PM Modi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज शाम 4:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम-2026 के प्रतिभागियों से संवाद करेंगे। इस कार्यक्रम में देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से चुने गए 400 से अधिक युवा शामिल होंगे। प्रधानमंत्री इन युवाओं के अनुभव सुनेंगे, उनसे बातचीत करेंगे और सीमावर्ती गांवों के विकास, राष्ट्रीय एकता तथा युवाओं की भूमिका पर अपने विचार साझा करेंगे। यह कार्यक्रम केवल एक संवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य देश के युवाओं को भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ना और उन्हें राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना भी है। सरकार का मानना है कि जब युवा देश के अंतिम छोर पर बसे गांवों को करीब से समझेंगे, तभी वे विकसित भारत के सपने को मजबूत आधार दे पाएंगे।
क्या है विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम?
विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम केंद्र सरकार की एक विशेष पहल है, जिसका उद्देश्य सीमावर्ती गांवों का समग्र विकास करना है। लंबे समय तक देश के कई सीमावर्ती गांव विकास की मुख्यधारा से दूर रहे। अब सरकार इन गांवों में सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी, पर्यटन और रोजगार जैसी सुविधाओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है। इसी सोच के तहत युवाओं को इन गांवों तक ले जाकर वहां की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों को समझने का अवसर दिया गया।
दो चरणों में हुआ आयोजन
विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम-2026 का आयोजन 4 जून से 30 जून तक दो चरणों में किया गया। इस दौरान लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के 74 वाइब्रेंट गांवों को कार्यक्रम में शामिल किया गया। इन गांवों में देशभर से आए युवाओं ने स्थानीय लोगों के साथ समय बिताया और कई सामाजिक गतिविधियों में हिस्सा लिया। सरकार का उद्देश्य था कि प्रतिभागी केवल गांवों का दौरा ही न करें, बल्कि वहां के लोगों के जीवन, चुनौतियों और विकास की जरूरतों को भी करीब से समझें।
तीन लाख से अधिक युवाओं ने लिया हिस्सा
इस कार्यक्रम के लिए प्रतिभागियों का चयन देशव्यापी ऑनलाइन क्विज प्रतियोगिता के माध्यम से किया गया। इस प्रतियोगिता में तीन लाख से अधिक युवाओं ने हिस्सा लिया। इनमें से बेहतर प्रदर्शन करने वाले 400 से ज्यादा प्रतिभागियों को कार्यक्रम के लिए चुना गया। यह चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी रही, जिससे देश के अलग-अलग हिस्सों के युवाओं को समान अवसर मिला।
गांवों में रहकर सीखा विकास का मॉडल
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने सीमावर्ती गांवों में स्थानीय समुदायों के साथ रहकर कई गतिविधियों में भाग लिया। उन्होंने स्वच्छता अभियान, सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता अभियान, युवा सम्मेलन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, वृक्षारोपण, मिनी मॉडल पंचायत और सामुदायिक विकास से जुड़े कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाई। इस दौरान युवाओं ने ग्रामीण जीवन को करीब से देखा और यह समझा कि सरकारी योजनाएं जमीन पर किस तरह लागू होती हैं।
स्थानीय कारीगरों और संस्कृति से परिचय
प्रतिभागियों ने सीमावर्ती क्षेत्रों के स्थानीय कारीगरों, किसानों और स्वयं सहायता समूहों से भी मुलाकात की। उन्होंने पारंपरिक हस्तशिल्प, स्थानीय कला, लोक संस्कृति और वहां के जीवन-यापन के तरीकों को जाना। इससे युवाओं को भारत की सांस्कृतिक विविधता और सीमावर्ती क्षेत्रों की समृद्ध विरासत को समझने का अवसर मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे कार्यक्रम युवाओं में स्थानीय उत्पादों और ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसी सोच को भी बढ़ावा देते हैं।
सामरिक महत्व को भी समझा
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थित कुछ महत्वपूर्ण संस्थानों और रणनीतिक दृष्टि से अहम स्थानों का भी दौरा किया। इससे उन्हें यह समझने का अवसर मिला कि सीमा पर बसे गांव केवल आबादी वाले क्षेत्र नहीं हैं, बल्कि देश की सुरक्षा, सामरिक मजबूती और राष्ट्रीय हितों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हैं।
राष्ट्रीय एकता को मिलेगा बल
इस पहल का एक बड़ा उद्देश्य देश के अलग-अलग राज्यों के युवाओं को एक मंच पर लाना भी है। जब दक्षिण भारत का युवा लद्दाख या उत्तराखंड के सीमावर्ती गांव में समय बिताता है और पूर्वोत्तर का छात्र हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण जीवन को समझता है, तो इससे राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समझ मजबूत होती है। युवाओं के बीच आपसी संवाद और अनुभवों का आदान-प्रदान भी इस कार्यक्रम की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल है।
प्रधानमंत्री युवाओं से जानेंगे अनुभव
आज होने वाले संवाद के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रतिभागियों से उनके अनुभवों के बारे में चर्चा करेंगे। युवा बताएंगे कि उन्होंने गांवों में रहकर क्या सीखा, स्थानीय लोगों से उन्हें क्या प्रेरणा मिली और भविष्य में वे देश के विकास में किस तरह योगदान देना चाहते हैं। प्रधानमंत्री भी युवाओं को विकसित भारत के लक्ष्य में उनकी भूमिका के बारे में संबोधित करेंगे।
सीमावर्ती गांवों के विकास पर विशेष जोर
सरकार लगातार इस बात पर जोर दे रही है कि देश के सीमावर्ती गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए। पिछले कुछ वर्षों में इन क्षेत्रों में सड़क, पुल, मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और पर्यटन से जुड़े कई प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं। सरकार का मानना है कि यदि सीमावर्ती गांव मजबूत होंगे, तो राष्ट्रीय सुरक्षा और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों को फायदा मिलेगा।
युवाओं की भूमिका होगी अहम
विशेषज्ञों के अनुसार विकसित भारत का लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब देश के युवा समाज से सीधे जुड़कर काम करेंगे। विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम इसी सोच को आगे बढ़ाता है। इससे युवाओं में नेतृत्व क्षमता, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र सेवा की भावना विकसित होती है। यह कार्यक्रम केवल एक सरकारी पहल नहीं, बल्कि युवाओं और सीमावर्ती समुदायों के बीच विश्वास और सहयोग का एक मजबूत माध्यम भी बन रहा है।
भविष्य में और बढ़ेगा दायरा
सरकारी सूत्रों के अनुसार आने वाले वर्षों में इस कार्यक्रम का दायरा और बढ़ाया जा सकता है। भविष्य में अन्य सीमावर्ती राज्यों और अधिक गांवों को भी इसमें शामिल किए जाने की संभावना है, ताकि ज्यादा से ज्यादा युवा इस पहल का हिस्सा बन सकें। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटन, स्थानीय रोजगार, शिक्षा और सामाजिक विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
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