Baramati Plane Crash: महाराष्ट्र के पुणे जिले का बारामती एयरस्ट्रिप एक बार फिर विमान हादसे को लेकर चर्चा में है। रविवार, 9 अगस्त 2026 को यहां ट्रेनिंग के दौरान एक निजी विमानन कंपनी का ट्रेनिंग विमान रनवे से बाहर निकल गया। हादसा दोपहर करीब 12:30 बजे हुआ। राहत की सबसे बड़ी बात यह रही कि विमान में सवार दोनों लोग सुरक्षित हैं और किसी के घायल होने की खबर नहीं है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक यह घटना एक ट्रेनिंग एक्सरसाइज के दौरान हुई और इसे रनवे एक्सकर्शन के तौर पर बताया जा रहा है। पुणे ग्रामीण पुलिस के मुताबिक विमान का रजिस्ट्रेशन VT-SEX था। इसमें कैप्टन चिराग शशिकांत दोइफोडे और कैडेट अभिजीत जुंद्रे सवार थे। दोनों सुरक्षित बताए गए हैं। घटना के बाद संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचे और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
ट्रेनिंग के दौरान रनवे से बाहर निकला विमान
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार विमान बारामती एयरफील्ड पर ट्रेनिंग प्रक्रिया में शामिल था। इसी दौरान विमान रनवे से आगे निकल गया और एयरस्ट्रिप के पक्के हिस्से से बाहर चला गया। रिपोर्टों के मुताबिक विमान ने पहले लिंक ब्रावो के जरिए रनवे पर प्रवेश किया। इसके बाद इसे रनवे 29 के थ्रेशोल्ड पर लाइन-अप किया गया और टेक-ऑफ प्रक्रिया शुरू की गई। ट्रेनिंग के दौरान टेक-ऑफ को बीच में रोकने की प्रक्रिया यानी रिजेक्टेड टेक-ऑफ की गई। इसके बाद विमान को रनवे 11 के थ्रेशोल्ड पर लाइन-अप किया गया। वहां भी एक और रिजेक्टेड टेक-ऑफ किया गया। इसी प्रक्रिया के दौरान विमान पूरी तरह से रनवे पर नहीं रुक पाया और रनवे 29 के थ्रेशोल्ड से आगे निकल गया। इसके बाद विमान पक्के रनवे क्षेत्र से हटकर बाहर चला गया। रिपोर्टों में इसे रनवे एक्सकर्शन बताया गया है।
दोनों पायलट सुरक्षित, नहीं हुई जनहानि
हादसे के बाद सबसे राहत वाली खबर यह रही कि विमान में मौजूद दोनों लोग सुरक्षित बच गए। किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। हादसे की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस और संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचे। विमान को सुरक्षित करने और घटनास्थल का निरीक्षण करने की कार्रवाई की गई। फिलहाल दुर्घटना के पीछे की सटीक वजह सामने नहीं आई है। संबंधित एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि विमान रनवे पर निर्धारित दूरी में क्यों नहीं रुक सका। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसे के पीछे पायलटिंग प्रक्रिया, तकनीकी कारण या कोई अन्य वजह थी।
निजी विमानन कंपनी का ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट
ताजा रिपोर्टों में विमान को निजी फ्लाइट ट्रेनिंग ऑपरेशन से जुड़ा बताया गया है। Carver Aviation द्वारा संचालित ट्रेनिंग विमान के रनवे से बाहर जाने की जानकारी भी सामने आई है। ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल पायलटों को उड़ान और आपातकालीन परिस्थितियों में निर्णय लेने का अभ्यास कराने के लिए किया जाता है। इस तरह की ट्रेनिंग में टेक-ऑफ, लैंडिंग और अलग-अलग परिस्थितियों में विमान को नियंत्रित करने का अभ्यास कराया जाता है। रविवार की घटना भी एक ट्रेनिंग एक्सरसाइज के दौरान हुई थी।
बारामती में पहले भी हो चुके हैं विमान हादसे
