Mission 360: संसद के मानसून सत्र से पहले केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने अपनी राजनीतिक तैयारियां तेज कर दी हैं। सरकार की नजर उन अहम विधेयकों पर है, जिनके लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी। बता दें कि महिला आरक्षण और लोकसभा सीटों के परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों को लेकर सरकार ने एक बार फिर से रणनीति बना रही है। इसी कड़ी में 19 जुलाई को सभी राजनीतिक दलों की सर्वदलीय बैठक बुलाई गई है, जबकि 20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू होगा।
आपकी जानकारी के लिए बता दें सरकार का लक्ष्य संसद में लगभग 360 सांसदों का समर्थन जुटाना है। इसी वजह से भाजपा के भीतर इसे ‘मिशन-360’ के नाम से देखा जा रहा है।
क्यों अहम है मिशन-360?
संविधान संशोधन से जुड़े किसी भी विधेयक को पारित कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। जिसमें लोकसभा की कुल 543 सीटों में फिलहाल तीन सीटें रिक्त हैं। ऐसे में प्रभावी संख्या के आधार पर लगभग 360 सांसदों का समर्थन आवश्यक माना जा रहा है।
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इसी आंकड़े तक पहुंचने की है। वर्तमान में NDA के पास अपने सहयोगी दलों के साथ करीब 293 सांसदों का समर्थन माना जा रहा है। इसलिए सरकार अन्य दलों और निर्दलीय सांसदों का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रही है।
19 जुलाई को होगी सर्वदलीय बैठक
मानसून सत्र से पहले केंद्र सरकार ने 19 जुलाई को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। बता दें इस बैठक में सरकार विपक्ष और अन्य राजनीतिक दलों को सत्र के एजेंडे की जानकारी देगी। साथ ही संसद में पेश किए जाने वाले संभावित विधेयकों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
संसदीय परंपरा के मुताबिक हर सत्र से पहले होने वाली यह बैठक सरकार और विपक्ष के बीच संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम मानी जाती है। हालांकि इस बार बैठक का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि सरकार महत्वपूर्ण विधेयकों पर व्यापक समर्थन जुटाना चाहती है।
BJP में लगातार हो रही रणनीतिक बैठकें
मानसून सत्र से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेतृत्व लगातार बैठकों में व्यस्त है। हाल के दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर कई अहम बैठकें हुईं, जिनमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन और संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
जानकारी के अनुसार इन बैठकों में संसद की रणनीति, विपक्ष के रुख, संगठनात्मक बदलाव और आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों पर विस्तार से चर्चा हुई। साथ ही भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम को लेकर भी मंथन जारी है।
राजनीतिक समीकरण बदलने से बढ़ी उम्मीद
दरअसल पिछले कुछ महीनों में कई राजनीतिक दलों के भीतर हुए बदलावों ने राष्ट्रीय राजनीति का समीकरण बदल दिया है। जिसमें कुछ क्षेत्रीय दलों के रुख में बदलाव की चर्चाओं के बाद भाजपा को उम्मीद है कि संसद में उसे अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है।
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि कुछ ऐसे दल, जो पहले सरकार के विरोध में थे, अब कुछ मुद्दों पर अलग रुख अपना सकते हैं। यही वजह है कि भाजपा सभी संभावित सहयोगियों के साथ लगातार संवाद बनाए हुए है।
सरकार का संख्या बल कैसे बढ़ सकता है?
मौजूदा समय में NDA के पास लगभग 293 सांसदों का समर्थन माना जा रहा है। ऐसे में अगर कुछ क्षेत्रीय दल सरकार के पक्ष में आते हैं तो यह संख्या लगातार बढ़ सकती है।
राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार यदि कुछ बड़े क्षेत्रीय दलों का समर्थन मिलता है तो सरकार का आंकड़ा 335 के करीब पहुंच सकता है। इसके अलावा समय-समय पर समर्थन देने वाले अन्य दलों और निर्दलीय सांसदों को जोड़ने पर यह संख्या लगभग 340 तक पहुंच सकती है।
महाराष्ट्र की राजनीति में हुए हालिया बदलावों के बाद कुछ और सांसदों के समर्थन की संभावना जताई जा रही है। यदि ये समर्थन भी सरकार को मिलता है तो संख्या 346 के आसपास पहुंच सकती है। वहीं कुछ अन्य दलों के समर्थन की स्थिति में यह आंकड़ा 354 तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। इसके बाद भी सरकार को दो-तिहाई बहुमत के लिए लगभग छह सांसदों के अतिरिक्त समर्थन की जरूरत रहेगी।
अमित शाह की बैठकों पर सबकी नजर
गृह मंत्री अमित शाह पिछले कुछ दिनों में कई अहम नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात की। इसके अलावा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनके सहयोगी नेताओं के साथ भी अलग-अलग बैठकें हुई हैं।
इन बैठकों को केवल संगठनात्मक नहीं बल्कि संसद की रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि सरकार मानसून सत्र से पहले राजनीतिक समर्थन मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।

विपक्ष भी बना रहा अपनी रणनीति
दरअसल विपक्ष भी सरकार को आसान जीत नहीं देना चाहता। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल लगातार बैठकें कर रहे हैं और संसद में साझा रणनीति बनाने की कोशिश कर रहे हैं। जिनमें कुछ विपक्षी नेताओं ने संकेत दिए हैं कि यदि सरकार कुछ शर्तें मानती है तो वे कुछ विधेयकों पर समर्थन देने पर विचार कर सकते हैं। हालांकि अभी तक किसी भी दल ने आधिकारिक रूप से अपना अंतिम रुख स्पष्ट नहीं किया है।
महिला आरक्षण और परिसीमन पर फिर बढ़ी चर्चा
महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे मुद्दे लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में रहे हैं। यदि सरकार इनसे जुड़े विधेयकों को संसद में लाती है तो व्यापक राजनीतिक सहमति बनाना उसके लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी। इसी कारण सरकार केवल अपने सहयोगी दलों पर निर्भर नहीं रहना चाहती, बल्कि अन्य राजनीतिक दलों के साथ भी संवाद बनाए हुए है ताकि संसद में आवश्यक समर्थन मिल सके।
21 जुलाई को होगी एनडीए संसदीय दल की बैठक
मानसून सत्र शुरू होने के अगले दिन यानी 21 जुलाई को एनडीए संसदीय दल की बैठक भी प्रस्तावित है। इस बैठक को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संबोधित करेंगे। माना जा रहा है कि सांसदों को संसद की रणनीति, सरकार की प्राथमिकताओं और आगामी विधेयकों को लेकर दिशा-निर्देश दिए जाएंगे।
क्या रहेगा मानसून सत्र का सबसे बड़ा मुद्दा?
इस बार संसद का मानसून सत्र कई कारणों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक तरफ सरकार बड़े विधेयकों को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है, वहीं विपक्ष सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है। बदलते राजनीतिक समीकरण, क्षेत्रीय दलों की भूमिका और दो-तिहाई बहुमत का गणित इस पूरे सत्र को बेहद दिलचस्प बना सकता है।
अब सभी की नजर 19 जुलाई की सर्वदलीय बैठक और उसके बाद शुरू होने वाले संसद सत्र पर रहेगी। इसी दौरान यह साफ होगा कि सरकार अपने मिशन-360 के लक्ष्य तक पहुंचने में कितनी सफल होती है और महत्वपूर्ण विधेयकों पर उसे कितना राजनीतिक समर्थन मिल पाता है।
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