Keir Starmer Epstein Files: ब्रिटेन की राजनीति इन दिनों एक बड़े विवाद से गुजर रही है। बताया जा रहा है कि, प्रधानमंत्री कीर स्टॉर्मर पर सीधे तौर पर कोई आरोप नहीं लगा है, लेकिन जेफरी एपस्टीन से जुड़े खुलासों ने उनकी सरकार को गहरे संकट में डाल दिया है। वहीं, इस पूरे मामले के केंद्र में लेबर पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राजदूत पीटर मैंडेलसन हैं, जिनके एपस्टीन से संबंध सामने आने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। दरअसल, जनवरी 2026 में अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी नई फाइलों में एपस्टीन के कई प्रभावशाली लोगों से संबंधों का जिक्र किया गया। इन्हीं दस्तावेजों में पीटर मैंडेलसन और एपस्टीन के बीच पुराने रिश्तों की बात सामने आई है। जिसमें आरोप है कि वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान मैंडेलसन ने एपस्टीन को संवेदनशील सरकारी जानकारी दी थी और उससे आर्थिक लाभ भी लिया था। हालांकि, अभी तक इन आरोपों में न तो उनकी गिरफ्तारी हुई है और न ही औपचारिक आरोप तय किए गए हैं।
जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री कीर स्टॉर्मर का नाम इन फाइलों में सीधे तौर पर शामिल नहीं है, लेकिन विवाद इसलिए बढ़ा क्योंकि उन्होंने 2024 में मैंडेलसन को अमेरिका में ब्रिटेन का राजदूत नियुक्त किया था। उस समय तक एपस्टीन से जुड़े उनके पुराने संबंध सार्वजनिक चर्चा का विषय बन चुके थे। बाद में सितंबर 2025 में स्टॉर्मर ने उन्हें पद से हटा दिया, लेकिन नई फाइलों के सामने आने से विवाद फिर गहरा गया।
स्टॉर्मर का सबसे बड़ा संकट
बताया जा रहा है कि इस मामले ने स्टॉर्मर की राजनीतिक पर सवाल खड़े कर दिए हैं।जिसमें विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी का कहना है कि प्रधानमंत्री ने ऐसे व्यक्ति पर भरोसा किया, जिसके संबंध पहले से संदिग्ध थे। कंजर्वेटिव नेता केमी बैडेनोच ने स्टॉर्मर पर लगातार गलत फैसले लेने का आरोप लगाया और कहा कि उनकी स्थिति अब कमजोर हो चुकी है।
अकेले और कमजोर पड़े स्टॉर्मर
विवाद का असर सरकार के भीतर भी दिखाई दे रहा है। स्टॉर्मर के करीबी सहयोगी और चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी ने फरवरी 2026 में इस्तीफा दे दिया और इस नियुक्ति की जिम्मेदारी खुद ली। इसके बाद प्रधानमंत्री के कम्युनिकेशन डायरेक्टर टिम एलन ने भी पद छोड़ दिया। लगातार हो रहे इस्तीफों ने यह संकेत दिया कि सरकार दबाव में है और नेतृत्व पर भरोसा कम हो रहा है। साथ ही,
लेबर पार्टी के भीतर भी मतभेद उभरने लगे हैं। कुछ सांसदों का मानना है कि मैकस्वीनी के जाने से प्रधानमंत्री को नई शुरुआत का मौका मिलेगा, जबकि अन्य नेताओं का कहना है कि इस विवाद से पार्टी की साख को गहरा नुकसान हुआ है। वरिष्ठ सांसद एमिली थॉर्नबेरी ने भी माना कि पार्टी को भरोसा बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।

पीड़ितों से मांगी माफी
प्रधानमंत्री स्टॉर्मर ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए एपस्टीन के पीड़ितों से माफी मांगी है। जिसमें उन्होंने स्वीकार किया कि मैंडेलसन की नियुक्ति एक गलती थी और कहा कि उन्हें गलत जानकारी दी गई थी। साथ ही, उन्होंने नियुक्ति से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने का वादा किया है, ताकि सच्चाई सामने आ सके। जिसमें पुलिस भी इस मामले की जांच कर रही है कि क्या मैंडेलसन ने सार्वजनिक पद पर रहते हुए किसी तरह का अवैध काम किया था। कुछ दस्तावेजों में संकेत मिले हैं कि उन्होंने कई साल पहले गोपनीय जानकारी साझा की हो सकती है। यदि आरोप साबित होते हैं तो गंभीर कानूनी कार्रवाई संभव है, हालांकि फिलहाल जांच जारी है।
क्या एपस्टीन के वजह से कुर्सी गंवा देंगे स्टॉर्मर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह स्टॉर्मर सरकार का अब तक का सबसे बड़ा संकट है। पहले से ही आर्थिक विकास महंगाई नियंत्रण और सार्वजनिक सेवाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर सरकार दबाव में थी। ऐसे समय में यह विवाद उनकी छवि को और कमजोर कर सकता है। बता दें कि, सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या स्टॉर्मर को इस्तीफा देना पड़ेगा। अभी तक उन्होंने पद छोड़ने के संकेत नहीं दिए हैं, लेकिन पार्टी और संसद के भीतर बढ़ते दबाव को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा। यदि परिस्थितियां बिगड़ती हैं और उन्हें पद छोड़ना पड़ता है, तो वे एपस्टीन विवाद की वजह से कुर्सी गंवाने वाले दुनिया के पहले प्रधानमंत्री बन सकते हैं। फिलहाल ब्रिटेन की राजनीति अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। जांच के नतीजे, पार्टी का रुख और जनता की प्रतिक्रिया इन तीनों पर स्टॉर्मर का भविष्य निर्भर करेगा। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि यह विवाद केवल राजनीतिक तूफान है या फिर ब्रिटेन के नेतृत्व में बड़े बदलाव की शुरुआत।
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