Indian LPG Tankers: भारत में एलपीजी (LPG) गैस सप्लाई को लेकर एक बड़ी राहत भरी आई है। जिसमें पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध के कारण जहां तेल और गैस सप्लाई पर खतरा बना हुआ था, वहीं अब भारत के दो बड़े एलपीजी टैंकर सुरक्षित रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार कर चुके हैं। साथ ही,इन जहाजों में इतनी गैस है, जिससे देश के करोड़ों लोगों की रसोई तक पहुंचने वाले लाखों सिलिंडर भरे जा सकते हैं।
जानकारी के लिए बता दें कि सरकार और आम जनता दोनों के लिए यह खबर बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि इससे गैस की सप्लाई पर पड़े दबाव में कमी आएगी और कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।
दो बड़े टैंकर लेकर आ रहे हैं LPG
जानकारी के अनुसार, भारत के झंडे वाले दो बड़े एलपीजी टैंकर ‘पाइन गैस’ और ‘जग वसंत’ सुरक्षित रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार कर चुके हैं। यह वही समुद्री मार्ग है, जो दुनिया के सबसे अहम तेल और गैस सप्लाई रूट्स में गिना जाता है। जिसमें दोनों जहाज फारस की खाड़ी से रवाना होकर एक साथ आगे बढ़े और सोमवार सुबह इस संवेदनशील जलमार्ग को पार करने में सफल रहे। इस दौरान सुरक्षा को लेकर खास इंतजाम किए गए थे, क्योंकि इस क्षेत्र में हाल ही में सैन्य तनाव बढ़ा हुआ था।
कितनी गैस ला रहे हैं ये जहाज?
सरकारी जानकारी के मुताबिक, इन दोनों टैंकरों में कुल 92,612 टन एलपीजी लोड है। यह मात्रा भारत की लगभग एक दिन की कुल खपत के बराबर बताई जा रही है।अब अगर इसे घरेलू उपयोग के हिसाब से समझें, तो इस गैस से करीब 65.21 लाख एलपीजी सिलिंडर भरे जा सकते हैं। यानी यह खेप सीधे तौर पर लाखों परिवारों की रसोई को राहत देने वाली है।
कब तक भारत पहुंचेंगे टैंकर?
पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार, ये दोनों जहाज 26 मार्च से 28 मार्च के बीच भारत के कई बंदरगाहों पर पहुंच सकते हैं। वहीं,इन जहाजों पर कुल मिलाकर 60 से ज्यादा भारतीय नाविक सवार हैं, जो इस चुनौतीपूर्ण यात्रा के दौरान लगातार सतर्क रहे। जहाजों के सुरक्षित पहुंचने के बाद गैस को अलग-अलग राज्यों में सप्लाई किया जाएगा।
युद्ध के कारण बढ़ा था खतरा
दरअसल,पश्चिम एशिया में हाल ही में बढ़े तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर खतरा मंडरा रहा था। जिसमें ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ती टकराव की स्थिति ने इस समुद्री रास्ते को असुरक्षित बना दिया था। यही कारण था कि कई देशों के जहाज इस मार्ग में फंस गए थे। भारत के भी कई जहाज इसी क्षेत्र में रुक गए थे, जिससे ऊर्जा सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई थी।
कितने भारतीय जहाज फंसे थे?
जानकारी के अनुसार, इस संकट के समय स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारत के झंडे वाले कुल 28 जहाज मौजूद थे। इनमें से 24 जहाज पश्चिमी हिस्से में और 4 जहाज पूर्वी हिस्से में फंसे थे। वहीं,पिछले कुछ दिनों में धीरे-धीरे स्थिति सुधरी है और अब दोनों ओर से जहाजों को सुरक्षित निकालने का काम जारी है। ‘पाइन गैस’ और ‘जग वसंत’ इसी प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे व्यस्त और रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक है। दरअसल यह जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित है और खाड़ी देशों को दुनिया के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल और गैस इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव सीधे तौर पर वैश्विक ऊर्जा सप्लाई और कीमतों को प्रभावित करता है।

भारत के लिए क्यों राहत भरी खबर?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। जिसमें एलपीजी भी इसका एक अहम हिस्सा है, जो घरेलू रसोई गैस के रूप में करोड़ों घरों में इस्तेमाल होती है। इन दो टैंकरों के सुरक्षित पहुंचने से।
- गैस की सप्लाई में स्थिरता आएगी।
- संभावित कमी का खतरा टलेगा।
- कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
- वितरण प्रणाली को मजबूती मिलेगी।
क्या गैस की कीमतों पर पड़ेगा असर?
बता दें कि कीमतों में बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं है, लेकिन सप्लाई बेहतर होने से बाजार में स्थिरता जरूर आएगी। अब अगर आगे भी इसी तरह सुरक्षित सप्लाई जारी रहती है, तो आने वाले समय में एलपीजी की कीमतों पर सकारात्मक असर देखा जा सकता है।
सरकार की नजर स्थिति पर
भारत सरकार और संबंधित मंत्रालय लगातार इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। जिसमें समुद्री सुरक्षा, जहाजों की निगरानी और ऊर्जा सप्लाई को बनाए रखने के लिए खास रणनीति अपनाई जा रही है। साथ ही,सरकार का फोकस इस बात पर है कि किसी भी स्थिति में देश में गैस की कमी न हो और आम जनता को परेशानी का सामना न करना पड़े।



