Mamata Banerjee Protest: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद राज्य की राजनीति में लगातार उथल-पुथल मची हुई है। जिसके वजह से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ती नाराजगी, नेताओं पर हमलों और पार्टी के अंदर चल रही खींचतान के बीच पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है। बताया जा रहा है की आज मंगलवार को कोलकाता में आयोजित धरना कार्यक्रम में बड़ी संख्या में TMC कार्यकर्ता पहुंचे, जिससे राजनीतिक माहौल और गरमा गया है।
मिली जानकारी के अनुसार, दोपहर करीब 2:43 बजे ममता बनर्जी धरना स्थल पर पहुंचीं। जिससे उनके पहुंचते ही कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। कोलकाता के वाई चैनल इलाके में हजारों समर्थक एकत्रित हुए, जहां ममता बनर्जी ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करने की तैयारी की है। ऐसे में आइए जानते हैं यहां पूरी खबर
TMC नेताओं पर हमलों को लेकर सड़क पर उतरीं ममता
दरअसल ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि चुनाव के बाद राज्य में TMC नेताओं और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है। जिसमें उनका दावा है कि हजारों कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है और पार्टी के कई कार्यालयों को नुकसान पहुंचाया गया है।
ऐसे में ममता का कहना है कि चुनाव परिणामों के बाद लगभग 2500 पार्टी कार्यालयों को तोड़ा गया और 10 हजार से ज्यादा कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है। साथ ही, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई जनप्रतिनिधियों और नेताओं को धमकियां दी जा रही हैं। इसी के विरोध में उन्होंने धरना और आंदोलन का रास्ता चुना है।
धरने से पहले हुई अहम बैठक
बता दें की धरना शुरू होने से पहले ममता बनर्जी ने अपने आवास पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में कुणाल घोष, डोला सेन, मदन मित्रा, प्रतिमा मंडल, सुभाषिश चक्रवर्ती और कल्याण बनर्जी सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। हालांकि बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई, लेकिन माना जा रहा है कि पार्टी के भीतर चल रही राजनीतिक चुनौतियों और आगामी रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया।
फिरहाद हकीम के विधानसभा पहुंचने से बढ़ी चर्चा
धरने और राजनीतिक हलचल के बीच राज्य के वरिष्ठ मंत्री फिरहाद हकीम का विधानसभा पहुंचना भी चर्चा का विषय बन गया। बताया जा रहा है की जब पार्टी के कई नेता धरना स्थल और ममता बनर्जी के आवास पर मौजूद थे, उस समय उनका विधानसभा जाना राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलों को जन्म दे गया।
ऐसे में एक्सपर्ट्स का मानना है कि TMC के भीतर चल रही परिस्थितियों के बीच हर राजनीतिक गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।
रानी रासमणि रोड पर नहीं मिली अनुमति
ममता बनर्जी ने पहले रानी रासमणि रोड पर धरना देने के लिए प्रशासन से अनुमति मांगी थी, लेकिन पुलिस और प्रशासन की ओर से अनुमति नहीं दी गई। इसके बावजूद TMC ने विरोध प्रदर्शन जारी रखने का निर्णय लिया। जिसके बाद पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं से अपील की कि यदि किसी स्थान पर प्रशासन रोक लगाए तो वे धर्मतला स्थित वाई चैनल इलाके में पहुंचकर पार्टी के निर्देशों का इंतजार करें।
कोलकाता से दिल्ली तक आंदोलन की तैयारी
ममता बनर्जी ने संकेत दिए हैं कि यदि बंगाल में उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की गई तो आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर तक ले जाया जाएगा। उन्होंने कोलकाता से लेकर दिल्ली तक विरोध प्रदर्शन करने की बात कही है।
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह रणनीति TMC को एक बार फिर संघर्षशील राजनीतिक दल के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश हो सकती है।
भाजपा का पलटवार
धरने को लेकर भाजपा ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा नेता दिलीप घोष ने आरोप लगाया कि TMC के भीतर बढ़ते असंतोष और नेताओं के बीच मतभेदों से ध्यान हटाने के लिए यह प्रदर्शन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता अब TMC से नाराज है और लोग खुलकर विरोध कर रहे हैं। दिलीप घोष ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब हो चुकी है और कई मामलों में विपक्ष को अदालत का सहारा लेना पड़ा है।
भाजपा नेता ने यह भी कहा कि चुनाव के बाद विभिन्न दलों से आए नेताओं की पहचान की जा रही है और पार्टी संगठन को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
नामखाना का वीडियो बना चर्चा का विषय
धरने के बीच दक्षिण 24 परगना जिले के नामखाना से जुड़ा एक वीडियो भी राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। जिससे सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक स्थानीय TMC नेता पर ग्रामीणों को पैसे लौटाने का आरोप लगाया गया है।
भाजपा नेताओं का दावा है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों से कथित रूप से पैसे लिए गए थे और विवाद बढ़ने के बाद राशि वापस की जा रही है। हालांकि इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है।
बैरकपुर में TMC कार्यालय पर बुलडोजर कार्रवाई
राज्य में राजनीतिक तनाव के बीच बैरकपुर कैंटोनमेंट क्षेत्र में स्थित भारतीय राष्ट्रीय तृणमूल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTTUC) के एक कार्यालय को प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया।
अधिकारियों का कहना है कि यह निर्माण अवैध रूप से किया गया था और सेना के अधिकार क्षेत्र वाली जमीन पर संचालित हो रहा था। कार्रवाई के दौरान पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में भवन को हटाया गया। भाजपा नेताओं ने इस कार्रवाई का समर्थन करते हुए इसे नियमों के तहत की गई कार्रवाई बताया, जबकि TMC की ओर से इस मामले पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई।
अभिषेक बनर्जी के परिवार की हाईकोर्ट में याचिका
दरअसल इसी बीच TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के माता-पिता और उनकी कंपनी ने कोलकाता नगर निगम के नोटिस को चुनौती देते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नगर निगम को आवश्यक दस्तावेज पहले ही उपलब्ध कराए जा चुके हैं, इसके बावजूद नोटिस वापस नहीं लिया गया। मामले की सुनवाई जल्द होने की संभावना है।
बंगाल की राजनीति में बढ़ा सियासी तापमान
पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद की राजनीतिक परिस्थितियां लगातार नई दिशा ले रही हैं। एक ओर TMC अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हमलों का आरोप लगाकर सड़क पर उतर आई है, तो दूसरी ओर भाजपा इन आरोपों को राजनीतिक रणनीति बता रही है।
ममता बनर्जी का यह धरना केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं बल्कि आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि यह आंदोलन आगे कितना बड़ा रूप लेता है और इसका राज्य की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।




