TMC Crisis: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहा संकट चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया जा रहा ही की पार्टी में बगावत और बड़े स्तर पर टूट की खबरों के बीच मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार में मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) को महत्वपूर्ण चेतावनी दी है। जिसमें उन्होंने कहा कि टीएमसी के कुछ नेता अब बीजेपी के करीब आने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन पार्टी को ऐसे नेताओं से सावधान रहने की जरूरत है।
जानकारी के अनुसार, स्वपन दासगुप्ता ने साफ शब्दों में कहा कि वे टीएमसी के पतन पर बिल्कुल भी दुखी नहीं हैं, लेकिन यह जरूर चाहते हैं कि पश्चिम बंगाल बीजेपी की राजनीतिक संस्कृति किसी भी तरह से प्रभावित न हो।
TMC के संकट पर मंत्री का तीखा हमला
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए स्वपन दासगुप्ता ने लिखा कि तृणमूल कांग्रेस का आत्म-विनाश उनकी चिंता का विषय नहीं है। साथ ही, उन्होंने कहा कि पार्टी में जो नेता आज बीजेपी के करीब आने की कोशिश कर रहे हैं, उनमें से कई ऐसे हैं जो अपने पुराने राजनीतिक पापों को धोना चाहते हैं। जिसमें उन्होंने कहा कि बंगाल की राजनीति में शुद्धिकरण की प्रक्रिया अधूरी नहीं छोड़ी जानी चाहिए। ऐसे नेताओं को केवल राजनीतिक लाभ के लिए स्वीकार करना भविष्य में बीजेपी के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
BJP को क्यों दी गई चेतावनी?
दरअसल स्वपन दासगुप्ता का बयान ऐसे समय आया है जब टीएमसी के कई नेताओं और विधायकों के पार्टी छोड़ने की अटकलें तेज हैं। जिससे माना जा रहा है कि टीएमसी के भीतर बढ़ती असंतुष्टि के कारण कुछ नेता भाजपा के संपर्क में हैं।
मंत्री ने कहा कि राजनीतिक अवसरवादियों से सावधान रहने की आवश्यकता है। जो लोग वर्षों तक टीएमसी की राजनीति का हिस्सा रहे और अब परिस्थितियां बदलने पर अपना पक्ष बदल रहे हैं, उनके इरादों को समझना जरूरी है।
TMC में इतिहास की सबसे बड़ी टूट
3 जून 2026 को पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया। तृणमूल कांग्रेस के इतिहास में पहली बार इतनी बड़ी बगावत देखने को मिली। पार्टी से निष्कासित किए जा चुके ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि उनके साथ 58 विधायक हैं। ऐसे में उन्होंने विधानसभा स्पीकर के सामने इन विधायकों के समर्थन पत्र प्रस्तुत किए। इसके बाद स्पीकर ने उन्हें पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दे दी। इस फैसले ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और ममता बनर्जी के नेतृत्व पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
ऋतब्रत बनर्जी को मिली नेता प्रतिपक्ष की मान्यता
विधानसभा स्पीकर ने ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष का दर्जा देकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। खास बात यह रही कि अभिषेक बनर्जी समर्थित दावे को स्वीकार नहीं किया गया। ऋतब्रत बनर्जी ने खुद को “असली टीएमसी” का प्रतिनिधि बताया है। उन्होंने यह भी प्रस्ताव दिया कि ममता बनर्जी को पार्टी का मुख्य सलाहकार बनाया जा सकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि उनका गुट राज्य में रचनात्मक विपक्ष की भूमिका निभाना चाहता है।

कई बड़े विधायक ऋतब्रत गुट के साथ
ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट में कई प्रभावशाली विधायक शामिल बताए जा रहे हैं। इनमें संदीपन साहा, जावेद खान और शिउली साहा जैसे नाम प्रमुख हैं। इन नेताओं के समर्थन के कारण ऋतब्रत गुट का राजनीतिक महत्व बढ़ गया है। यही वजह है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में अब टीएमसी के भविष्य को लेकर नए सवाल उठ रहे हैं।
ममता-अभिषेक गुट की बड़ी कार्रवाई
पार्टी में बढ़ते संकट को देखते हुए ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने संगठनात्मक स्तर पर बड़ा कदम उठाया है। बताया जा रहा है कि पार्टी की कई कमेटियों को भंग कर दिया गया है। इस फैसले का उद्देश्य संगठन को दोबारा मजबूत करना और असंतुष्ट नेताओं पर नियंत्रण स्थापित करना माना जा रहा है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के सामने चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है।
बंगाल की राजनीति में नए समीकरण
टीएमसी में हुई इस बड़ी टूट ने पश्चिम बंगाल की राजनीति के समीकरण बदल दिए हैं। एक ओर ममता बनर्जी अपनी पार्टी को एकजुट रखने की कोशिश कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
बीजेपी के भीतर भी इस बात पर चर्चा तेज है कि टीएमसी से आने वाले नेताओं को किस हद तक स्वीकार किया जाए। स्वपन दासगुप्ता की चेतावनी इसी राजनीतिक बहस का हिस्सा मानी जा रही है।
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