Donald Trump Iran Warning: ईरान के साथ चल रही परमाणु और सुरक्षा वार्ता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से सख्त तेवर दिखाए हैं। बताया जा रहा है की G7 शिखर सम्मेलन के दौरान मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सिसी के साथ हुई बैठक में ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि ईरान के साथ प्रस्तावित समझौता अभी अंतिम नहीं है। ऐसे में अगर उन्हें यह समझौता पसंद नहीं आया तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई और बमबारी का रास्ता अपना सकता है।
ट्रंप के इस बयान को ईरान के लिए सीधी चेतावनी माना जा रहा है। इससे साफ संकेत मिलता है कि अमेरिका बातचीत जारी रखते हुए भी दबाव की नीति को छोड़ने के मूड में नहीं है।
‘बहुत मजबूत डील बनी है, लेकिन अभी कुछ तय नहीं’
बैठक के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत के बाद एक बेहद मजबूत समझौते का मसौदा तैयार किया गया है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि अभी तक इसका अंतिम स्वरूप तय नहीं हुआ है और कई बिंदुओं पर चर्चा जारी है।
ट्रंप ने कहा कि दुनिया के अधिकांश लोग इस समझौते को लेकर सकारात्मक सोच रखते हैं। उनके मुताबिक यह समझौता वैश्विक स्थिरता और आर्थिक सुरक्षा के लिए जरूरी है।
‘समझौता पसंद नहीं आया तो फिर युद्ध का रास्ता खुला’
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने बयान में यह भी कहा कि यदि अंतिम समझौता उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं हुआ तो अमेरिका के पास सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला रहेगा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका अपने रणनीतिक हितों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा। जरूरत पड़ने पर फिर से सैन्य कार्रवाई की जा सकती है।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में पहले से ही तनाव बना हुआ है और दुनिया की निगाहें अमेरिका-ईरान वार्ता पर टिकी हुई हैं।
300 अरब डॉलर के निवेश की खबरों को बताया झूठ
दरअसल हाल के दिनों में यह खबरें सामने आई थीं कि अमेरिका ईरान के साथ किसी समझौते के तहत 300 अरब डॉलर का निवेश कर सकता है। ट्रंप ने इन सभी खबरों को पूरी तरह गलत बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से ऐसा कोई निवेश प्रस्ताव नहीं है और इस तरह की खबरों का वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। ट्रंप के मुताबिक समझौते का उद्देश्य केवल सुरक्षा, स्थिरता और क्षेत्रीय शांति सुनिश्चित करना है।
‘दुनिया मंदी नहीं चाहती’
ट्रंप ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि कुछ लोग दुनिया में आर्थिक मंदी देखना चाहते हैं, लेकिन ऐसे लोग वैश्विक अर्थव्यवस्था की अहमियत को नहीं समझते। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच सकारात्मक समझौता होता है तो इसका फायदा पूरी दुनिया को मिलेगा। वहीं, समझौता विफल होने की स्थिति में वैश्विक बाजारों पर भी असर पड़ सकता है।

किस समुद्री मार्ग की बात कर रहे थे ट्रंप?
बता दें की अपने संबोधन के दौरान ट्रंप ने यह भी कहा कि “नंबर वन, स्ट्रेट कभी नहीं खुलेगा।” हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह किस समुद्री मार्ग या जलडमरूमध्य की बात कर रहे थे।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि उनका इशारा मध्य पूर्व के महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की ओर हो सकता है, जिनका वैश्विक तेल व्यापार और समुद्री परिवहन पर बड़ा प्रभाव पड़ता है।
डिप्लोमेसी और दबाव, दोनों पर आगे बढ़ रही अमेरिकी नीति
आपकी जानकारी के लिए बता दें की G7 सम्मेलन में ट्रंप के बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि ईरान को लेकर अमेरिका की नीति दोहरे फार्मूले पर आधारित है। एक तरफ बातचीत और समझौते का रास्ता खुला रखा गया है, वहीं दूसरी तरफ सैन्य दबाव बनाए रखने की रणनीति भी जारी है।
मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सिसी के साथ हुई यह बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि मध्य पूर्व की राजनीति में मिस्र की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। ऐसे में इस बैठक के बाद अमेरिका का यह सख्त संदेश क्षेत्रीय राजनीति पर भी असर डाल सकता है।
अब क्या होगा आगे?
अब पूरी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ता पर है। यदि दोनों देशों के बीच सहमति बनती है तो इससे मध्य पूर्व में तनाव कम हो सकता है। लेकिन अगर बातचीत विफल रहती है, तो क्षेत्र में एक बार फिर तनाव और संघर्ष बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयान ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में ईरान के साथ होने वाली बातचीत वैश्विक राजनीति और सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है।



