Ahmedabad Rath Yatra 2026: गुजरात की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान मानी जाने वाली भगवान जगन्नाथ की 149वीं रथयात्रा गुरुवार सुबह अहमदाबाद से पूरे धार्मिक उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ शुरू हो गई। तड़के से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ ऐतिहासिक जमालपुर स्थित 400 वर्ष पुराने जगन्नाथ मंदिर के बाहर जुटने लगी। ‘जय जगन्नाथ’ के जयघोष, शंखध्वनि और भजनों के बीच भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के रथों ने अपनी पारंपरिक यात्रा शुरू की। इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार ‘पहिंद विधि’ निभाई। इस अनुष्ठान में स्वर्ण झाड़ू से रथ के मार्ग को साफ कर भगवान के प्रति सेवा और विनम्रता का संदेश दिया जाता है। इसके बाद रथयात्रा को औपचारिक रूप से रवाना किया गया।
आस्था का सबसे बड़ा उत्सव
अहमदाबाद की रथयात्रा देश की सबसे बड़ी जगन्नाथ यात्राओं में गिनी जाती है। इसे पुरी के बाद भारत की दूसरी सबसे बड़ी रथयात्रा माना जाता है। हर वर्ष आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के अवसर पर आयोजित होने वाली यह यात्रा लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र होती है। इस बार भी सुबह से ही मंदिर परिसर और पूरे यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। भक्तों ने भगवान के दर्शन कर सुख-समृद्धि और शांति की कामना की।
मंगला आरती से हुई शुरुआत
रथयात्रा की शुरुआत सुबह मंगला आरती और विशेष पूजा-अर्चना से हुई। इसके बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की प्रतिमाओं को भव्य सजे हुए रथों पर विराजमान किया गया। धार्मिक अनुष्ठानों के पूरा होने के बाद मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने पारंपरिक ‘पहिंद विधि’ निभाई और रथयात्रा को रवाना किया।
16 किलोमीटर के पारंपरिक मार्ग से गुजर रही यात्रा
रथयात्रा अहमदाबाद के पारंपरिक मार्ग से होकर गुजर रही है। यह यात्रा जमालपुर स्थित जगन्नाथ मंदिर से शुरू होकर शहर के पुराने इलाकों से होती हुई सरसपुर पहुंचती है, जिसे भगवान का ननिहाल (मोसाल) माना जाता है। वहां विशेष पूजा और प्रसाद वितरण के बाद रथ वापस मंदिर लौटता है। पूरी यात्रा लगभग 16 किलोमीटर लंबी होती है और देर शाम मंदिर परिसर में इसका समापन होता है।
भक्ति के साथ सांस्कृतिक झलकियां भी आकर्षण का केंद्र
रथयात्रा में केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि गुजरात की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत भी देखने को मिलती है। यात्रा में पारंपरिक अखाड़े, भजन मंडलियां, लोक कलाकार, सजे हुए हाथी, धार्मिक झांकियां और विभिन्न सांस्कृतिक दल शामिल हैं। पूरे मार्ग पर श्रद्धालु भगवान पर पुष्प वर्षा करते हैं और प्रसाद वितरित किया जाता है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
इतने बड़े आयोजन को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है। रिपोर्टों के अनुसार, रथयात्रा के दौरान 30 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा ड्रोन, हाई-रिजॉल्यूशन सीसीटीवी कैमरे, फेस रिकग्निशन तकनीक और AI आधारित भीड़ निगरानी प्रणाली का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि यात्रा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
यात्रा मार्ग पर विशेष निगरानी
प्रशासन ने यात्रा मार्ग को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए कई अतिरिक्त कदम उठाए हैं। यात्रा के रूट पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया है और कई इलाकों को अस्थायी रूप से नो-पार्किंग जोन घोषित किया गया है। लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करें।
हाथियों पर भी हाईटेक निगरानी
इस वर्ष रथयात्रा में शामिल हाथियों के लिए भी आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, हाथियों की गतिविधियों पर GPS ट्रैकर, सेंसर और लाइव मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन की अपील
अहमदाबाद पुलिस ने श्रद्धालुओं से भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। बच्चों का विशेष ध्यान रखने, अफवाहों से बचने और सुरक्षा कर्मियों के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही यात्रा मार्ग पर चिकित्सा और आपातकालीन सेवाओं की भी विशेष व्यवस्था की गई है।
अहमदाबाद की पहचान बन चुकी है रथयात्रा
करीब डेढ़ सदी पुरानी यह रथयात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि गुजरात की सांस्कृतिक पहचान भी है। हर वर्ष देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु इस आयोजन में शामिल होने के लिए अहमदाबाद पहुंचते हैं। यह यात्रा सामाजिक समरसता, सेवा, श्रद्धा और भारतीय परंपराओं का जीवंत प्रतीक मानी जाती है।
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