Karnataka CM News: कर्नाटक की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के इस्तीफे की खबरों ने राज्य की सियासत को पूरी तरह गर्म कर दिया है. बेंगलुरु से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस के भीतर नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चाओं का दौर तेज है. इसी बीच उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का नाम नए मुख्यमंत्री के तौर पर सबसे आगे बताया जा रहा है. हालांकि कांग्रेस हाईकमान की ओर से अभी तक किसी आधिकारिक फैसले की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि राज्य में जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि सिद्धारमैया ने मंत्रियों के साथ बैठक में अपने इस्तीफे की बात कही है, जबकि कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने इन खबरों को सिर्फ अटकल करार दिया है.
ब्रेकफास्ट मीटिंग के बाद बढ़ीं चर्चाएं
गुरुवार सुबह मुख्यमंत्री आवास पर हुई अहम ब्रेकफास्ट मीटिंग के बाद राजनीतिक हलचल और तेज हो गई. इस बैठक में कई मंत्री और वरिष्ठ विधायक मौजूद रहे. बताया जा रहा है कि बैठक के दौरान सत्ता परिवर्तन को लेकर चर्चा हुई. इसी दौरान डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया के बीच गर्मजोशी भी देखने को मिली. सूत्रों के अनुसार, सिद्धारमैया ने अपने सहयोगियों को बताया कि वह पार्टी हाईकमान के फैसले का सम्मान करेंगे. हालांकि इस पर कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है.
क्या कांग्रेस में हुआ था ढाई-ढाई साल का समझौता?
कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023 में कांग्रेस की बड़ी जीत के बाद से ही यह चर्चा रही कि सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर एक फार्मूला तय हुआ था. राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि सिद्धारमैया पहले ढाई साल मुख्यमंत्री रहेंगे और उसके बाद डीके शिवकुमार को मौका दिया जाएगा. हालांकि कांग्रेस ने कभी सार्वजनिक रूप से इस समझौते की पुष्टि नहीं की. लेकिन अब जब सरकार को लगभग ढाई साल पूरे होने वाले हैं, तब नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों ने जोर पकड़ लिया है.
डीके शिवकुमार क्यों हैं मजबूत दावेदार?
डीके शिवकुमार को कांग्रेस का संकटमोचक माना जाता है. पार्टी संगठन पर उनकी मजबूत पकड़ है और दक्षिण भारत में कांग्रेस के बड़े रणनीतिकारों में उनकी गिनती होती है. कर्नाटक चुनाव के दौरान उन्होंने संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई थी. उनकी खास बात यह भी है कि वह वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं, जिसका राज्य की राजनीति में बड़ा प्रभाव माना जाता है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश कर सकती है.
सिद्धारमैया का राजनीतिक कद अब भी मजबूत
हालांकि सत्ता परिवर्तन की अटकलों के बीच सिद्धारमैया का राजनीतिक प्रभाव कम नहीं हुआ है. वह राज्य में ओबीसी और AHINDA वोट बैंक के बड़े नेता माने जाते हैं. ग्रामीण इलाकों में उनकी पकड़ अब भी काफी मजबूत है. कांग्रेस के कई विधायक और मंत्री चाहते हैं कि सिद्धारमैया अपना कार्यकाल जारी रखें. कुछ नेताओं ने खुलकर कहा है कि उनके नेतृत्व में सरकार स्थिर है और अचानक बदलाव पार्टी को नुकसान पहुंचा सकता है.
कांग्रेस हाईकमान की रणनीति पर नजर
दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान लगातार कर्नाटक के घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है. राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और केसी वेणुगोपाल समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने हाल के दिनों में राज्य नेतृत्व के साथ बैठकें की हैं. कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने हाल ही में कहा था कि मुख्यमंत्री बदलने को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है और पार्टी उचित समय पर जानकारी देगी. इस बयान से साफ है कि पार्टी फिलहाल किसी जल्दबाजी में नहीं दिखना चाहती. कांग्रेस यह भी सुनिश्चित करना चाहती है कि नेतृत्व परिवर्तन से सरकार या संगठन में किसी तरह की टूट-फूट न हो.
राज्यपाल से मुलाकात की चर्चाएं
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सिद्धारमैया ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मिलने का समय मांगा था. इसके बाद इस्तीफे की अटकलें और तेज हो गईं. हालांकि उस समय राज्यपाल बेंगलुरु में मौजूद नहीं थे. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि मुख्यमंत्री वास्तव में इस्तीफा देते हैं तो कांग्रेस विधायक दल की बैठक बुलाकर नए नेता का चुनाव किया जाएगा.
विपक्ष ने कांग्रेस पर साधा निशाना
भाजपा और जेडीएस ने कांग्रेस के भीतर चल रही उठापटक को लेकर हमला बोला है. भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस सरकार अंदरूनी संघर्ष से जूझ रही है और इसका असर शासन पर पड़ रहा है. भाजपा नेताओं ने दावा किया कि कांग्रेस सत्ता संघर्ष में उलझी हुई है जबकि जनता के मुद्दे पीछे छूट गए हैं. वहीं जेडीएस ने इसे कांग्रेस की अंदरूनी कमजोरी बताया.
क्या बदलेगा कर्नाटक का राजनीतिक समीकरण?
अगर डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री बनते हैं तो यह कर्नाटक की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जाएगा. इससे कांग्रेस सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को नए तरीके से साधने की कोशिश करेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस 2028 विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए नेतृत्व परिवर्तन पर विचार कर सकती है. पार्टी चाहती है कि दोनों बड़े नेताओं के बीच संतुलन बना रहे और किसी भी तरह का असंतोष खुलकर सामने न आए.
जनता के बीच क्या संदेश जाएगा?
सत्ता परिवर्तन की चर्चा के बीच आम जनता की नजरें कांग्रेस के अगले कदम पर टिकी हैं. एक तरफ सिद्धारमैया के समर्थक उन्हें जारी रखने की मांग कर रहे हैं, वहीं डीके शिवकुमार समर्थकों में उत्साह देखा जा रहा है. सोशल मीडिया पर भी दोनों नेताओं को लेकर जबरदस्त बहस चल रही है. कुछ लोग इसे कांग्रेस की रणनीतिक चाल बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे पार्टी के भीतर सत्ता संघर्ष के रूप में देख रहे हैं.
आधिकारिक घोषणा का इंतजार
फिलहाल कर्नाटक की राजनीति पूरी तरह अटकलों के दौर में है. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया या कांग्रेस हाईकमान की ओर से कोई अंतिम आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. लेकिन लगातार हो रही बैठकों और राजनीतिक गतिविधियों ने यह साफ कर दिया है कि राज्य में कुछ बड़ा होने वाला है. अब सबकी नजर कांग्रेस नेतृत्व और आगामी राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई है. आने वाले कुछ दिन कर्नाटक की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं.
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