BJP Kerala Agenda: केरल में हालिया विधानसभा चुनाव में तीन सीटों पर जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी ने राज्य की राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए नई रणनीति तैयार कर ली है। जिसमें पार्टी ने आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए 13 सूत्रीय राजनीतिक एजेंडा जारी किया है। जिसमें इस एजेंडे में खासतौर पर हिंदू पिछड़े वर्गों, ओबीसी समुदाय और सबरीमला जैसे भावनात्मक मुद्दों को प्रमुखता दी गई है। वहीं, अल्पसंख्यक समुदाय खासकर चर्च नेतृत्व के साथ पुराने तरीके की राजनीतिक नजदीकी से पार्टी कुछ दूरी बनाती दिखाई दे रही है।
तिरुवनंतपुरम में आयोजित बीजेपी की कोर कमेटी की बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया गया। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय मंत्री और केरल बीजेपी अध्यक्ष Rajeev Chandrasekhar ने की। पार्टी का मानना है कि केरल में अब केवल एलडीएफ और यूडीएफ ही नहीं, बल्कि बीजेपी भी एक मजबूत तीसरे राजनीतिक विकल्प के रूप में उभर रही है।
ओबीसी वोट बैंक पर BJP का बड़ा फोकस
बीजेपी ने अपने नए एजेंडे में ओबीसी आरक्षण के मुद्दे को सबसे अहम राजनीतिक हथियार बनाया है। पार्टी का कहना है कि आरक्षण केवल सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए होना चाहिए, धर्म के आधार पर नहीं। बीजेपी ने आरोप लगाया कि केरल में अल्पसंख्यक समुदाय का एक हिस्सा ओबीसी श्रेणी के तहत आरक्षण का लाभ उठा रहा है, जिससे वास्तविक पिछड़े वर्गों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि बीजेपी “सबके लिए न्याय, किसी का तुष्टिकरण नहीं” की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार मुस्लिम लीग और जमात-ए-इस्लामी जैसे संगठनों के दबाव में तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है। बीजेपी अब इस मुद्दे को गांव-गांव और बूथ स्तर तक ले जाने की तैयारी में है।
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि बीजेपी अब केरल में हिंदू पिछड़े वर्गों, विशेषकर ओबीसी समुदाय के बीच अपनी मजबूत पहचान बनाना चाहती है। पार्टी को उम्मीद है कि इससे उसे पारंपरिक वोट बैंक से बाहर निकलकर नए सामाजिक समूहों का समर्थन मिलेगा।
Beyond our 3 historic wins in Nemom, Chathannoor & Kazhakkoottam, a much deeper shift is happening in Keralam.
BJP/NDA vote share has now crossed 20% in 21 seats, and 30% in 10!
Deepest thanks to the Malayalees rejecting Congress/CPM politics of lies, corruption and… pic.twitter.com/QN4vm4uXoy
— Rajeev Chandrasekhar 🇮🇳 (@RajeevRC_X) May 6, 2026
माइनॉरिटी रणनीति में बदलाव
केरल चुनाव से पहले बीजेपी ने चर्च और क्रिश्चियन समुदाय के साथ रिश्ते मजबूत करने के लिए कई प्रयास किए थे। चर्च प्रतिनिधियों से मुलाकात, क्रिश्चियन नेताओं को मंच पर जगह और समुदाय के मुद्दों पर समर्थन जैसे कदम उठाए गए थे। लेकिन नए 13 सूत्रीय एजेंडे में चर्च या क्रिश्चियन आउटरीच का कोई विशेष उल्लेख नहीं किया गया।
जानकारी के अनुसार, पार्टी ने पूरी तरह दूरी नहीं बनाई है, लेकिन अब संस्थागत स्तर पर चर्च नेतृत्व के साथ राजनीतिक तालमेल बढ़ाने की रणनीति से पीछे हटने का फैसला किया है। इसकी एक वजह कांग्रेस नेतृत्व वाले यूडीएफ और चर्च नेतृत्व की बढ़ती नजदीकी मानी जा रही है। इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा लाए गए एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026 का चर्च द्वारा विरोध भी बीजेपी के लिए असहज स्थिति बन गया। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बीजेपी अब केरल में सीधे हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण और पिछड़े वर्गों के बीच विस्तार पर ज्यादा ध्यान देना चाहती है।
