राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने संघ के 100 वर्ष पूरे होने पर कहा कि हर परिवार में कम से कम तीन बच्चे होने चाहिए। देश की जनसंख्या को संतुलित रखने के लिए हमें अब अहम कदम उठाने चाहिए। उन्होंने बताया कि हर एक परिवार में अब कम से कम 3 बच्चे होने चाहिए। मोहन भागवत का कहना है भारत को जनसंख्या नीति 2.1 बच्चों की बात करती है, जिसमें की 3 बच्चों को होना। इससे परिवार 3 बच्चे होते हैं, तो माता पिता और बच्चों का स्वास्थ, जीवन ठीक रहता है।
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संघ के 100 वर्ष पूरे
भागवत ने संघ के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जनसंख्या की नीति का पालन करना बहुत जरूरी है। यह भी कहा ज्यादा बच्चे पैदा करना जरूरी नहीं है, लेकिन कम से कम हर परिवार में तीन बच्चे आवश्य होने चाहिए।
संस्कृत शिक्षा पर मोहन भागवत ने कहा कि भारत की सही पहचान और भारत परंपरा को समझने के लिए संस्कृत का ज्ञान होना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि इसको अनिवार्य बनने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन लोगों में उत्सुकता जगाई जानी चाहिए।
भागवत के अनुसार बच्चों के लिए, नई शिक्षा नीति पंचकोशीय शिक्षा का विचार भी शामिल किया गया है। जैसे में कला के साथ साथ खेल, योग भी जोड़े गए हैं। उनका मनना है कि हर व्यक्ति को कला और संगीत का ज्ञान होना बहुत जरूरी है क्योंकि यह मन और समाज दोनों को जोड़ता है।

देश का इतिहास और राजनीति
देश के इतिहास और राजनीति पर बात करते हुए कहा कि अखंड भारत कोई राजनीतिक का नारा नहीं है बल्कि यह जीवन की सच्चाई है, उन्होंने यह भी कहा संघ ने विभाज को रोकने की बहुत कोशिश की थी, लेकिन यह संभव नहीं हुआ।
शहरों और रास्तों के नहीं होने चाहिए नाम
शहरों के नाम बदलने की राजनीति पर उन्होंने कहा कि आक्रमणकारियों के नाम पर शहरों या रास्तों के नाम नहीं होने चाहिए। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि मुस्लिम नामों पर कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि वीर अब्दुल हमीद और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम जैसे महान व्यक्तित्वों के नाम पर शहर या स्थान हो सकते हैं।
आरक्षण पर दी राय
आरक्षण पर भी उन्होंने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि इसे संवेदना से देखना चाहिए। संघ का मानना है कि संविधान सम्मत आरक्षण का समर्थन होना चाहिए, ताकि समाज में जो नीचे है उसे ऊपर लाने का अवसर मिले।
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