सीएम का ऐलान – वनवासियों के विकास
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि
अब ग्राम सभाएं खुद तय करेंगी कि उनके गांव में कौन काम करेगा और कौन नहीं।
यानी, पेसा एक्ट के तहत जो अधिकारी (मोबालाईजर्स) गांव में काम करते हैं,
उनकी नियुक्ति और हटाने का अधिकार भी अब ग्राम सभा को होगा।
उन्होंने कहा कि यह कदम स्थानीय लोगों की भागीदारी को मजबूत करेगा।
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‘बालाघाट मॉडल’ की होगी MP भर में नकल
मुख्यमंत्री ने बालाघाट जिले की तारीफ करते हुए कहा कि
वहां जिस तरह 450 से ज्यादा वनाधिकार दावों को तेजी से निपटाया गया
वही मॉडल अब अन्य आदिवासी क्षेत्रों में भी लागू किया जाएगा।
दूध, जड़ी-बूटी और मोटे अनाज से मजबूत होगी आजीविका
डॉ. यादव ने कहा कि आदिवासी परिवारों की कमाई बढ़ाने के लिए सरकार उन्हें:
- दूध देने वाले पशु
- लघु वनोपज (जैसे तेंदू पत्ता, महुआ)
- औषधीय पौधे
- और मोटे अनाज (श्रीअन्न) की खेती का पूरा सपोर्ट देगी।
साथ ही उन्हें ट्रेनिंग और बाजार से जोड़ने की सुविधा भी दी जाएगी।

लाखों वनाधिकार दावे अभी भी पेंडिंग – 31 दिसंबर तक निपटारे का टारगेट
सरकार की रिपोर्ट के मुताबिक 2.73 लाख वनाधिकार दावे अभी लंबित हैं।
सीएम ने आदेश दिया है कि 31 दिसंबर 2025 तक
सभी दावों को निपटाया जाए, ताकि किसी को उसका हक पाने में देर न हो।

हर गांव के लिए बनेगा विकास प्लान
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन क्षेत्रों के हर गांव का विकास किया जाएगा,
इसके लिए सभी विभागों को एक्शन प्लान
बनाकर काम शुरू करने को कहा गया है।
इसके साथ, ग्राम सभा, वन विभाग और निवेशकों को मिलकर
पारदर्शी और टिकाऊ विकास करने का सुझाव दिया ग
तकनीकी दिक्कत आई तो बनेगा नया पोर्टल
अगर दावों के निपटारे में तकनीकी दिक्कतें आती हैं
तो सरकार नया पोर्टल भी शुरू कर सकती है।
साथ ही, वन अधिकारियों की ट्रेनिंग
15 अगस्त तक पूरी करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
CM ने कहा – सरकार हर पल वनवासियों के साथ है
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने साफ कहा –
“हमारी सरकार वनवासियों की खुशहाली के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी।
ग्राम सभाएं अब और मजबूत होंगी और अपने गांव का फैसला खुद करेंगी।
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