Karnataka Political: कर्नाटक में इन दिन नेतृत्व परिवर्तन को लेकर सियासी हलचल बनी हुई है। इस बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच ब्रेकफ़ास्ट मीटिंग हुई, जो अब सियासत में गर्म माहौल बना रही है। बताया जा रहा है कि यह दोनों ही नेताओं सीएम आवास ‘कावेरी’ में मुलाकात करेंगे।
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बता दें कि यह बैठक कांग्रेस हाईकमान के निर्देश पर बुलाई गई है, जिससे साफ होता है कि पार्टी स्थिति पर गंभीरता से नजर बनाएं हुई है।
हाईकमान के फैसले को स्वीकार करने की बात दोहराई
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने स्पष्ट कहा है कि वह वरिष्ठ नेताओं के निर्णय का सम्मान करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी हाईकमान ने गतिरोध खत्म करने के लिए उन्हें और शिवकुमार को साथ बैठकर चर्चा करने की सलाह दी है।
वहीं, सीएम सिद्धारमैया अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखाते हैं कि “मैं अपने रुख पर कायम हूं। वरिष्ठ नेताओं ने जो कहा है, उसी के अनुसार काम करूंगा। कल हम साथ बैठकर बातचीत करेंगे। डी.के. शिवकुमार भी हाईकमान के आदेश का पालन करने की बात कह चुके हैं। यदि मुझे दिल्ली बुलाया जाता है, तो मैं तैयार हूं।”
2.5 साल रोटेशनल फॉर्मूला
उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पिछले कुछ समय से ‘2.5 साल रोटेशनल फॉर्मूला’ का मुद्दा उठा रहे हैं। उनके समर्थक विधायकों ने दिल्ली जाकर हाईकमान से शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने की भी मांग भी की है। शिवकुमार ने हाल ही में एक कार्यक्रम में सोनिया गांधी के ‘त्याग’ का भी उदाहरण दिया है और कहा कि यह एक संकेतात्मक टिप्पणी है, जिसे सिद्धारमैया पर निशाने के रूप में देखा जा रहा है।

नेतृत्व परिवर्तन पर बढ़ी अटकलें
कांग्रेस हाईकमान में अब दोनों ही नेताओं की दावेदारी, राजनीतिक समीकरण और सामाजिक आधार का आकलन में जुट गई है। सीएम सिद्धारमैया का SC-ST, अल्पसंख्यक और OBC समुदायों में मजबूत है। शिवकुमार संगठनात्मक क्षमता और चुनाव प्रबंधन के लिए हाईकमान के भरोसेमंद नेता है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व हर विकल्प का राजनीतिक नफा-नुकसान को ध्यान में रखते हुए अपना अगला कदम उठाएंगा।
मंत्रियों के बयान से विवाद ओर अधिक बढ़ा
वहीं, कई मंत्रियों और नेताओं के बयानों से विवाद और भी अधिक तेज हो गया है। गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने शिवकुमार के समर्थन में बयान दिया है, तो दूसरी ओर सिद्धारमैया समर्थक ज़मीर अहमद खान ने तुरंत इसका विरोध किया। इसके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का कहना है कि यह “आंतरिक मामला” है और सार्वजनिक टिप्पणी पर रोक लगाई जाए।
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