MP Police Constable Salary Scam ने मध्य प्रदेश पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। विदिशा जिले में एक कांस्टेबल 12 साल तक ड्यूटी पर नहीं आया, फिर भी उसने करीब 28 लाख रुपये की सैलरी ले ली। अब मामले की जांच शुरू हो चुकी है।
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ट्रेनिंग के बाद घर चला गया
इस कांस्टेबल की ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उसे सागर भेजा गया था।
हालांकि, उसने वहां ड्यूटी जॉइन नहीं की।
इसके बजाय, वो सीधा अपने घर चला गया।
सर्विस बुक भेज दी, अफसरों ने नहीं देखा
उसने चालाकी दिखाते हुए अपनी सर्विस बुक स्पीड पोस्ट से पुलिस लाइन भेज दी।
वहीं, पुलिस लाइन में उसकी बुक रख तो ली गई
लेकिन किसी ने यह नहीं देखा कि वह ड्यूटी पर आ भी रहा है या नहीं।
144 महीने तक कोई नहीं पूछ पाया
सोचिए, पूरे 12 साल यानी 144 महीने तक किसी भी अधिकारी ने उसकी गैरहाजिरी पर ध्यान नहीं दिया।

डीजीपी के आदेश के बाद हुआ खुलासा
कुछ समय पहले डीजीपी ने सभी पुलिसकर्मियों के रिकॉर्ड को डिजिटल करने का आदेश दिया।
विभाग ने लंबे समय से एक ही जगह तैनात कर्मियों के तबादले की प्रक्रिया शुरू की।
तब, इस कांस्टेबल की फर्जी हाजिरी की पोल खुल गई।
अब हुई कार्रवाई
अब इस कांस्टेबल को भोपाल पुलिस लाइन में भेज दिया गया है।
विभाग ने 1.5 लाख रुपये की वसूली भी की है।
वहीं, पूरे मामले की जांच एसीपी अंकिता खतारकर को सौंपी गई है।
डीसीपी श्रद्धा तिवारी ने कहा कि लापरवाह अफसरों पर भी सख्त कार्रवाई होगी।
सवाल उठते हैं
अब बड़ा सवाल ये है –
- क्या यह सिर्फ लापरवाही थी?
- या फिर इस गलती को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया?
जवाब तो जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मिलेगा।
लेकिन यह साफ है कि इस मामले ने
पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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