UGC Rules 2026: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा लागू किए गए प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन–2026 को लेकर देशभर में काफी बवाल मचा हुआ है। जिसके वजह से उत्तर प्रदेश की राजनीति से लेकर विश्वविद्यालय परिसरों तक इस नए नियम पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
जानकारी के लिए बता दें कि, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने (UGC) के नए नियमों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नियमों का उद्देश्य सही है, लेकिन यह सुनिश्चित होना चाहिए कि कोई निर्दोष इसमें न फंसे। साथ ही, दोषियों को सजा मिलनी चाहिए, लेकिन निर्दोषों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। बता दें कि, इसे भाजपा की एक राजनीतिक चाल बताते हुए कहा कि इन नियमों से पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समाज को कोई वास्तविक राहत नहीं मिलेगी, क्योंकि अधिकांश शैक्षणिक संस्थानों पर गैर-पीडीए वर्ग का ही दबदबा है।
छात्रों ने किया प्रदर्शन
दरअसल, लखनऊ विश्वविद्यालय में UGC के नए नियमों के खिलाफ छात्रों ने काफी विरोध खुलकर किया है। वहीं, आज मंगलवार को सैकड़ों छात्र विश्वविद्यालय के गेट नंबर-1 पर जमा हुए और धरना-प्रदर्शन करना शुरू किया। साथ ही, छात्रों ने UGC के नियमों को विभाजनकारी बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान यूजीसी रोल बैक जैसे नारे लगाए गए। साथ ही, छात्रों ने धमकी भी दी कि यदि सरकार ने नियम वापस नहीं लिए, तो आंदोलन और बढ़ाया जाएगा।जिसके बाद विश्वविद्यालय गेट पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। जिसमें प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना था कि, नई गाइडलाइन समानता लाने के बजाय छात्रों को जातीय आधार पर बांटने का काम कर रही है। छात्रों ने एसीपी को ज्ञापन सौंपकर सरकार से नियमों को निरस्त करने की मांग की। इस प्रदर्शन में शक्ति दुबे, अभिषेक वर्मा, आयुष सिंह राठौड़, राजन यादव, उदयवीर सहित बड़ी संख्या में छात्र शामिल रहे।

नए नियम पहुंचा सकते हैं नुकसान
ABVP के छात्र नेता उज्ज्वल त्रिपाठी का कहना है कि, विश्वविद्यालय और कॉलेज सामाजिक समरसता के केंद्र होते हैं, जहां सभी छात्र बिना भेदभाव के साथ पढ़ते हैं। वहीं, नए नियम इस माहौल को नुकसान पहुंचा सकते हैं। जिसमें एबीवीपी नेता आलोक मिश्रा ने आशंका जताई कि नियमों के दुरुपयोग से झूठे आरोपों की संख्या बढ़ सकती है, जिससे छात्रों और शिक्षकों की सामाजिक प्रतिष्ठा और मानसिक शांति प्रभावित होगी। वहीं, इस विरोध में SC, ST और OBC वर्ग के छात्र भी शामिल दिखे। उनका कहना है कि यह नियम आपसी विश्वास को कमजोर करेगा और शैक्षणिक वातावरण में तनाव बढ़ाएगा। हालांकि, दूसरी ओर कुछ छात्र संगठनों ने UGC के नियमों का समर्थन भी किया है और इसे सकारात्मक बदलाव की दिशा में कदम बताया है।
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