G7 Summit France 2026: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़ी वैश्विक चिंताओं के बीच भारत और अमेरिका के रिश्तों को नई दिशा देने की तैयारी तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi की संभावित मुलाकात को लेकर कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज है। जिससे माना जा रहा है कि जून 2026 में फ्रांस में होने वाले G7 Summit 2026 के दौरान दोनों नेताओं के बीच अहम बैठक हो सकती है।
G7 समिट में दिख सकता है बड़ा कूटनीतिक मंच
बता दें कि यह जून महीने में फ्रांस के Évian शहर में आयोजित होने वाला जी-7 समिट इस बार कई मायनों में खास माना जा रहा है। इस मंच पर दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के नेता वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे। इसी दौरान ट्रंप और मोदी की मुलाकात होने की संभावना जताई जा रही है। जिसमे फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने प्रधानमंत्री मोदी को इस समिट में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। हालांकि अभी तक ऑफिशियल रूप से दोनों नेताओं की भागीदारी की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन तैयारियां संकेत दे रही हैं कि यह मुलाकात हो सकती है।
मिडिल ईस्ट तनाव और ईरान मुद्दा रहेगा केंद्र में
दरअसल इस संभावित मुलाकात का सबसे अहम एजेंडा मिडिल ईस्ट में चल रहा तनाव होगा। जिसमें खासतौर पर Strait of Hormuz में बढ़ती हलचल और ईरान से जुड़े हालात पर चर्चा होना तय माना जा रहा है। जिसमें वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से यह इलाका बेहद संवेदनशील है। भारत जैसे ऊर्जा आयात करने वाले देश के लिए यह मुद्दा और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। ऐसे में मोदी और ट्रंप के बीच इस विषय पर रणनीतिक बातचीत की उम्मीद है।
विदेश मंत्रियों की मुलाकात से बनेगा माहौल
प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति की संभावित बैठक से पहले दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच भी अहम मुलाकात प्रस्तावित है। जिसमें अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio मई में भारत आ सकते हैं, जहां उनकी मुलाकात भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar से होगी। वहीं, इस बैठक में जी-7 समिट के एजेंडा के साथ-साथ द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा होगी। यह मुलाकात ट्रंप-मोदी बैठक के लिए जमीन तैयार करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
फरवरी 2025 में हुई थी आखिरी मुलाकात
अब अगर ट्रंप और मोदी की मुलाकात होती है, तो यह फरवरी 2025 के बाद उनकी पहली आमने-सामने की बैठक होगी। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच फोन पर बातचीत तो हुई है, लेकिन औपचारिक मुलाकात नहीं हो पाई है। इस बीच कई अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम सामने आए हैं, जिनका असर दोनों देशों के रिश्तों पर भी पड़ा है।

रिश्तों में आई दूरी अब सुधार की कोशिश
बता दें कि पिछले कुछ समय में भारत और अमेरिका के संबंधों में हल्की खटास देखने को मिली है। इसकी एक वजह अमेरिका की पाकिस्तान नीति को माना जा रहा है। ट्रंप के कुछ बयानों ने भी विवाद पैदा किया, जिसमें भारत को लेकर की गई टिप्पणी शामिल है। हालांकि, इसके बावजूद ट्रंप कई बार प्रधानमंत्री मोदी को अपना “करीबी दोस्त” भी बता चुके हैं।
ऐसे में अब बदलते वैश्विक हालात और रणनीतिक जरूरतों को देखते हुए अमेरिका भारत के साथ अपने संबंधों को मजबूत करना चाहता है। यही वजह है कि इस संभावित मुलाकात को बेहद अहम माना जा रहा है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह बैठक?
भारत के लिए ट्रंप-मोदी बैठक बेहद अहम मानी जा रही है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, खासकर Strait of Hormuz में हलचल के बीच भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर सतर्क है, क्योंकि देश की बड़ी जरूरत तेल आयात पर निर्भर है। ऐसे में अमेरिका के साथ तालमेल जरूरी हो जाता है। इसके अलावा, रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाकर भारत अपनी सैन्य और आर्थिक ताकत को मजबूत करना चाहता है। वैश्विक स्तर पर भी भारत अपनी भूमिका को और प्रभावी बनाना चाहता है। Indo-Pacific क्षेत्र में संतुलन बनाए रखने के लिए दोनों देशों की साझेदारी अहम है।
अब क्या होगा आगे?
अब ऐसे में आने वाले समय में Donald Trump और Narendra Modi की संभावित मुलाकात को लेकर तस्वीर और साफ हो सकती है। जैसे-जैसे G7 Summit 2026 नजदीक आएगा, दोनों देशों की ओर से आधिकारिक घोषणा भी संभव है। फिलहाल कूटनीतिक स्तर पर तैयारियां तेज हैं, जो इस बैठक के संकेत दे रही हैं। अगर यह मुलाकात होती है, तो भारत-अमेरिका संबंधों को नई मजबूती मिल सकती है। साथ ही रक्षा, व्यापार और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग बढ़ेगा, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय राजनीति और शक्ति संतुलन पर भी साफ तौर पर देखने को मिल सकता है।
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