भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर डॉ. उर्जित पटेल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी जिम्मेदारी का अवसर मिली है। भारत सरकार उन्हें इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (IMF) में कार्यकारी निदेशक (Executive Director) के रूप में नियुक्त किया है। बता दें कि यह नियुक्ति तीन साल के कार्यकाल तक होगी।
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बताया जा रहा है कि पूर्व गवर्नर डॉ. उर्जित पटेल के इस पद पर आने से भारत की वैश्विक आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश की आर्थिक नीतियों में भी वह अपना योगदान देंगे।
RBI के 24वें गवर्नर रह चुके हैं
उर्जित पटेल ने 2016 में रघुराम राजन के बाद RBI के 24वें गवर्नर के रूप में पदभार संभाल चुके हैं। दरअसल, जब यह आरबीआई थे, तो उसी समय देश में एक ऐतिहासिक और विवादित फैसला नोटबंदी का लिया गया था। खबरों के अनुसार, नोटबंदी जैसे कई बड़े फैसलो के पीछे उर्जित पटेल की रिपोर्ट और सुझाव अहम थे।
हालांकि, दिसंबर 2018 में उर्जित पटेल ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया। वे ऐसे पहले गवर्नर बने जिन्होंने निजी कारणों से अपनी मर्जी से कार्यकाल छोड़ा।

उर्जित पटेल जाने-माने अर्थशास्त्री
मिली जानकारी के अनुसार, उर्जित पटेल एक जाने-माने अर्थशास्त्री भी हैं। उन्होंने कई महत्वपूर्ण शोध पत्रों पर भी काम किया है। वे मौद्रिक नीतियों पर अपनी सख्त और सही राय के लिए जाने जाते हैं। आरबीआई गर्वनर पद पर रहते हुए उन्होंने मुद्रास्फीति नियंत्रण और वित्तीय स्थिरता पर विशेष जोर दिया है।
उर्जित पटेल की IMF पद पर नियुक्ति
वर्तमान समय में उर्जित पटेल की IMF में नियुक्ति भारत के लिए एक बड़ा अवसर मानी जा रही है। IMF जैसे संस्थान में कार्यकारी निदेशक का पद उच्च माना जाता है। इस पद पर बने रहते हुए कई अहम निर्णय वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े सुझाव देने होते हैं। ऐसे में उर्जित पटेल का अनुभव और दृष्टिकोण भारत सहित कई विकासशील देशों के लिए लाभकारी साबित होगा।
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