सबरीमला मुद्दे को फिर हवा
बीजेपी ने अपने एजेंडे में Sabarimala Temple से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता दी है। पार्टी ने सबरीमला गोल्ड लूट मामले में सीबीआई जांच की मांग उठाई है। साथ ही महिलाओं के प्रवेश को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने की भी मांग की गई है। बीजेपी का मानना है कि सबरीमला का मुद्दा अब भी राज्य के हिंदू मतदाताओं के बीच भावनात्मक असर रखता है। पार्टी इस मुद्दे के जरिए परंपरा, आस्था और हिंदू पहचान की राजनीति को मजबूत करना चाहती है। इसके अलावा बीजेपी ने मंदिरों की संपत्तियों और परिसंपत्तियों का ऑडिट कराने की मांग भी उठाई है। पार्टी का कहना है कि मंदिरों की संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता जरूरी है।
शिक्षा, कट्टरपंथ और नशे पर भी फोकस
13 सूत्रीय एजेंडे में शिक्षा संस्थानों में निवेश बढ़ाने की बात भी कही गई है। बीजेपी ने दावा किया कि राज्य में युवाओं को कट्टरपंथी संगठनों, आतंकवादी गतिविधियों और नशे के जाल से बचाने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है। पार्टी ने कहा कि शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ाकर युवाओं को सकारात्मक दिशा दी जा सकती है। बीजेपी अब इन मुद्दों को भी अपने चुनावी अभियान का हिस्सा बनाने जा रही है।
20% वोट शेयर का लक्ष्य अब भी दूर
ऐसे में BJP ने तीन सीटें जीतकर राज्य की राजनीति में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है, लेकिन वोट शेयर के आंकड़े पार्टी के लिए अभी भी चुनौती बने हुए हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, 2026 विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 11.42 प्रतिशत वोट मिले, जबकि 2021 में यह आंकड़ा 11.30 प्रतिशत था। यानी सीटों में बढ़त के बावजूद वोट शेयर में बहुत बड़ा बदलाव नहीं आया। पार्टी ने 20 प्रतिशत वोट शेयर हासिल करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन वह अभी इससे काफी पीछे है।
राजनीतिक एक्सपर्ट्स कहना है कि केरल की राजनीति लंबे समय से एलडीएफ और यूडीएफ के बीच बंटी रही है। ऐसे में बीजेपी के लिए बड़े स्तर पर वोट शेयर बढ़ाना आसान नहीं होगा। हालांकि पार्टी लगातार हिंदू वोटों के एकीकरण और नए सामाजिक समीकरण बनाने की कोशिश कर रही है।
क्या केरल में तीसरा विकल्प बन पाएगी बीजेपी?
बीजेपी का दावा है कि केरल की जनता अब पारंपरिक राजनीतिक विकल्पों से आगे बढ़कर तीसरी ताकत को भी मौका देने लगी है। पार्टी का मानना है कि हालिया चुनावी प्रदर्शन इसी बदलाव का संकेत है। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि केवल भावनात्मक और धार्मिक मुद्दों के सहारे केरल में बड़ी सफलता हासिल करना आसान नहीं होगा। राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक संतुलन जैसे मुद्दे भी बेहद अहम माने जाते हैं। अब देखना होगा कि बीजेपी का नया 13 सूत्रीय एजेंडा केरल की राजनीति में कितना असर डाल पाता है और क्या पार्टी आने वाले चुनावों में अपने 20 प्रतिशत वोट शेयर के लक्ष्य के करीब पहुंच पाएगी।
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