आज दिल्ली के प्रशासनिक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजधानी में बने दो नए और अत्याधुनिक सरकारी परिसरों सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन का उद्घाटन करने जा रहे हैं. इसके साथ ही प्रधानमंत्री कार्यालय यानि PMO करीब 78 साल बाद अपने पुराने परिसर से नए कॉम्प्लेक्स में शिफ्ट होने जा रहा है.
सरकार के मुताबिक, यह बदलाव सिर्फ एक इमारत बदलने का नहीं है, बल्कि पूरे प्रशासनिक ढांचे को तेज, पारदर्शी और जनता के लिए ज्यादा सुविधाजनक बनाने की दिशा में बड़ा कदम है. लंबे समय से यह महसूस किया जा रहा था कि पुराने सरकारी दफ्तर आधुनिक जरूरतों के मुताबिक नहीं हैं. इसी सोच के साथ नए परिसरों की योजना बनाई गई.
सेवा तीर्थ है आम जनता के लिए “वन-स्टॉप सॉल्यूशन” केंद्र
सेवा तीर्थ को खास तौर पर आम लोगों की सुविधा को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है. यह भवन एक तरह से जनसेवा केंद्र (Public Service Hub) की तरह काम करेगा, जहां नागरिकों से जुड़ी कई सेवाएं एक ही जगह उपलब्ध होंगी.
सेवा तीर्थ की बड़ी खूबियां
- अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों के शिकायत निवारण कार्यालय
- जनसुनवाई काउंटर और हेल्प डेस्क
- डिजिटल टोकन सिस्टम – ताकि लाइन में खड़े रहने की झंझट न हो
- ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की सुविधा
- बैठने के लिए आरामदायक इंतजाम
- दिव्यांग और बुजुर्गों के लिए रैंप, लिफ्ट और स्पेशल हेल्प काउंटर
सरकार का दावा है कि सेवा तीर्थ में आने वाले लोगों को अब बार-बार अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. एक ही परिसर में उनकी समस्या संबंधित विभाग तक पहुंच जाएगी.इससे न सिर्फ समय बचेगा, बल्कि आम नागरिकों का भरोसा भी सरकारी सिस्टम पर बढ़ेगा.
कर्तव्य भवन है अफसरों के लिए आधुनिक वर्कप्लेस
जहां सेवा तीर्थ आम जनता के लिए बनाया गया है, वहीं कर्तव्य भवन मुख्य रूप से सरकारी अधिकारियों और मंत्रालयों के कामकाज के लिए तैयार किया गया है. इस भवन का मकसद है कि अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों को एक ही परिसर में लाकर आपसी समन्वय (Coordination) बेहतर किया जाए. इससे फाइलों की आवाजाही, मीटिंग्स और फैसले लेने की प्रक्रिया तेज होगी.
कर्तव्य भवन की खास बातें
- अत्याधुनिक ऑफिस स्पेस और मीटिंग रूम
- हाई-टेक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर
- सुरक्षित डाटा सेंटर और रिकॉर्ड रूम
- वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा
- ऊर्जा बचाने के लिए ग्रीन बिल्डिंग डिजाइन
सरकारी सूत्रों के अनुसार, पहले कई मंत्रालय अलग-अलग जगहों पर होने के कारण फाइलों और फैसलों में देरी हो जाती थी.अब एक ही परिसर में काम होने से निर्णय लेने की रफ्तार तेज होगी.
पीएमओ की नई शिफ्टिंग में क्या बदलेगा?
पीएमओ का नए कॉम्प्लेक्स में शिफ्ट होना सिर्फ प्रतीकात्मक बदलाव नहीं है. इसके पीछे प्रशासनिक सुधार की बड़ी सोच है.
पीएमओ की शिफ्टिंग से होने वाले फायदे:
- मंत्रालयों और पीएमओ के बीच बेहतर तालमेल
- फैसलों में तेजी
- डिजिटल सिस्टम से कामकाज में पारदर्शिता
- सुरक्षा व्यवस्था पहले से ज्यादा मजबूत
- जनता से जुड़े मामलों पर जल्दी एक्शन
सरकार का कहना है कि नए परिसर में पीएमओ के पास आधुनिक तकनीक, बेहतर कनेक्टिविटी और सुरक्षित वातावरण होगा, जिससे प्रधानमंत्री और उनकी टीम देश से जुड़े अहम फैसले ज्यादा तेजी से ले सकेंगी.
अनोखी डिजाइन और आधुनिक सोच
सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन की डिजाइन को लेकर भी काफी चर्चा हो रही है. इन इमारतों को सिर्फ सुंदर दिखने के लिए नहीं, बल्कि काम को आसान और तेज बनाने के लिए डिजाइन किया गया है.
डिजाइन की प्रमुख विशेषताएं:
- प्राकृतिक रोशनी और हवा का बेहतर इस्तेमाल
- खुले और बड़े कॉरिडोर
- पर्यावरण के अनुकूल निर्माण सामग्री
- बारिश का पानी सहेजने की व्यवस्था
- सोलर एनर्जी का इस्तेमाल
आर्किटेक्ट्स के मुताबिक, इन इमारतों की डिजाइन में भारतीय संस्कृति के साथ-साथ आधुनिकता का मेल दिखता है. इससे न सिर्फ काम करने वालों का माहौल बेहतर होगा, बल्कि आने वाले नागरिकों को भी सरकारी दफ्तर का अनुभव पहले से ज्यादा सहज लगेगा.
आम लोगों को क्या मिलेगा फायदा?
सरकार का दावा है कि इन नए परिसरों का सबसे बड़ा फायदा आम जनता को मिलेगा. लोगो का शिकायत दर्ज कराने में समय बचेगा, अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे, डिजिटल सुविधाओं से प्रक्रिया आसान होगी.वहीं, बुजुर्ग और दिव्यांग नागरिकों को सहूलियत होगी और जनसुनवाई से लोगों की आवाज सीधे सरकार तक पहुंचेगी.
सेवा तीर्थ को लेकर उम्मीद है कि यह सरकारी कामकाज और जनता के बीच की दूरी कम करेगा.



