Modi Govt Order: देश में पेट्रोल-डीजल और सीएनजी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के बीच केंद्र सरकार ने सरकारी बैंकों, बीमा कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के लिए बड़ा खर्च कटौती अभियान शुरू किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद वित्त मंत्रालय ने सरकारी संस्थानों को कई नए आदेश जारी किए हैं। इन निर्देशों का उद्देश्य खर्च कम करना, विदेशी मुद्रा बचाना और ईंधन की खपत घटाना है।
जानकारी के अनुसार, वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने आज सोमवार को यह आदेश जारी किया है। जिससे यह आदेश भारतीय स्टेट बैंक (SBI), बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB), भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) समेत कई सरकारी वित्तीय संस्थानों पर लागू होगा।
सरकार ने क्या-क्या निर्देश दिए?
बता दें की सरकार ने सरकारी संस्थानों को अनावश्यक खर्च कम करने के लिए कई कदम उठाने को कहा है। इनमें मुख्य रूप से विदेश यात्राओं में कटौती, ऑनलाइन बैठकों को बढ़ावा और इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल शामिल है।
विदेश यात्राओं पर नियंत्रण
सरकारी आदेश में कहा गया है कि चेयरमैन, मैनेजिंग डायरेक्टर (MD), CEO और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की विदेश यात्राओं को सीमित किया जाए। जहां तक संभव हो, विदेशी कार्यक्रमों में ऑनलाइन या वर्चुअल माध्यम से शामिल होने को प्राथमिकता दी जाए। सरकार का मानना है कि इससे विदेशी मुद्रा खर्च कम होगा और संस्थानों की लागत में कमी आएगी।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को बढ़ावा
आदेश में यह भी कहा गया है कि सभी मीटिंग, प्रोजेक्ट समीक्षा और अन्य प्रशासनिक चर्चाएं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की जाएं। केवल जरूरी परिस्थितियों में ही अधिकारियों की शारीरिक उपस्थिति अनिवार्य मानी जाएगी। कोरोना महामारी के दौरान जिस तरह वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन मीटिंग्स का इस्तेमाल बढ़ा था, उसी मॉडल को फिर से लागू करने की कोशिश की जा रही है।
ऐसे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे यात्रा खर्च, होटल खर्च और ईंधन की खपत में बड़ी कमी आ सकती है।
पेट्रोल-डीजल वाहनों की जगह EV अपनाने पर जोर
वित्त मंत्रालय ने सरकारी संस्थानों से पेट्रोल और डीजल वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को अपनाने की अपील भी की है। निर्देश में कहा गया है कि संस्थान अपने मुख्यालय और शाखाओं में किराए पर लगाए गए वाहनों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने का लक्ष्य तय करें। सरकार का मानना है कि इससे तेल पर निर्भरता कम होगी और लंबे समय में खर्च भी घटेगा।

पीएम मोदी ने पहले ही की थी अपील
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों और सरकारी अधिकारियों से ईंधन बचाने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत की अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव डाल रही हैं। पीएम मोदी ने कहा था कि कोरोना काल की तरह एक बार फिर लोगों को ऑनलाइन मीटिंग्स, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और वर्क फ्रॉम होम को अपनाना चाहिए। उन्होंने इसे “राष्ट्रीय हित” में उठाया गया कदम बताया था।
होर्मुज स्ट्रेट बना चिंता का कारण
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने बयान में होर्मुज स्ट्रेट का भी जिक्र किया था। यह समुद्री मार्ग दुनिया में तेल और गैस सप्लाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने के कारण इस क्षेत्र में सप्लाई प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा तेल आयात के जरिए पूरा करता है, इसलिए वैश्विक संकट का सीधा असर भारत पर पड़ सकता है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि यदि तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं तो भारत का आयात बिल और विदेशी मुद्रा भंडार दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
जनता से भी की गई खास अपील
प्रधानमंत्री मोदी ने आम लोगों से भी कई अहम अपीलें की थीं। उन्होंने कहा था कि जिन शहरों में मेट्रो सुविधा उपलब्ध है, वहां लोग निजी वाहनों की जगह सार्वजनिक परिवहन का ज्यादा इस्तेमाल करें। इसके अलावा उन्होंने मिडिल क्लास परिवारों से अगले एक वर्ष तक विदेश यात्रा टालने की अपील की। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि लोग एक साल तक सोना खरीदने से बचें और ज्यादा से ज्यादा “मेड इन इंडिया” उत्पाद खरीदें। सरकार का मानना है कि इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और घरेलू उद्योग को भी मजबूती मिलेगी।
क्या फिर लौटेगा ‘लॉकडाउन मॉडल’?
जानकारी के लिए बता दें की सरकार ने किसी तरह के लॉकडाउन का ऐलान नहीं किया है, लेकिन जो कदम उठाए जा रहे हैं, वे काफी हद तक कोरोना महामारी के दौरान अपनाए गए मॉडल जैसे दिखाई दे रहे हैं। वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन मीटिंग्स, यात्रा में कटौती और खर्च कम करने जैसे उपाय फिर से चर्चा में आ गए हैं। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर लोग इसे “लॉकडाउन जैसा आदेश” कह रहे हैं। हालांकि सरकार का कहना है कि यह कदम केवल आर्थिक और ऊर्जा बचत के उद्देश्य से उठाए जा रहे हैं।
अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यदि सरकारी संस्थान बड़े स्तर पर खर्च कटौती करते हैं तो इससे सरकार पर वित्तीय दबाव कम हो सकता है। साथ ही ईंधन की खपत कम होने से आयात बिल पर भी असर पड़ेगा। हालांकि कुछ विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यात्रा और अन्य खर्च कम होने से होटल, एविएशन और ट्रैवल सेक्टर पर असर पड़ सकता है। फिलहाल सरकार का पूरा फोकस ऊर्जा बचत, विदेशी मुद्रा संरक्षण और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने पर दिखाई दे रहा है।
ये भी पढ़ें: No Namaz on Roads: सड़क पर नमाज पढ़ने पर सीएम योगी सख्त, बोले- ‘प्यार से समझाएंगे, नहीं माने तो दूसरा तरीका अपनाएंगे’



