Parliament Session: संसद के बजट सत्र के दौरान सोमवार को लोकसभा और राज्यसभा में जोरदार हंगामा देखने को मिला.लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी को बोलने देने की मांग को लेकर कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के सांसदों ने सदन में नारेबाजी शुरू कर दी. माहौल इतना गर्म हो गया कि लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने के महज पांच मिनट बाद ही दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी.
वहीं राज्यसभा में भी विपक्षी सांसदों ने यह आरोप लगाते हुए वॉकआउट कर दिया कि उन्हें अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया जा रहा है.दोनों सदनों में एक साथ हुए हंगामे ने साफ कर दिया कि आने वाले दिनों में संसद की कार्यवाही भी अशांत रह सकती है.
“राहुल गांधी को बोलने दो” की मांग पर अड़ा विपक्ष
लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने नारे लगाना शुरू कर दिया.विपक्ष की मांग थी कि राहुल गांधी को सदन में बोलने दिया जाए, तभी वे कार्यवाही चलने देंगे.सांसद वेल में आ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे.
विपक्षी नेताओं का आरोप है कि सरकार बार-बार उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रही है और सदन में उन्हें बोलने का पूरा मौका नहीं दिया जा रहा.उनका कहना है कि राहुल गांधी जैसे नेता विपक्ष को अपनी बात रखने से रोका जाना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है.
स्पीकर ओम बिरला का सख्त रुख: “सदन नियमों से चलेगा”
इस हंगामे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्ष को शांत करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने साफ कहा कि सदन की कार्यवाही नियमों के तहत ही चलेगी.स्पीकर ने कहा कि पहले प्रश्नकाल पूरा होने दिया जाए, उसके बाद नियम-कानून के मुताबिक चर्चा कराई जाएगी.
ओम बिरला ने यह भी कहा कि सदन आपसी सहमति और मर्यादा से चलता है. अगर हर सदस्य नियम तोड़कर अपनी बात रखने की जिद करेगा, तो संसद का कामकाज ठप हो जाएगा.हालांकि विपक्ष इस पर राजी नहीं हुआ और नारेबाजी जारी रखी.
पांच मिनट में स्थगित हुई लोकसभा की कार्यवाही
विपक्षी सांसदों के हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही सोमवार को शुरू होने के पांच मिनट बाद ही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी.सदन में लगातार नारेबाजी और वेल में आने से स्थिति संभालना मुश्किल हो गया.
कई सांसदों ने मेज थपथपाकर विरोध जताया, तो कुछ ने पोस्टर भी लहराए.स्पीकर बार-बार व्यवस्था बनाए रखने की अपील करते रहे, लेकिन जब हंगामा नहीं थमा, तो कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी.
राज्यसभा में वॉकआउट, विपक्ष का आरोप
लोकसभा के साथ-साथ राज्यसभा में भी माहौल गर्म रहा. विपक्षी सांसदों ने आरोप लगाया कि उन्हें अपनी बात रखने नहीं दी जा रही है. इसी विरोध में राज्यसभा के सांसद सदन से बाहर चले गए.
विपक्ष का कहना है कि संसद सिर्फ सरकार की बात रखने का मंच नहीं है, बल्कि यहां विपक्ष की आवाज भी उतनी ही जरूरी है. उनका आरोप है कि नियमों का सहारा लेकर विपक्ष को बोलने से रोका जा रहा है.
स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तैयारी?
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सूत्रों के हवाले से खबर आई है कि विपक्ष लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है. अगर ऐसा होता है, तो यह संसद की राजनीति में एक बड़ा कदम माना जाएगा.विशेषज्ञों के मुताबिक, स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना कोई आम बात नहीं है. इससे संसद का माहौल और ज्यादा गरमा सकता है और बजट सत्र के आने वाले दिन भी अशांत रह सकते हैं.
सरकार और विपक्ष आमने-सामने
सरकार की ओर से यह कहा जा रहा है कि सदन की कार्यवाही नियमों और परंपराओं के अनुसार चलनी चाहिए.सरकार का तर्क है कि प्रश्नकाल और निर्धारित चर्चा के समय हर सदस्य को बोलने का मौका मिलता है, लेकिन हंगामा कर सदन की कार्यवाही रोकना ठीक नहीं है.
वहीं विपक्ष का कहना है कि जब भी वे सरकार से सवाल पूछना या किसी बड़े मुद्दे पर बात रखना चाहते हैं, तो उनकी आवाज दबा दी जाती है.विपक्षी नेताओं का आरोप है कि सरकार बहस से बचने के लिए नियमों की आड़ ले रही है.
संसद में हंगामे का असर आम लोगों पर
संसद में हंगामे और कार्यवाही स्थगित होने का सीधा असर आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर पड़ता है. बजट सत्र में महंगाई, रोजगार, किसानों की समस्याएं और आर्थिक हालात जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होनी होती है.लेकिन जब सदन बार-बार स्थगित होता है, तो इन मुद्दों पर गंभीर बहस नहीं हो पाती. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद में हंगामा जनता के लिए निराशाजनक होता है. लोग चाहते हैं कि उनके चुने हुए प्रतिनिधि संसद में बैठकर समस्याओं पर चर्चा करें और समाधान निकालें, न कि सिर्फ नारेबाजी करें.
जिस तरह से विपक्ष और सरकार आमने-सामने खड़े नजर आ रहे हैं, उससे संकेत मिल रहे हैं कि बजट सत्र के आने वाले दिन भी तनावपूर्ण रह सकते हैं.अगर विपक्ष स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाता है, तो राजनीतिक माहौल और गरमा सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की भूमिका जरूरी है. अगर दोनों पक्ष संवाद का रास्ता अपनाएं, तो संसद का कामकाज सुचारू रूप से चल सकता है.लेकिन अगर टकराव बढ़ता रहा, तो इसका नुकसान लोकतांत्रिक प्रक्रिया को ही होगा.



