Israel Hezbollah War: मध्य पूर्व में शांति की उम्मीदों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। बताया जा रहा है की इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच दक्षिणी लेबनान में संघर्ष अचानक तेज हो गया है। जिससे रातभर चले हमलों और जवाबी कार्रवाई में इजरायल के चार सैनिकों की मौत हो गई, जबकि इजरायली एयरस्ट्राइक में कम से कम 18 लेबनानी नागरिकों की जान चली गई। बढ़ती हिंसा के बीच अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुई युद्धविराम डील पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
रातभर चली भीषण लड़ाई
जानकारी के लिए बता दें दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों में पूरी रात भारी गोलीबारी और हवाई हमले होते रहे। जिससे इजरायली सेना ने जांच की है कि हिज्बुल्लाह के हमले में उसके चार सैनिक मारे गए हैं, जिनमें एक वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल है। वहीं ड्रोन हमले में कई सैनिक घायल हुए हैं।
दूसरी ओर, लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इजरायली हमलों में 18 नागरिकों की मौत हुई है और 33 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। कई इलाकों में राहत और बचाव कार्य भी प्रभावित हुआ है, जिससे मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
हारौफ गांव में सबसे ज्यादा तबाही
टायर शहर के पास स्थित हारौफ गांव सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। यहां इजरायली बमबारी में सात लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है। स्थानीय प्रशासन और राहत एजेंसियां लगातार बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।
हिज्बुल्लाह ने किया बड़ा दावा
हिज्बुल्लाह ने दावा किया है कि उसके लड़ाकों ने अली अल-ताहेर पहाड़ी क्षेत्र में इजरायली सेना पर घात लगाकर हमला किया। संगठन का कहना है कि उसने गाइडेड मिसाइलों से इजरायल के तीन मरकवा टैंकों को नष्ट कर दिया और रॉकेट व तोपों से सैनिकों को निशाना बनाया।
हिज्बुल्लाह ने यह भी दावा किया कि जब इजरायली सेना अपने घायल जवानों को निकालने पहुंची, तब भी उसके लड़ाकों ने जवाबी हमला किया।
इजरायल ने क्या कहा?
ऐसे में इजरायल का कहना है कि हिज्बुल्लाह लगातार युद्धविराम का उल्लंघन कर रहा था, जिसके जवाब में उसने उसके ठिकानों और लड़ाकों को निशाना बनाया। इजरायली सेना के अनुसार उसकी कार्रवाई केवल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की जा रही है।
इजरायल ने यह भी साफ कर दिया है कि वह दक्षिणी लेबनान में अपने सुरक्षा क्षेत्र को बनाए रखेगा और जरूरत पड़ने पर आगे भी सैन्य कार्रवाई जारी रख सकता है।
अमेरिका-ईरान डील पर बढ़ा खतरा
इजरायल और लेबनान के बीच बढ़ती हिंसा ने अमेरिका और ईरान के बीच हुई हालिया डील को मुश्किल में डाल दिया है। इस समझौते के तहत क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई रोकने और परमाणु कार्यक्रम पर आगे बातचीत करने की योजना बनाई गई थी। हालांकि लेबनान में जारी हमलों के कारण ईरान ने स्विट्जरलैंड में होने वाली अगली वार्ता में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया है। इससे शांति प्रक्रिया को बड़ा झटका लगा है।
जेडी वेंस का दौरा टला
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को स्विट्जरलैंड में ईरान के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के लिए जाना था, लेकिन उनका दौरा अचानक स्थगित कर दिया गया। व्हाइट हाउस ने इसके पीछे लॉजिस्टिक कारण बताए हैं। हालांकि कई रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि ईरान ने लेबनान में जारी हमलों को डील का उल्लंघन मानते हुए बातचीत से दूरी बना ली है।
फ्रांस ने अमेरिका से की अपील
फ्रांस ने अमेरिका से अपील की है कि वह इजरायल पर दबाव बनाए ताकि लेबनान में सैन्य कार्रवाई रोकी जा सके। फ्रांस का मानना है कि यदि हिंसा नहीं रुकी तो पूरे मध्य पूर्व में फिर से बड़े युद्ध की स्थिति पैदा हो सकती है।

अब तक कितनी हुईं मौतें?
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, मार्च से अब तक इजरायली हमलों में लगभग 3,900 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें महिलाएं, बच्चे और स्वास्थ्यकर्मी भी शामिल हैं। वहीं इजरायल की ओर से अब तक कम से कम 32 सैनिक और चार नागरिकों की मौत की पुष्टि की गई है। लगातार बढ़ती हिंसा के कारण दोनों देशों के सीमावर्ती इलाकों से हजारों लोग पलायन कर चुके हैं।
इजरायली मंत्रियों के तीखे बयान
दरअसल चार सैनिकों की मौत के बाद इजरायल के दक्षिणपंथी नेताओं के बयान भी काफी आक्रामक हो गए हैं। कई नेताओं ने हिज्बुल्लाह के खिलाफ और सख्त सैन्य कार्रवाई की मांग की है। इस बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि जब तक इजरायल की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक उसकी सेना दक्षिणी लेबनान के सुरक्षा क्षेत्र में बनी रहेगी।
अमेरिका और इजरायल के बीच मतभेद
बता दें की हाल के दिनों में अमेरिका और इजरायल के बीच भी मतभेद बढ़ते नजर आ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप युद्ध को सीमित रखना चाहते हैं, जबकि इजरायल के कुछ नेता सैन्य कार्रवाई जारी रखने के पक्ष में हैं।
अमेरिका का मानना है कि लगातार युद्ध से वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल बाजार पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। इसी वजह से वॉशिंगटन क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।
अब आगे क्या होगा?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले 60 दिन बेहद अहम साबित हो सकते हैं। यदि अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते पर आगे बातचीत सफल नहीं होती और लेबनान में हिंसा जारी रहती है, तो पूरे मध्य पूर्व में एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का खतरा बढ़ सकता है।
फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इजरायल, लेबनान, ईरान और अमेरिका के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। बढ़ते तनाव के बीच यह सवाल सबसे बड़ा है कि क्या शांति की कोशिशें सफल होंगी या फिर मध्य पूर्व एक और बड़े युद्ध की ओर बढ़ जाएगा।
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