Hauz Rani Fire: दिल्ली के हौज रानी इलाके में हुए दर्दनाक अग्निकांड ने राजधानी की बेड एंड ब्रेकफास्ट (B&B) नीति और सरकारी निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है की आग की इस भयावह घटना में 21 लोगों की जान चली गई है, जिनमें कई विदेशी नागरिक भी शामिल थे। वहीं, हादसे के बाद सामने आई जानकारियों ने यह संकेत दिया है कि जिस “फ्लोरिश स्टे” में आग लगी, वहां नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा था।
मिली जानकारी के अनुसार, जांच में सामने आया कि जिस संपत्ति को केवल 6 कमरों के लिए लाइसेंस मिला था, वहां करीब 25 कमरे संचालित किए जा रहे थे। इतना ही नहीं, जिस मकान को आवासीय उपयोग के लिए पंजीकृत किया गया था, वह पूरी तरह व्यावसायिक गेस्टहाउस की तरह चलाया जा रहा था।
क्या है दिल्ली की B&B नीति?
दरअसल दिल्ली सरकार ने 2007 में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए B&B (बेड एंड ब्रेकफास्ट) नीति शुरू की थी। इसके तहत मकान मालिक अपने घर के सीमित कमरे पर्यटकों को किराए पर दे सकते हैं। जिससे नियमों के मुताबिक मालिक का उसी घर में रहना जरूरी है और अधिकतम 6 कमरे ही किराए पर दिए जा सकते हैं। मेहमानों का रिकॉर्ड प्रशासन और पुलिस को देना अनिवार्य है, जबकि विदेशी मेहमानों की जानकारी भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत दर्ज करनी होती है।
फ्लोरिश स्टे में क्या-क्या गड़बड़ियां मिलीं?
हादसे की जांच में फ्लोरिश स्टे में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं हैं। जिससे इस संपत्ति को केवल 6 कमरों का लाइसेंस मिला था, लेकिन यहां करीब 25 कमरे संचालित किए जा रहे थे। आरोप है कि मालिक स्वयं परिसर में नहीं रहता था और पूरी इमारत होटल की तरह चलाई जा रही थी। साथ ही बिजली, पानी और संपत्ति कर का भुगतान आवासीय दरों पर किया जा रहा था, जिससे नियमों का उल्लंघन कर आर्थिक लाभ लिया जा रहा था।
सरकारी एजेंसियों की भूमिका पर सवाल
बताया जा रहा है की हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इतने बड़े स्तर पर नियमों का उल्लंघन आखिर सालों तक कैसे चलता रहा।
MCD की निगरानी पर सवाल: नगर निगम को समय-समय पर निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करना होता है कि B&B नीति का पालन हो रहा है या नहीं। यदि 6 कमरों के लाइसेंस पर 25 कमरे चल रहे थे, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या कभी उचित निरीक्षण किया गया था।
दिल्ली जल बोर्ड की चूक: 25 कमरों वाली इमारत में पानी की खपत सामान्य घरों की तुलना में कई गुना अधिक होना स्वाभाविक है। इसके बावजूद किसी प्रकार की जांच या आपत्ति सामने नहीं आई।
बिजली विभाग पर भी उठे सवाल: व्यावसायिक गतिविधियां होने के बावजूद बिजली का उपयोग घरेलू कनेक्शन से किया जा रहा था। इससे सरकार को राजस्व का नुकसान भी हुआ और नियमों की अनदेखी भी होती रही।
पुलिस की मंजूरी हटाने पर बहस
हौज रानी अग्निकांड के बाद होटल, गेस्टहाउस और B&B संचालन के लिए पुलिस मंजूरी हटाने के फैसले पर भी बहस तेज हो गई है। पहले पुलिस मालिक और संपत्ति का सत्यापन करने के साथ आपराधिक रिकॉर्ड की जांच भी करती थी। विदेशी मेहमानों की निगरानी भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा थी। 2025 में यह अनिवार्यता हटने के बाद पुलिस की प्रत्यक्ष निगरानी कम हो गई, जिससे नियमों के पालन पर सवाल उठ रहे हैं।

दिल दहला देने वाले बचाव अभियान की कहानियां
अग्निकांड के बाद स्थानीय लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर कई लोगों को बचाने की कोशिश की। जिसमें राहत कार्य में शामिल युवाओं ने बताया कि इमारत के अंदर घना धुआं भर चुका था। कई लोग आग से बचने के लिए बाथरूम और कमरों में छिप गए थे, लेकिन जहरीले धुएं के कारण उनकी मौत हो गई।
एक बचावकर्मी के अनुसार, एक दंपति एक-दूसरे को गले लगाए हुए मृत मिले। दोनों ने आखिरी क्षण तक एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ा। एक अन्य कमरे में एक जोड़ा बिस्तर के कोने पर बैठा मिला, जो आग की चपेट में आने से बुरी तरह झुलस चुका था।
इमरजेंसी एग्जिट का भी नहीं था इंतजाम
स्थानीय लोगों का कहना है की, इमारत में ऊपर जाने के लिए केवल एक मुख्य सीढ़ी थी। किसी प्रकार का इमरजेंसी एग्जिट मौजूद नहीं था। आग लगने के बाद धुआं पूरी सीढ़ी में भर गया और लोगों के बाहर निकलने का रास्ता बंद हो गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैकल्पिक निकास मार्ग होता तो कई जानें बचाई जा सकती थीं।
मानवता की मिसाल बने स्थानीय लोग
बता दें की जब लोग ऊपरी मंजिलों से कूदकर जान बचाने की कोशिश कर रहे थे, तब आसपास के निवासियों ने अपनी दुकान और घरों से गद्दे लाकर इमारत के नीचे बिछा दिए। स्थानीय लोगों ने बिना किसी सरकारी सहायता का इंतजार किए राहत कार्य में सहयोग किया। कई लोगों की जान इसी वजह से बच सकी।
हादसे ने खड़े किए बड़े सवाल
हौज रानी अग्निकांड केवल एक आग की घटना नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक निगरानी, भवन सुरक्षा और B&B नीति के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि यदि एक आवासीय लाइसेंस के नाम पर वर्षों तक होटल जैसा कारोबार चल सकता है, तो ऐसी कितनी और इमारतें दिल्ली में मौजूद हैं। इस हादसे के बाद अब सरकार और संबंधित एजेंसियों पर दबाव बढ़ गया है कि वे पूरे शहर में B&B और गेस्टहाउस संचालन की व्यापक जांच करें, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोका जा सके।



