Assam Cabinet Expansion: असम की राजनीति में आज शुक्रवार को बड़ा बदलाव देखने को मिला है। बता दें की मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली सरकार का बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार आखिरकार हो गया है। राजभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में 12 नए मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। इस विस्तार के साथ ही राज्य मंत्रिमंडल की कुल संख्या बढ़कर 17 हो गई है।
राजनीतिक दृष्टि से यह विस्तार कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जिसमें एक तरफ जहां भाजपा ने संगठन में लंबे समय से सक्रिय नेताओं को मौका दिया है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए कई बड़े नेताओं को इस बार मंत्री पद नहीं मिल सका। सबसे अधिक चर्चा पहली बार विधायक बनीं नीलिमा देवी को कैबिनेट में शामिल किए जाने को लेकर हो रही है। ऐसे में आइए जानते हैं यहां पूरी खबर
कैबिनेट विस्तार में 12 नए मंत्रियों ने ली शपथ
जानकारी के लिए बता दें की राजभवन में आयोजित समारोह में कुल 12 नेताओं को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। इनमें 11 विधायक भारतीय जनता पार्टी से हैं, जबकि एक मंत्री सहयोगी दल असम गण परिषद (AGP) से शामिल किया गया है।
नए मंत्रियों की लिस्ट इस प्रकार है:
- अश्विनी रे सरकार
- अशोक सिंघल
- बिमल बोरा
- विश्वजीत दैमारी
- जयंत मल्लबारुआ
- कौशिक राय
- कृष्णेंदु पॉल
- नीलिमा देवी
- पीयूष हजारिका
- डॉ. रनोज पेगु
- सुसांता बोरगोहेन
- केशब महंत (असम गण परिषद)

पहली बार विधायक बनीं नीलिमा देवी को मिला बड़ा मौका
इस कैबिनेट विस्तार की सबसे बड़ी खासियत भाजपा की महिला नेता नीलिमा देवी की एंट्री रही। बता दें की नीलिमा देवी पहली बार विधानसभा चुनाव जीतकर विधायक बनी हैं और उन्हें सीधे कैबिनेट मंत्री बनाया गया है।
नीलिमा देवी भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। उन्होंने मंगलदाई विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक ताकत साबित की थी। चुनाव में उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार को लगभग 24 हजार वोटों से हराया था।
नीलिमा देवी के मंत्री बनने से असम कैबिनेट में महिला मंत्रियों की संख्या बढ़कर दो हो गई है। इससे पहले अजंता नियोग कैबिनेट में महिला प्रतिनिधित्व कर रही थीं।
कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए नेताओं को झटका
दरअसल मंत्रिमंडल विस्तार में सबसे बड़ा राजनीतिक झटका उन नेताओं के लिए माना जा रहा है जो हाल के वर्षों में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे।
पूर्व असम कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन बोरा का नाम मंत्री पद के संभावित दावेदारों में शामिल माना जा रहा था। उन्होंने विधानसभा चुनाव भाजपा के टिकट पर जीता भी, लेकिन उन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। ऐसे में राजनीतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि भाजपा ने इस बार संगठन के पुराने और सक्रिय चेहरों को प्राथमिकता दी है। भूपेन बोरा के अलावा कुछ अन्य नेताओं को भी मंत्री पद की उम्मीद थी, लेकिन अंतिम सूची में उनके नाम शामिल नहीं किए गए।
अब 17 सदस्यीय हुआ असम मंत्रिमंडल
इस विस्तार के बाद मुख्यमंत्री सहित असम मंत्रिमंडल में कुल 17 सदस्य हो गए हैं। संवैधानिक नियमों के अनुसार असम में अधिकतम 19 मंत्री बनाए जा सकते हैं। ऐसे में अभी भी दो मंत्री पद खाली रखे गए हैं।
राजनीतिक एक्सपर्ट्स का मानना है कि भविष्य में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए इन पदों पर नियुक्तियां की जा सकती हैं।
भाजपा का बढ़ा दबदबा
वर्तमान मंत्रिमंडल की संरचना पर नजर डालें तो भाजपा का दबदबा साफ दिखाई देता है।
मौजूदा कैबिनेट में शामिल हैं:
- 13 मंत्री भाजपा से हैं।
- 2 मंत्री असम गण परिषद (AGP) से हैं।
- 1 मंत्री बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) से है।
- मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा भाजपा से हैं।
पहले भी हो चुका है कैबिनेट विस्तार
आपकी जानकारी के लिए बता दें की इससे पहले भी 12 मई को मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के साथ चार मंत्रियों ने शपथ ली थी। उस समय रामेश्वर तेली, अजंता नियोग, अतुल बोरा और चरण बोरो को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था।
अब नए विस्तार के बाद सरकार ने लगभग सभी प्रमुख विभागों और क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की है।
अनुभवी नेताओं पर जताया भरोसा
नई कैबिनेट की एक और खास बात यह है कि इसमें शामिल अधिकांश नेता पहले भी मंत्री रह चुके हैं। कुल 17 मंत्रियों में से 12 ऐसे हैं जिन्होंने हिमंता सरकार के पहले कार्यकाल में भी मंत्री के रूप में काम किया था। इससे साफ संकेत मिलता है कि मुख्यमंत्री ने अनुभव और प्रशासनिक क्षमता को प्राथमिकता दी है। सरकार का मानना है कि अनुभवी मंत्री विकास योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ा सकते हैं।
विधानसभा अध्यक्ष से मंत्री बने विश्वजीत दैमारी
इस विस्तार में विश्वजीत दैमारी का नाम भी काफी चर्चा में रहा। दैमारी पिछले कार्यकाल में विधानसभा अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इस बार उन्हें कैबिनेट में शामिल कर सरकार ने उनके अनुभव का लाभ उठाने का फैसला किया है।
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला विधानसभा और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मददगार साबित हो सकता है।
क्या संदेश देना चाहती है भाजपा?
असम कैबिनेट विस्तार को 2026 के बाद की राजनीतिक रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। भाजपा ने इस विस्तार के जरिए महिला प्रतिनिधित्व, क्षेत्रीय संतुलन और संगठन के पुराने नेताओं को सम्मान देने का संदेश दिया है। साथ ही पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल दल बदलकर आने वाले नेताओं को तुरंत बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिलेगी। संगठन में लंबे समय तक काम करने वाले कार्यकर्ताओं और नेताओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
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