Kerala New CM VD Satheesan: केरल में मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही लंबी सियासी खींचतान आखिरकार खत्म हो गई है। कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता VD Satheesan को राज्य का नया मुख्यमंत्री चुन लिया है। आज गुरुवार को पार्टी की ओर से ऑफिशियल घोषणा की गई है। इसके साथ ही यह भी साफ हो गया कि कांग्रेस महासचिव KC Venugopal मुख्यमंत्री की रेस में पीछे रह गए। वहीं करीब 10 दिनों तक चली बैठकों, राय-मशवरे और अंदरूनी मंथन के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने वीडी सतीशन के नाम पर अंतिम मुहर लगाई है। पार्टी के इस फैसले को केरल कांग्रेस में एक बड़े राजनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
AICC ने किया नाम का ऐलान
बता दें की आज गुरुवार को कांग्रेस की केरल प्रभारी Deepa Dasmunshi ने मीडिया के सामने वीडी सतीशन के नाम की घोषणा की। इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर दौड़ गई। कई जगहों पर समर्थकों ने मिठाइयां बांटी और जश्न मनाया है। सतीशन के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही कांग्रेस ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी अब नए नेतृत्व और आक्रामक राजनीति के साथ आगे बढ़ना चाहती है।
10 दिन तक क्यों फंसा रहा फैसला?
केरल विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को आए थे। बाकी राज्यों में चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री के नामों का ऐलान हो गया था और शपथ ग्रहण भी हो चुका था। लेकिन केरल में कांग्रेस लगातार निर्णय नहीं ले पा रही थी।दरअसल, मुख्यमंत्री पद के लिए कांग्रेस में तीन बड़े चेहरे सामने थे। इनमें वीडी सतीशन, केसी वेणुगोपाल और Ramesh Chennithala शामिल थे। तीनों नेताओं के समर्थक अपने-अपने उम्मीदवार के पक्ष में माहौल बना रहे थे। पार्टी के भीतर लगातार बैठकों का दौर चल रहा था। विधायक दल के कई सदस्य केसी वेणुगोपाल के पक्ष में बताए जा रहे थे, जबकि जमीनी कार्यकर्ताओं और संगठन के बड़े हिस्से का समर्थन वीडी सतीशन को मिल रहा था।
कार्यकर्ताओं की पहली पसंद बने सतीशन
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में वीडी सतीशन पार्टी का सबसे मजबूत चेहरा बनकर उभरे हैं। 2022 में पार्टी की हार के बाद उन्होंने लगातार सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया और विपक्ष की राजनीति को मजबूत किया। उनकी सभाओं और प्रचार अभियान को जनता से अच्छा समर्थन मिला। यही कारण रहा कि कांग्रेस नेतृत्व ने अंत में संगठन और जनता के बीच उनकी लोकप्रियता को प्राथमिकता दी। सतीशन ने चुनाव प्रचार के दौरान बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, आर्थिक संकट और शासन व्यवस्था जैसे मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने वामपंथी सरकार को सीधे निशाने पर लिया और जनता के बीच कांग्रेस की मजबूत वापसी का माहौल बनाया।
केसी वेणुगोपाल क्यों पिछड़े?
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल को पार्टी के कई नवनिर्वाचित विधायकों का समर्थन प्राप्त था। उन्हें गांधी परिवार का करीबी भी माना जाता है। इसी वजह से उन्हें मुख्यमंत्री पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा था। हालांकि अंतिम समय में कांग्रेस नेतृत्व ने संगठनात्मक छवि और जनसमर्थन को ज्यादा अहमियत दी। माना जा रहा है कि पार्टी हाईकमान को लगा कि वीडी सतीशन राज्य में कांग्रेस के लिए ज्यादा प्रभावी चेहरा साबित हो सकते हैं।
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि कांग्रेस ने भविष्य की राजनीति को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है। पार्टी अब केरल में लंबे समय तक मजबूत नेतृत्व तैयार करना चाहती है।
राहुल गांधी और खड़गे ने की अहम बैठक
मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला लेने से पहले कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ कई दौर की चर्चा की। बैठक में राहुल गांधी, दीपा दासमुंशी, अजय माकन और मुकुल वासनिक भी शामिल रहे। इन नेताओं ने हाल ही में सभी नवनिर्वाचित विधायकों से बातचीत की थी और उनकी राय जानी थी।
जानकारी के मुताबिक, राहुल गांधी ने बुधवार शाम खड़गे के साथ करीब 30 मिनट तक बैठक की। इसके बाद गुरुवार सुबह उन्होंने केसी वेणुगोपाल से भी मुलाकात की। माना जा रहा है कि इस दौरान वेणुगोपाल को संगठन हित में पीछे हटने के लिए मनाया गया।
छठी बार विधायक बने हैं वीडी सतीशन
वीडी सतीशन परावुर विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर आए हैं। वह लगातार छठी बार विधायक बने हैं। 2026 के चुनाव में उन्होंने करीब 20,600 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल की। कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की शानदार जीत का बड़ा श्रेय भी उन्हें दिया जा रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने राज्यभर में व्यापक दौरे किए और अलग-अलग समुदायों तथा सामाजिक संगठनों को साथ जोड़ने की रणनीति अपनाई। उनकी छवि एक आक्रामक लेकिन संतुलित नेता की मानी जाती है। विधानसभा के अंदर और बाहर दोनों जगह उन्होंने सरकार के खिलाफ कई मुद्दों पर मजबूत आवाज उठाई है।
पिनाराई विजयन सरकार पर साधा निशाना
चुनाव प्रचार के दौरान वीडी सतीशन ने तत्कालीन मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan और वामपंथी सरकार को लगातार निशाने पर रखा। उन्होंने भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक संकट जैसे मुद्दों को लेकर सरकार पर हमला बोला। कांग्रेस ने इन्हीं मुद्दों के आधार पर जनता के बीच मजबूत अभियान चलाया।
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि कांग्रेस की रणनीति इस बार जनता को प्रभावित करने में सफल रही और इसका फायदा चुनाव नतीजों में साफ दिखाई दिया।

केरल में कांग्रेस गठबंधन को बड़ी जीत
केरल विधानसभा की 140 सीटों में से कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ गठबंधन ने 102 सीटों पर जीत हासिल की है। यह दो-तिहाई बहुमत से भी ज्यादा है। कांग्रेस के पास अकेले 63 विधायक हैं। इसके अलावा इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के पास 22 सीटें, केरल कांग्रेस के पास 8 और आरएसपी के पास 3 विधायक हैं। इतनी बड़ी जीत के बाद कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर एकमत होना था। अब वीडी सतीशन के नाम के ऐलान के साथ यह विवाद खत्म हो गया है।
कांग्रेस के लिए क्या मायने रखता है यह फैसला?
वीडी सतीशन को मुख्यमंत्री बनाकर कांग्रेस ने साफ संकेत दिया है कि पार्टी अब युवा और आक्रामक नेतृत्व पर भरोसा जता रही है।राजनीतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह फैसला सिर्फ केरल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है। कांग्रेस आने वाले समय में राज्यों में नए चेहरों को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर सकती है। अब सभी की नजरें सतीशन के शपथ ग्रहण और नई सरकार के गठन पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही मंत्रिमंडल का भी ऐलान किया जाएगा।
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