Jammu Kashmir Encounter: जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में आज रविवार को सुरक्षाबलों ने एक बड़े आतंक विरोधी अभियान को अंजाम देते हुए तीन आतंकियों को मार गिराया है। बता दें कि मारे गए आतंकियों में प्रतिबंधित संगठन जैश-ए-मोहम्मद का टॉप कमांडर सैफुल्लाह भी शामिल बताया जा रहा है। दरअसल, यह मुठभेड़ जिले के संवेदनशील चटरू जंगल इलाके में हुई, जहां पिछले कुछ समय से आतंकी गतिविधियों की सूचना मिल रही थी।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, खुफिया इनपुट के आधार पर सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की संयुक्त टीम ने तलाशी अभियान शुरू किया था। वहीं, इसी दौरान आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर अचानक फायरिंग कर दी, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई।
ऑपरेशन त्राशी-1 के तहत चलाया गया अभियान
जानकारी के मुताबिक, इस कार्रवाई को ऑपरेशन त्राशी-1 नाम दिया गया था। जिसमें अभियान का उद्देश्य किश्तवाड़ क्षेत्र में सक्रिय आतंकियों का पता लगाना और उन्हें निष्क्रिय करना था। विश्वसनीय खुफिया जानकारी के बाद संयुक्त टीम ने चटरू बेल्ट के पासेरकुट इलाके में घेराबंदी की है।
जिसमें करीब सुबह 10:30 बजे एक पहाड़ी पर बने मिट्टी के घर से आतंकियों ने जवानों पर अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। सुरक्षाबलों ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की। कई घंटों तक चली मुठभेड़ के बाद तीनों आतंकियों को मार गिराया गया।
सैफुल्लाह 20 बार दे चुका था चकमा
सुरक्षा बलों का कहना है कि मारा गया आतंकी सैफुल्लाह लंबे समय से सुरक्षाबलों की सूची में शामिल था। वह पिछले कई अभियानों में सुरक्षा बलों को चकमा देकर भागने में सफल रहा था। बताया जा रहा है कि वह करीब 20 बार घेराबंदी से बच निकला था। सैफुल्लाह पर कई आतंकी घटनाओं में शामिल होने का शक था। वह क्षेत्र में बड़ी साजिश रचने की फिराक में था। उसकी मौत को सुरक्षाबलों की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
दो AK-47 राइफल और हथियार बरामद
मुठभेड़ के बाद जब सुरक्षाबलों ने इलाके की तलाशी ली तो वहां से दो AK-47 राइफल, भारी मात्रा में गोला-बारूद और अन्य संदिग्ध सामान बरामद किया गया। अधिकारियों के अनुसार, आतंकियों ने जिस झोपड़ी में शरण ली थी, वह फायरिंग के दौरान आग की चपेट में आ गई। बाद में वहां से जले हुए शव बरामद किए गए, जिनकी पहचान की प्रक्रिया जारी है। बता दें कि बरामद हथियारों से अंदाजा लगाया जा रहा है कि आतंकी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की तैयारी में थे।
चटरू संवेदनशील और दुर्गम इलाका
किश्तवाड़ का चटरू इलाका पहले भी आतंकी गतिविधियों के कारण चर्चा में रहा है। जिसमें यह क्षेत्र घने जंगलों और पहाड़ी भूभाग से घिरा हुआ है, जो आतंकियों के छिपने के लिए अनुकूल माना जाता है। सुरक्षा बल लंबे समय से यहां सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं। जिसमें ड्रोन और आधुनिक निगरानी उपकरणों की मदद से पूरे इलाके की निगरानी की जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि आसपास और भी आतंकी छिपे हो सकते हैं। इसी वजह से सर्च और कॉर्डन ऑपरेशन अभी जारी है।

इलाके में बढ़ाई गई सुरक्षा
मुठभेड़ के बाद पूरे क्षेत्र को घेर लिया गया है। स्थानीय लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कुछ मार्गों पर आवाजाही सीमित कर दी गई है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें। जिसमें सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि जो लोग शांति भंग करने की कोशिश करेंगे, उन्हें कहीं भी शरण नहीं मिलेगी। सुरक्षाबल पूरी सतर्कता के साथ इलाके में अभियान चला रहे हैं।
व्हाइट नाइट कोर का बयान
सेना की व्हाइट नाइट कोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि खुफिया विभाग और स्थानीय पुलिस से मिली विश्वसनीय सूचनाओं के आधार पर यह संयुक्त अभियान चलाया गया। सीआईएफ (काउंटर इंटेलिजेंस फोर्स) डेल्टा, पुलिस और सीआरपीएफ की टीम ने दुर्गम क्षेत्र में आतंकियों को घेरकर कार्रवाई की। बता दें कि सेना ने पुष्टि की कि मुठभेड़ में तीन आतंकवादी मारे गए हैं और अभियान अभी भी जारी है।
पिछले महीने भी हुई थीं मुठभेड़
जानकारी के लिए बता दें पिछले महीने भी चटरू वन क्षेत्र में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच करीब छह बार मुठभेड़ हुई थी। इन झड़पों में एक सैनिक शहीद हुआ था और एक आतंकी मारा गया था।जिसमें आज रविवार की कार्रवाई के साथ ही इस साल जम्मू क्षेत्र में अलग-अलग मुठभेड़ों में अब तक सात आतंकियों को ढेर किया जा चुका है, जिनका संबंध जैश-ए-मोहम्मद से बताया जा रहा है। इससे पहले उधमपुर में दो और कठुआ जिले में एक आतंकी मारा गया था।
बड़ी साजिश नाकाम
खुफिया सूत्रों का कहना है कि ये आतंकी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की योजना बना रहे थे। समय रहते की गई कार्रवाई से एक संभावित हमले को टाल दिया गया है। सुरक्षाबलों की तत्परता और संयुक्त अभियान ने एक बार फिर साबित किया है कि आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम किया जा रहा है।
जांच जारी, पहचान की प्रक्रिया शुरू
दरअसल, मारे गए आतंकियों की पूरी पहचान और उनके नेटवर्क की जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि उन्हें स्थानीय स्तर पर किसने मदद पहुंचाई। बरामद हथियारों और संचार उपकरणों की फॉरेंसिक जांच की जाएगी।
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