Iran-Israel-US War: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। जिसमें ईरान, इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच बढ़ता टकराव अब बड़े युद्ध का रूप लेता दिख रहा है। हालिया हमलों के बाद वैश्विक बाजारों में डर का माहौल बना हुआ है। जिसमें इसका सबसे ज्यादा असर कच्चे तेल, शेयर बाजार और सोना-चांदी की कीमतों पर देखने को मिल सकता है। साथ ही,भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए यह स्थिति आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है।
युद्ध ने बढ़ाई वैश्विक चिंता
जानकारी के मुताबिक, इजरायल और अमेरिका की ओर से ईरान के कई ठिकानों पर कार्रवाई की गई है, जिसके जवाब में ईरान ने भी कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इस संघर्ष में खाड़ी क्षेत्र के कई देश प्रभावित हुए हैं। जिसके बाद हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि अंतरराष्ट्रीय निवेशकों में घबराहट साफ दिखाई दे रही है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि यदि यह तनाव लंबा चला तो वैश्विक सप्लाई चेन, ऊर्जा आपूर्ति और वित्तीय बाजारों पर गहरा असर पड़ेगा।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल तय
भारत अपनी जरूरत का करीब 80% कच्चा तेल आयात करता है। इसका बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है। यदि इस समुद्री मार्ग पर खतरा बढ़ता है या इसे अस्थायी रूप से बंद किया जाता है, तो तेल की सप्लाई बाधित हो सकती है ।बता दें कि शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 2.78% बढ़कर 67.02 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि सोमवार को बाजार खुलते ही कीमतों में और तेज उछाल देखने को मिल सकता है।
भारत पर क्या असर होगा
- पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं।
- ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ेगी।
- रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं।
- महंगाई दर में इजाफा संभव। बता दें कि अगर तेल 75-80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार करता है, तो भारत का चालू खाता घाटा (CAD) भी बढ़ सकता है।
शेयर बाजार में भारी गिरावट की आशंका
दरअसल, युद्ध जैसे हालात में निवेशक जोखिम से बचने की कोशिश करते हैं। अब ऐसे में शेयर बाजार में बिकवाली बढ़ जाती है। शुक्रवार को भारतीय बाजार में इसका असर साफ दिखा।
- सेंसेक्स 961 अंक (1.17%) गिरकर बंद हुआ
- निफ्टी 317 अंक (1.25%) टूट गया। वहीं, सोमवार को बाजार खुलने पर और गिरावट देखने को मिल सकती है, खासकर अगर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कमजोरी बनी रहती है।
किन सेक्टरों पर ज्यादा असर
एविएशन सेक्टर
- एयरलाइंस कंपनियों के लिए ईंधन सबसे बड़ी लागत होती है। तेल महंगा होने से इन कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ेगा।
ऑटो सेक्टर
- कच्चे माल और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ने से ऑटो कंपनियों की लागत बढ़ सकती है।
पेंट और केमिकल इंडस्ट्री
- इन उद्योगों में पेट्रोलियम आधारित कच्चे माल का उपयोग होता है, इसलिए इन पर सीधा असर पड़ेगा।
एफएमसीजी सेक्टर
- पैकेजिंग और ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने से कंपनियां कीमतें बढ़ा सकती हैं।हालांकि, कुछ सेक्टर जैसे डिफेंस और ऑयल एक्सप्लोरेशन कंपनियों को फायदा भी हो सकता है।

सोना-चांदी में तेज़ी की उम्मीद
जानकारी के लिए बता दें कि जब भी दुनिया में युद्ध या अस्थिरता बढ़ती है, निवेशक सुरक्षित निवेश ऑप्शन की ओर रुख करते हैं। सोना और चांदी को पारंपरिक रूप से सेफ हेवन माना जाता है।
- 10 ग्राम सोना लगभग 1,61,971 रुपये।
- चांदी करीब 2,74,389 रुपये प्रति किलोग्राम। अब अगर युद्ध लंबा खिंचता है, तो सोने की कीमतों में और तेजी आ सकती है। निवेशक इक्विटी से पैसा निकालकर गोल्ड ईटीएफ और फिजिकल गोल्ड में निवेश कर सकते हैं।
रुपये पर भी पड़ेगा दबाव
बता दें कि तेल की कीमतों में तेजी से भारत का आयात बिल बढ़ेगा। इससे डॉलर की मांग बढ़ सकती है और रुपये पर दबाव आएगा। यदि रुपया कमजोर होता है, तो आयात और महंगा हो जाएगा, जिससे महंगाई और बढ़ सकती है।
महंगाई और ब्याज दरों पर असर
अब ऐसे में अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो महंगाई दर बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में रिजर्व बैंक को ब्याज दरों पर सख्त रुख अपनाना पड़ सकता है। ब्याज दर बढ़ने से लोन महंगे हो सकते हैं और रियल एस्टेट सेक्टर पर असर पड़ सकता है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए
- घबराहट में फैसला न लें।
- पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखें।
- सुरक्षित निवेश विकल्पों पर ध्यान दें।
- लंबी अवधि के निवेशक गिरावट को अवसर के रूप में देख सकते हैं।
ये भी पढ़ें: New Traffic Rule 2026: बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़े तो सस्पेंड होगा ड्राइविंग लाइसेंस!



