट्रेड में मजबूत होगा और अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई मिलेगी।
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