UP Kasganj: उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले के अमापुर क्षेत्र से एक ऐसी दर्दनाक खबर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को सन्न कर दिया है. यहां एक बंद घर के अंदर एक ही परिवार के पांच सदस्यों के शव मिलने से सनसनी फैल गई.यह घटना अमापुर कस्बे में इंडियन पेट्रोल पंप के पीछे स्थित एक किराए के मकान की है.पुलिस को शुरुआती जांच में सामूहिक आत्महत्या या फिर हत्या के बाद आत्महत्या की आशंका लग रही है.हालांकि, असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विस्तृत जांच के बाद ही साफ हो पाएगी. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, फॉरेंसिक टीम और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए. पूरे इलाके को सील कर दिया गया है और घर को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी गई है. इस हादसे के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है और लोग इस बात को समझ नहीं पा रहे कि आखिर एक खुशहाल दिखने वाला परिवार अचानक ऐसे खौफनाक अंत तक कैसे पहुंच गया.
तीन दिन से बंद था घर, बदबू आने पर हुआ खुलासा
स्थानीय लोगों के मुताबिक, जिस घर में यह परिवार रहता था, वहां पिछले तीन दिनों से कोई हलचल नहीं दिख रही थी. पड़ोसियों ने पहले सोचा कि परिवार कहीं रिश्तेदारी में गया होगा.लेकिन जब कई दिनों तक दरवाजा नहीं खुला और घर से दुर्गंध आने लगी, तो लोगों को अनहोनी की आशंका हुई. इसके बाद पड़ोसियों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी. पुलिस मौके पर पहुंची और दरवाजा तोड़कर घर के अंदर दाखिल हुई. अंदर का नजारा देखकर हर कोई सन्न रह गया. घर के अलग-अलग कमरों में परिवार के पांचों सदस्यों के शव पड़े थे. घर अंदर से बंद था और कहीं भी जबरन घुसने के निशान नहीं मिले.इससे पुलिस को यह अंदेशा है कि घटना घर के अंदर ही घटी और इसमें बाहरी व्यक्ति की भूमिका नहीं दिख रही है.
कौन था यह परिवार?
पुलिस के अनुसार मृतकों की पहचान इस प्रकार हुई है सत्यवीर 50 वर्ष (पेशे से वेल्डर),रामश्री 48 वर्ष (सत्यवीर की पत्नी),प्राची12 वर्ष (बड़ी बेटी),अमरावती 10 वर्ष (छोटी बेटी), गिरीश 9 वर्ष (बेटा).
यह परिवार अमापुर कस्बे में किराए के मकान में रह रहा था. सत्यवीर वेल्डिंग का काम करता था और परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य बताई जा रही है. पड़ोसियों का कहना है कि परिवार शांत स्वभाव का था और किसी से झगड़े या विवाद की बात सामने नहीं आई थी.
घर के अंदर का दृश्य और शुरुआती जांच
पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने घर के अंदर से कई अहम सुराग जुटाए हैं. शुरुआती जांच में घर में किसी तरह की लूटपाट या तोड़फोड़ के निशान नहीं मिले हैं. सभी शव एक ही घर के अंदर पाए गए और दरवाजा भीतर से बंद था. अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह मामला सामूहिक आत्महत्या या हत्या के बाद आत्महत्या जैसा लग रहा है. हालांकि, पुलिस किसी भी निष्कर्ष पर जल्दबाजी में नहीं पहुंचना चाहती.शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, जिससे मौत का सही कारण और समय का पता चल सके.
क्या आर्थिक तंगी या पारिवारिक तनाव बना वजह?
पड़ोसियों और स्थानीय लोगों से बातचीत में सामने आया है कि सत्यवीर पिछले कुछ समय से काम को लेकर परेशान था. कुछ लोगों का कहना है कि वेल्डिंग के काम में हाल के महीनों में गिरावट आई थी, जिससे आर्थिक दबाव बढ़ा हो सकता है. हालांकि, परिवार के किसी सदस्य ने कभी खुलकर परेशानी की बात नहीं की थी. पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि कहीं आर्थिक तंगी, कर्ज, पारिवारिक तनाव या मानसिक दबाव इस घटना की वजह तो नहीं बना. इसके अलावा, यह भी देखा जा रहा है कि परिवार हाल के दिनों में किसी तनाव या विवाद से तो नहीं गुजर रहा था.
बच्चों की मौत से पूरे गांव में शोक
इस घटना में तीन मासूम बच्चों की मौत ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है. स्कूल जाने वाली दो बेटियां और एक छोटा बेटा अचानक इस दुनिया से चले गए. गांव के लोग बच्चों को मिलनसार और पढ़ाई में ठीक-ठाक बताते हैं. बच्चों के साथ हुई इस त्रासदी से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है.
वहीं, स्थानीय स्कूल के एक शिक्षक ने कहा, “बच्चे रोज स्कूल आते थे,कभी नहीं लगा कि परिवार किसी बड़े तनाव में है. यह घटना हम सभी के लिए बहुत दुखद है.”
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही कासगंज पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे.घर को सील कर दिया गया है और फॉरेंसिक टीम ने नमूने इकट्ठा किए हैं. पुलिस ने आसपास के लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है और परिवार के रिश्तेदारों को भी सूचना दे दी गई है.
वहीं,अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद मौत की असली वजह सामने आएगी.कॉल डिटेल्स और मोबाइल फोन की जांच की जाएगी,घर के भीतर मिले सामान की फॉरेंसिक जांच होगी, और परिवार के पिछले दिनों की गतिविधियों का रिकॉर्ड खंगाला जाएगा.
मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक समर्थन पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक समर्थन की अहमियत पर सवाल खड़े कर दिए हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार परिवार अंदर ही अंदर तनाव झेल रहा होता है, लेकिन बाहर से सब कुछ सामान्य नजर आता है.मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक आर्थिक दबाव, पारिवारिक तनाव, मानसिक अवसाद और सामाजिक समर्थन की कमी जैसे कारण किसी व्यक्ति को बेहद गलत फैसला लेने की ओर धकेल सकते हैं. जरूरत है कि समाज में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर खुलकर बातचीत हो और जरूरतमंद लोगों को समय पर मदद मिले.
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