Patna Bomb Threat: बिहार की राजधानी पटना में सोमवार सुबह उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब पटना सिविल कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिली.यह धमकी ईमेल के जरिए दी गई, जिसमें कोर्ट परिसर में तीन आरडीएक्स (RDX) आईईडी विस्फोट की बात कही गई. जैसे ही यह मेल सामने आया, पूरे कोर्ट परिसर में हड़कंप मच गया और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत हरकत में आ गईं.
यह मामला सोमवार, 9 फरवरी 2026 का बताया जा रहा है. ईमेल एक अधिवक्ता की मेल आईडी पर प्राप्त हुआ, जिसके बाद इसे तुरंत कोर्ट प्रशासन और जिला बार एसोसिएशन के संज्ञान में लाया गया. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने बिना देरी किए कोर्ट परिसर को खाली कराने का फैसला लिया.
ईमेल से मची अफरा-तफरी, प्रशासन हुआ अलर्ट
जानकारी के मुताबिक, धमकी भरा ईमेल मिलते ही I/C रजिस्ट्रार, सिविल कोर्ट पटना की ओर से जिला बार एसोसिएशन को पत्र लिखकर सभी अधिवक्ताओं, कर्मचारियों और मौजूद लोगों को तुरंत कोर्ट परिसर खाली करने का निर्देश दिया गया. इसके बाद कोर्ट की सभी इमारतों, चैंबरों और आसपास के इलाकों से लोगों को बाहर निकाला गया.
कोर्ट परिसर में रोजाना हजारों लोग आते-जाते हैं. वकील, पक्षकार, गवाह और आम नागरिक ऐसे में अचानक मिली धमकी ने सभी को डरा दिया.कई लोग जल्दबाजी में बाहर निकलते दिखे, वहीं कुछ वकील अपने जरूरी दस्तावेज संभालते नजर आए.स्थिति को संभालने के लिए पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला.
पुलिस और बम निरोधक दस्ता मौके पर, तलाशी अभियान जारी
धमकी की सूचना मिलते ही पीरबहोर थाना पुलिस, बम निरोधक दस्ता (Bomb Disposal Squad) और अन्य सुरक्षा एजेंसियां तुरंत सिविल कोर्ट परिसर पहुंच गईं. सुरक्षा कारणों से कोर्ट के सभी भवनों, कोर्ट रूम, वकीलों के चैंबर और आसपास के इलाकों की गहन तलाशी शुरू कर दी गई है.
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हर कोने की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि किसी भी संदिग्ध वस्तु या बैग को नजरअंदाज न किया जाए.डॉग स्क्वॉड और तकनीकी टीमों की मदद से भी तलाशी ली जा रही है. फिलहाल आम लोगों और वकीलों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है, ताकि तलाशी अभियान में कोई बाधा न आए.
पहले भी मिल चुकी हैं धमकियां, सुरक्षा पर फिर सवाल
यह पहली बार नहीं है जब पटना सिविल कोर्ट को निशाना बनाकर धमकी दी गई हो. इससे पहले भी कोर्ट परिसर को लेकर धमकी या अफवाहों की खबरें सामने आती रही हैं. हालांकि, ज्यादातर मामलों में जांच के बाद कोई विस्फोटक नहीं मिला, लेकिन हर बार इस तरह की घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर देती हैं.
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि कोर्ट जैसे संवेदनशील स्थानों की सुरक्षा बेहद अहम होती है. यहां रोजाना हजारों लोग आते हैं, जिनमें आम नागरिक से लेकर बड़े अधिकारी तक शामिल होते हैं. ऐसे में किसी भी तरह की लापरवाही भारी पड़ सकती है.
धमकी के बाद कोर्ट परिसर के बाहर वकीलों और पक्षकारों की भीड़ जमा हो गई. कई लोगों के चेहरे पर डर साफ नजर आ रहा था. कुछ वकीलों ने बताया कि उन्हें अपने क्लाइंट्स की चिंता सता रही थी, क्योंकि कई लोग दूर-दराज के इलाकों से केस की सुनवाई के लिए आते हैं.
एक एडवोकेट ने कहा, “सुबह काम शुरू ही हुआ था कि अचानक मैसेज आया कि कोर्ट खाली करें. पहले तो लगा कोई मजाक है, लेकिन जब पुलिस और बम निरोधक दस्ता पहुंचा तो समझ में आया कि मामला गंभीर है.” वहीं एक पक्षकार ने कहा कि इस तरह की घटनाओं से लोगों में डर बैठ जाता है और न्याय पाने के लिए कोर्ट आने में भी संकोच होने लगता है.
ईमेल भेजने वाले की तलाश में जुटी साइबर टीम
पुलिस अब इस मामले की तकनीकी जांच में जुट गई है. धमकी भरे ईमेल की आईपी ट्रैकिंग की जा रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि मेल किस जगह से भेजा गया. साइबर सेल की टीम ईमेल आईडी, सर्वर लोकेशन और अन्य डिजिटल सबूतों के आधार पर आरोपी तक पहुंचने की कोशिश कर रही है.
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कई बार इस तरह की धमकियां फर्जी या शरारती तत्वों द्वारा दी जाती हैं, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से हर धमकी को गंभीरता से लिया जाता है.अगर धमकी देने वाला पकड़ा गया, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
पटना पुलिस और जिला प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और सोशल मीडिया पर किसी भी अपुष्ट जानकारी को शेयर करने से बचें.जांच पूरी होने तक कोर्ट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रहेगी.
अधिकारियों ने कहा कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और तलाशी अभियान पूरा होने के बाद ही आगे की स्थिति साफ होगी. लोगों से सहयोग की अपील की गई है ताकि जांच कार्य सुचारू रूप से चल सके.
कोर्ट की कार्यवाही पर असर, सुनवाई प्रभावित
धमकी के चलते सिविल कोर्ट की दैनिक कार्यवाही बाधित हुई है. कई मामलों की सुनवाई टल गई और पक्षकारों को वापस लौटना पड़ा.इससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा, खासकर उन लोगों को जो दूर-दराज से सुनवाई के लिए पहुंचे थे.
कानूनी जानकारों का कहना है कि ऐसी घटनाएं न्याय व्यवस्था के कामकाज को प्रभावित करती हैं. इसलिए जरूरी है कि कोर्ट परिसरों की सुरक्षा को लेकर स्थायी और मजबूत व्यवस्था की जाए, ताकि बार-बार कामकाज बाधित न हो.



