Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने आज सोमवार को कई अहम मामलों में बड़े फैसले सुनाए हैं। जिसमें अदालत ने मंदिरों के पुजारियों और कर्मचारियों के वेतन बढ़ाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। वहीं दिल्ली बार काउंसिल चुनाव की मतगणना पर रोक लगाते हुए हाईकोर्ट को रोजाना सुनवाई का आदेश दिया है। इसके अलावा पीएम मोदी का करीबी बनकर लोगों से ठगी करने के आरोपी मोहम्मद काशिफ को जमानत भी दे दी गई। अदालत के इन फैसलों को कानूनी और राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पुजारियों के वेतन पर सुनवाई टली
बता दें की सुप्रीम कोर्ट ने उस जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया जिसमें राज्य सरकारों के अधीन आने वाले मंदिरों में पुजारियों, सेवादारों और अन्य कर्मचारियों के वेतन और सुविधाओं की समीक्षा के लिए न्यायिक आयोग या विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की गई थी। न्यायमूर्ति Vikram Nath और न्यायमूर्ति Sandeep Mehta की पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत इस तरह की याचिका पर सीधे सुनवाई नहीं की जा सकती। अदालत ने साफ कहा कि यदि कोई व्यक्ति वास्तव में प्रभावित है तो वह व्यक्तिगत रूप से अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है।
अदालत ने क्या कहा?
ऐसे में सुनवाई के दौरान पीठ ने याचिकाकर्ता अधिवक्ता Ashwini Upadhyay से कहा कि उन्हें पुजारियों के मामलों में अत्यधिक दखल देने से बचना चाहिए। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि संभव है कि याचिकाकर्ता को मंदिरों में कार्यरत पुजारियों और सेवदारों की वास्तविक आय और व्यवस्था की पूरी जानकारी न हो। याचिकाकर्ता ने अदालत में दलील दी कि इलाहाबाद हाईकोर्ट समेत कई उच्च न्यायालय पहले ही यह कह चुके हैं कि मंदिरों के पुजारियों को सम्मानजनक जीवन के लिए उचित वेतन मिलना चाहिए। इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। हालांकि अदालत ने याचिकाकर्ता को राहत देते हुए याचिका वापस लेने की अनुमति दी और कानून के तहत अन्य उपलब्ध उपाय अपनाने की छूट भी प्रदान की।
दिल्ली बार काउंसिल चुनाव की मतगणना पर रोक
बता दें की दूसरे महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने Bar Council of Delhi चुनाव की मतगणना पर तत्काल रोक लगा दी। जिससे यह फैसला चुनाव में कथित गड़बड़ी और छेड़छाड़ के आरोपों के बाद लिया गया। मुख्य न्यायाधीश Surya Kant और न्यायमूर्ति Joymalya Bagchi की पीठ ने इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट को रोजाना सुनवाई करने का निर्देश दिया।
हाईकोर्ट में बनेगी विशेष पीठ
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि मामले को Delhi High Court की खंडपीठ को भेजा जाए और हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इस विवाद की सुनवाई के लिए विशेष पीठ गठित करें। अदालत ने यह भी कहा कि जब तक हाईकोर्ट इस मामले पर अंतिम फैसला नहीं सुनाता, तब तक मतपत्रों की गिनती आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। पीठ ने स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी है और सभी पक्ष हाईकोर्ट में अपनी दलीलें रखने के लिए स्वतंत्र हैं।

लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर उठे सवाल
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता Shobha Gupta ने अदालत से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। उन्होंने कहा कि बार काउंसिल चुनाव में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता दांव पर लगी हुई है और यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो चुनाव की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। इस मामले को कानूनी समुदाय में बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि बार काउंसिल चुनाव वकीलों के प्रतिनिधित्व और न्यायिक व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण संस्थागत मामलों को प्रभावित करते हैं।
पीएम मोदी का करीबी बनकर ठगी करने के आरोपी को जमानत
एक अन्य चर्चित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी मोहम्मद काशिफ को जमानत दे दी। उस पर आरोप है कि उसने खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई केंद्रीय मंत्रियों का करीबी बताकर लोगों से सरकारी काम कराने के नाम पर पैसे वसूले। न्यायमूर्ति M M Sundresh और न्यायमूर्ति N Kotiswar Singh की पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के आदेश को रद्द कर दिया।
तीन साल से जेल में था आरोपी
मोहम्मद काशिफ करीब तीन वर्षों से हिरासत में था। सुप्रीम कोर्ट ने उसे कुछ शर्तों के साथ जमानत दी। जिसमें अदालत ने कहा कि आरोपी भविष्य में किसी भी उच्च संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के नाम का गलत इस्तेमाल नहीं करेगा। इसके साथ ही अदालत ने आरोपी को जांच और सुनवाई में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि आरोपी जांच एजेंसियों का सहयोग नहीं करता है तो Enforcement Directorate यानी ईडी उसकी जमानत रद्द कराने के लिए आवेदन कर सकती है।
क्या हैं आरोपी पर आरोप?
ईडी ने यह मामला 19 अप्रैल 2023 को उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर में दर्ज जालसाजी और धोखाधड़ी के केस के आधार पर दर्ज किया था। जांच एजेंसी के अनुसार मोहम्मद काशिफ खुद को प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों का करीबी बताकर लोगों से सरकारी काम कराने के नाम पर धन उगाही करता था। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इनपुट और निगरानी के दौरान उसकी गतिविधियां संदिग्ध पाई गई थीं। ईडी का आरोप है कि आरोपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Facebook और Instagram पर प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों के साथ एडिटेड और मॉर्फ्ड तस्वीरें पोस्ट की थीं ताकि लोगों को प्रभावित किया जा सके। जांच एजेंसी का कहना है कि आरोपी इन तस्वीरों और फर्जी संपर्कों का इस्तेमाल कर लोगों को भरोसे में लेता था और फिर उनसे पैसे वसूलता था।
क्यों अहम हैं सुप्रीम कोर्ट के ये फैसले?
जानकारी के लिए बता दें की सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के तीन अहम फैसलों ने धार्मिक संस्थानों, चुनावी पारदर्शिता और कथित राजनीतिक धोखाधड़ी जैसे मुद्दों पर बड़ा संदेश दिया। अदालत ने साफ किया कि हर मामले में सीधे संवैधानिक हस्तक्षेप जरूरी नहीं है। साथ ही कानूनी प्रक्रिया और संस्थागत व्यवस्था का पालन भी उतना ही महत्वपूर्ण माना गया।
ये भी पढ़ें: ‘महाराष्ट्र विधान परिषद’ चुनाव का ऐलान, इस दिन से होगी वोटिंग, 16 सीटों पर सियासी समीकरणों का खेल शुरू



