Brij Bhushan Sharan Singh: देशभर में लंबे समय तक चर्चा का विषय रहे महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न मामले में सोमवार को बड़ा कानूनी फैसला सामने आया। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और छह बार के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को इस मामले में बरी कर दिया। अदालत ने सह-आरोपी और WFI के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को भी आरोपों से मुक्त कर दिया। यह मामला पिछले तीन वर्षों से न्यायिक प्रक्रिया में था और इसने खेल जगत के साथ-साथ राजनीति में भी व्यापक बहस को जन्म दिया था।
फैसले से पहले कोर्ट पहुंचे थे बृजभूषण
सोमवार सुबह फैसला सुनाए जाने से पहले बृजभूषण शरण सिंह राउज एवेन्यू कोर्ट पहुंचे। मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में उन्होंने कहा कि वे वही स्वीकार करेंगे जो अदालत का फैसला होगा। उन्होंने कहा, “मेरे हाथ में कुछ नहीं है, जो कोर्ट कहेगी वही मानूंगा।” कुछ देर बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए उन्हें और विनोद तोमर को बरी कर दिया। इसके साथ ही इस चर्चित मुकदमे का ट्रायल स्तर पर समापन हो गया।
फैसला आने के बाद क्या बोले बृजभूषण?
अदालत से बाहर आने के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिस दिन उन पर आरोप लगाए गए थे, उसी दिन उन्होंने कहा था कि यदि आरोप सिद्ध हो जाते हैं तो वे सबसे कठोर सजा स्वीकार करेंगे। उन्होंने कहा कि अदालत ने उन्हें बरी कर दिया है और उनका विश्वास न्यायपालिका में हमेशा बना रहा। उन्होंने अपने समर्थकों का भी आभार जताया और कहा कि यह उनके लिए राहत और संतोष का दिन है। उन्होंने यह भी कहा कि अब वे इस पूरे विवाद को पीछे छोड़कर आगे बढ़ना चाहते हैं।
मामला क्या था?
यह मामला वर्ष 2023 में सामने आया था, जब कई महिला पहलवानों ने तत्कालीन WFI अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इन आरोपों के बाद देश के कई नामी पहलवानों ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर लंबे समय तक धरना-प्रदर्शन किया। यह विरोध प्रदर्शन राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना और खेल प्रशासन में जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठे। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने शिकायतों के आधार पर एफआईआर दर्ज की और जांच शुरू की। जांच पूरी होने के बाद अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया और मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई।
लंबी चली न्यायिक प्रक्रिया
इस मामले की सुनवाई कई चरणों में हुई। अदालत ने अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनीं। कई गवाहों के बयान दर्ज किए गए और दस्तावेजी साक्ष्यों की भी जांच की गई। ट्रायल के अंतिम चरण में अदालत ने दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। बाद में 3 अगस्त को फैसला सुनाने की तारीख तय की गई थी।
अदालत के फैसले का महत्व
राउज एवेन्यू कोर्ट का यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह मामला केवल एक आपराधिक मुकदमा नहीं था, बल्कि इसने भारतीय खेल व्यवस्था, खिलाड़ियों की सुरक्षा और खेल संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर भी व्यापक चर्चा शुरू की थी। अदालत के फैसले के बाद ट्रायल कोर्ट स्तर पर आरोपियों को राहत मिली है। हालांकि, भारतीय न्याय व्यवस्था में यदि कानून के तहत कोई पक्ष उचित समझे तो वह उच्च अदालत में उपलब्ध कानूनी विकल्पों का उपयोग कर सकता है।
खेल जगत में लंबे समय तक रहा असर
इस मामले का प्रभाव भारतीय कुश्ती पर भी पड़ा। विवाद के दौरान कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के पहलवानों ने विरोध प्रदर्शन किए। भारतीय कुश्ती महासंघ के प्रशासनिक ढांचे में भी बदलाव देखने को मिले और खेल प्रशासन को लेकर लगातार बहस होती रही। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम ने खिलाड़ियों की शिकायतों के निस्तारण, संस्थागत जवाबदेही और खेल संघों की कार्यप्रणाली को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दिया।
राजनीतिक असर भी पड़ा
बृजभूषण शरण सिंह लंबे समय तक उत्तर प्रदेश की कैसरगंज लोकसभा सीट से सांसद रहे हैं। यौन उत्पीड़न के आरोप सामने आने के बाद उन्हें पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी का टिकट नहीं मिला था। उनकी जगह उनके बेटे करण भूषण सिंह को उम्मीदवार बनाया गया था। इस कारण यह मामला राजनीतिक रूप से भी काफी चर्चित रहा और विपक्ष तथा सत्ता पक्ष के बीच लगातार बहस का विषय बना रहा।
सुनवाई के दौरान क्या हुआ?
मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने शिकायतकर्ता महिला पहलवानों के आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा। दूसरी ओर बचाव पक्ष ने आरोपों का लगातार खंडन किया और कहा कि शिकायतों तथा गवाहियों में कई विरोधाभास और असंगतियां हैं। बचाव पक्ष ने अदालत से आरोपियों को संदेह का लाभ देने की मांग की।
देशभर में रही नजर
इस फैसले पर केवल खेल जगत ही नहीं, बल्कि राजनीतिक और कानूनी हलकों की भी नजर थी। फैसले से पहले कोर्ट परिसर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई थी। मीडिया और समर्थकों की भी बड़ी संख्या वहां मौजूद रही। जैसे ही अदालत का फैसला आया, यह खबर देशभर में चर्चा का विषय बन गई।
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