RBI Policy: बजट के बाद देशभर की निगाहें RBI की फरवरी 2026 मौद्रिक नीति समिति (MPC) बैठक पर टिकी थीं. तीन दिन चली बैठक 4 से 6 फरवरी के बाद RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने नीतिगत फैसलों का ऐलान किया.सबसे बड़ी खबर यह रही कि रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया. मतलब साफ है की होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI में फिलहाल कोई राहत नहीं, और FD पर मिलने वाले ब्याज दरों में भी बड़ा बदलाव नहीं है.लेकिन इसके पीछे RBI का क्या तर्क है, आम आदमी की जेब पर इसका क्या असर पड़ेगा.
बजट 2026 के बाद निवेशकों, कारोबारियों और आम लोगों को उम्मीद थी कि RBI शायद महंगाई और ग्रोथ के बैलेंस को देखते हुए ब्याज दरों में कुछ बदलाव कर सकता है. लेकिन RBI ने “स्टेटस-क्वो” बनाए रखा ,यानी पहले से चल रही नीति को जारी रखा.
RBI का फोकस फिलहाल तीन बातों पर रहा:
- महंगाई को कंट्रोल में रखना
- आर्थिक ग्रोथ को सपोर्ट देना
- वैश्विक अनिश्चितताओं से देश की अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखना
RBI MPC Meeting की 12 बड़ी हाइलाइट्स
- रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं: ब्याज दरें जस की तस रखी गईं. इससे EMI में तुरंत राहत नहीं मिलेगी, लेकिन आगे कटौती की उम्मीद बनी हुई है.
- नीतिगत रुख ‘अकॉमोडेटिव विद कॉशन’: RBI ने कहा कि वह जरूरत पड़ने पर ग्रोथ को सपोर्ट करेगा, लेकिन महंगाई पर नजर बनाए रखेगा.
- महंगाई पर चिंता बनी हुई: खाद्य कीमतों और वैश्विक तेल दामों में उतार-चढ़ाव से महंगाई पर दबाव बना हुआ है.
- FY27 के लिए ग्रोथ आउटलुक संतुलित: घरेलू मांग ठीक है, लेकिन वैश्विक सुस्ती से निर्यात पर असर पड़ सकता है.
- तरलता मैनेजमेंट जारी: RBI जरूरत के हिसाब से सिस्टम में नकदी उपलब्ध कराएगा.
- बैंकिंग सिस्टम स्थिर बताया गया: NPA कंट्रोल में हैं, क्रेडिट ग्रोथ संतुलित है.
- रुपये पर नजर: डॉलर मजबूत है, RBI ने कहा कि फॉरेक्स मार्केट में अनावश्यक उतार-चढ़ाव को रोका जाएगा.
- डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा: UPI और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश जारी रहेगा.
- MSME को क्रेडिट सपोर्ट: छोटे कारोबारों के लिए बैंकिंग सपोर्ट और आसान बनाने पर जोर.
- कृषि सेक्टर के लिए राहत संकेत: ग्रामीण मांग को सपोर्ट करने के उपाय जारी रहेंगे.
- रियल एस्टेट पर नजर: हाउसिंग लोन की डिमांड स्थिर बनी हुई है.
- भविष्य में डेटा-आधारित फैसले: अगली कटौती या बढ़ोतरी महंगाई और ग्रोथ के आंकड़ों पर निर्भर होगी
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
- होम लोन ,कार लोन या पर्सनल लोन: होम लोन ,कार लोन या पर्सनल लोन लेने पर EMI फिलहाल बदलेगी नहीं और नए लोन लेने वालों के लिए ब्याज दरें वही रहेंगी. वहीं, जो लोग फ्लोटिंग रेट पर लोन चला रहे हैं, उन्हें राहत के लिए अगली पॉलिसी का इंतजार करना होगा.
- FD और सेविंग्स अकाउंट: FD पर ब्याज दरों में तुरंत बदलाव नहीं.वहीं,सेविंग्स अकाउंट पर भी ब्याज स्थिर रहने की संभावना
- निवेश और शेयर बाजार: ब्याज दर स्थिर रहने से बाजार को शॉर्ट टर्म में स्थिरता मिलती है. लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए संकेत है कि ग्रोथ-फ्रेंडली माहौल बना हुआ है.
हालाँकि,एलकेपी सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी एनालिस्ट के मुताबिक RBI का फैसला संतुलित है क्योंकि महंगाई में पूरी तरह नरमी नहीं आई है.
वहीं, कई इकोनॉमिस्ट का मानना है कि अगर आने वाले महीनों में महंगाई और घटती है, तो अगली या उसके बाद की MPC बैठक में रेट की कटौती संभव है.
रियल इकोनॉमी पर असर: नौकरी और सैलरी ग्रोथ का क्या होगा?
रेपो रेट स्थिर रहने का असर सिर्फ EMI या FD तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर नौकरियों और सैलरी ग्रोथ पर भी पड़ता है. जब ब्याज दरें स्थिर रहती हैं, तो कंपनियों के लिए कर्ज की लागत नहीं बढ़ती. इससे कंपनियां अपने एक्सपैंशन प्लान, नई भर्तियों और निवेश को जारी रख पाती हैं. इसका फायदा खासतौर पर स्टार्टअप्स, IT, मैन्युफैक्चरिंग और MSME सेक्टर को मिल सकता है, जहां लोन पर निर्भरता ज्यादा होती है.
उद्योगों पर असर: मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को राहत
रेपो रेट में बढ़ोतरी न होने से मैन्युफैक्चरिंग, कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों के लिए लोन सस्ता नहीं हुआ, लेकिन महंगा भी नहीं हुआ. इसका मतलब है कि जो प्रोजेक्ट्स पहले से प्लान में हैं, वे बिना अतिरिक्त लागत बढ़े आगे बढ़ सकते हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर RBI रेट बढ़ाता, तो प्रोजेक्ट कॉस्ट बढ़ जाती और कई कंपनियां निवेश टाल देतीं.
आम उपभोक्ता की रोजमर्रा की खरीदारी पर असर
रेपो रेट स्थिर रहने से क्रेडिट कार्ड EMI, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (फ्रिज, टीवी, मोबाइल) पर मिलने वाली EMI स्कीम्स भी महंगी नहीं होंगी. इससे उपभोक्ता खर्च पर नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा और बाजार में खरीदारी का ट्रेंड बना रह सकता है. रिटेल सेक्टर के लिए यह संकेत है कि मांग में अचानक गिरावट नहीं आएगी.
वैश्विक फैक्टर्स का असर
- अमेरिका और यूरोप में ब्याज दर नीति
- डॉलर की मजबूती
- कच्चे तेल की कीमतें
- जियो-पॉलिटिकल रिस्क
इन सभी फैक्टर्स का असर RBI के फैसलों पर पड़ता है. RBI ने साफ किया कि वह वैश्विक अनिश्चितताओं को ध्यान में रखकर कदम उठाएगा.



