Raj Bhavan Name Change: केंद्र सरकार ने देश के सभी राज्यों के राजभवन का नाम बदल दिया है। अब से भारत की सभी राजभवन का नया नाम लोकभवन है। दरअसल, यह बदलाव गृह मंत्रालय के आधिकारिक निर्देश के बाद ही किया गया है।
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सरकार का मानना है कि यह सिर्फ नाम बदलना नहीं, बल्कि शासन की नई सोच और दिशा में बड़े परिवर्तन का प्रतीक है, जहां सत्ता विशेषाधिकार नहीं, बल्कि सेवा और जिम्मेदारी का माध्यम है।
नाम बदलने की परंपरा और संदेश
देखा जाए तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 11 सालों में कई बड़े सरकारी स्थलों, मार्गों और संस्थानों के नाम बदले गए हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य शासन का हर प्रतीक जनता-केन्द्रित सोच को दर्शाता है। इस प्रक्रिया में अब राजभवन से लोकभवन बड़ा कदम माना जा रहा है। इसका अर्थ राजशाही की छवि को हटाकर संस्थानों को जनता के करीब लाना है।
मोदी सरकार ने दिए 4 संकेत
- शक्ति और शाही दबदबे का प्रतीक रहे राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ किया गया। नया नाम यह संदेश देता है कि सत्ता अधिकार नहीं, बल्कि कर्तव्य और सेवा का मार्ग है।
- प्रधानमंत्री का आधिकारिक निवास पहले रेस कोर्स रोड था, जो एक औपनिवेशिक और अभिजात्य छवि देता था। साल 2016 में इसका नाम लोक कल्याण मार्ग कर दिया गया।
- प्रधानमंत्री कार्यालय वाले नए प्रशासनिक परिसर को सेवा तीर्थ नाम दिया गया है। शब्द ‘तीर्थ’ इसे पवित्र, सेवा और समर्पण की भावना से जोड़ता है। सरकार का कहना है कि यह सिर्फ प्रशासनिक भवन नहीं, बल्कि जनसेवा का केंद्र है, जहां हर निर्णय नागरिक हित को ध्यान में रखकर लिया जाता है।
- देश की प्रशासनिक रीढ़ माने जाने वाले सेंट्रल सचिवालय का नया नाम कर्तव्य भवन रखा गया है। यह नाम बताता है कि सरकारी कर्मचारियों का पहला काम जनता की सेवा और राष्ट्रहित है, न कि पद की प्रतिष्ठा।

लोकतंत्र की दिशा में बदलाव
अब से देशभर की राजभवन को लोकभवन कहना, शासन को जनता से जोड़ने की एक बड़ी और नई पहल है। सरकार का यह कदम बताता है कि सरकार हर संस्थान को जनता-केंद्रित बनाना चाहती है।
जिससे साफ होता है कि राज यानी शाही परंपरा या अधिकार का युग खत्म और लोक यानी सेवा, समर्पण और जिम्मेदारी का युग शुरू है।
इस संदर्भ में भारत सरकार का साफ कहना है कि लोकतंत्र में हर ईंट-पत्थर पर जनता सर्वोपरि होनी चाहिए। इसलिए जिन नामों में ‘राज’, ‘शक्ति’, ‘विशेषाधिकार’ की छाप थी, उन्हें हटाकर ‘कर्तव्य’, ‘सेवा’ और ‘लोक’ जैसे शब्दों से अब जोड़ा जा रहा है।
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