बारामती एयरस्ट्रिप पर विमान दुर्घटना की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी यहां ट्रेनिंग विमान हादसे का शिकार हो चुके हैं। यही वजह है कि हर नई घटना के बाद बारामती एयरफील्ड की सुरक्षा और संचालन व्यवस्था पर सवाल उठते रहे हैं। मई 2026 में भी एक ट्रेनिंग विमान बारामती एयरस्ट्रिप के पास दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। उस घटना में Redbird Flight Training Academy का ट्रेनिंग विमान तकनीकी समस्या के बाद हार्ड लैंडिंग का शिकार हुआ था। विमान में मौजूद ट्रेनी पायलट सुरक्षित बच गया था। मई की घटना में विमान गोजुबावी गांव के पास उतरा था। पुलिस के अनुसार विमान लैंडिंग के दौरान एक पोल से टकराया था। उस समय भी किसी बड़ी जनहानि की खबर नहीं थी।
जनवरी में हुआ था बड़ा हादसा
बारामती एयरस्ट्रिप जनवरी 2026 में हुए एक बड़े विमान हादसे के बाद भी सुर्खियों में आया था। उस हादसे में महाराष्ट्र के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार समेत पांच लोगों की मौत हो गई थी। उस हादसे के बाद बारामती एयरफील्ड की सुरक्षा व्यवस्था, रनवे और एयर ट्रैफिक कंट्रोल से जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठे थे। बाद में मई में ट्रेनिंग विमान की घटना के बाद भी एयरफील्ड की सुरक्षा पर चर्चा तेज हुई। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मई की घटना के बाद बारामती एयरफील्ड पर पिछले वर्षों में हुए कई विमान हादसों को लेकर सुरक्षा सुधार और आधुनिक सुविधाओं की जरूरत पर विशेषज्ञों ने सवाल उठाए थे।
बारामती एयरफील्ड की सुरक्षा फिर चर्चा में
बारामती एयरफील्ड महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड यानी MADC के प्रबंधन में है। यहां ट्रेनिंग फ्लाइंग ऑपरेशंस भी होते हैं। इस साल हुए हादसों के बाद एयरफील्ड पर रनवे की स्थिति, नेविगेशन सिस्टम, एयर ट्रैफिक कंट्रोल और इमरजेंसी रिस्पॉन्स जैसी व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा होती रही है। मई 2026 की एक रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने एयरफील्ड पर सुरक्षा सुधार, बेहतर नेविगेशन सुविधाओं और पेशेवर एयर ट्रैफिक कंट्रोल व्यवस्था की जरूरत बताई थी। हालांकि रविवार की नई घटना के संदर्भ में अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि हादसे का कारण एयरफील्ड की किसी कमी से जुड़ा है। इसके लिए आधिकारिक जांच का इंतजार करना होगा।
क्या होता है रिजेक्टेड टेक-ऑफ?
इस घटना में रिजेक्टेड टेक-ऑफ शब्द सामने आया है। आसान भाषा में समझें तो जब विमान टेक-ऑफ की प्रक्रिया शुरू करता है लेकिन किसी कारण से पायलट उड़ान भरने का फैसला रोक देता है, तो उसे रिजेक्टेड टेक-ऑफ कहा जाता है। ऐसी स्थिति में विमान को रनवे पर सुरक्षित तरीके से रोकना होता है। विमान की गति जितनी अधिक होती है, उसे रोकने के लिए उतनी ही अधिक रनवे दूरी की जरूरत पड़ सकती है। बारामती की घटना में शुरुआती जानकारी के अनुसार विमान दो बार रिजेक्टेड टेक-ऑफ प्रक्रिया से गुजरा और इसके बाद रनवे से बाहर निकल गया। हालांकि, इस प्रक्रिया में वास्तव में क्या हुआ और विमान क्यों नहीं रुक पाया, इसकी पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही होगी।
हादसे के बाद क्या होगी जांच?
विमान दुर्घटना या रनवे एक्सकर्शन के मामलों में जांच का उद्देश्य केवल हादसे की वजह पता करना नहीं होता, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी सुधारों की पहचान करना भी होता है। जांच में आमतौर पर विमान की तकनीकी स्थिति, उड़ान से पहले की जांच, रनवे की स्थिति, मौसम, प्रशिक्षण प्रक्रिया और ऑपरेशन से जुड़े अन्य पहलुओं को देखा जाता है। बारामती की रविवार की घटना में भी अधिकारियों द्वारा घटनास्थल और विमान से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है।
फिलहाल सबसे बड़ी राहत, सभी सुरक्षित
बारामती में इस बार हुए हादसे ने एक बार फिर एयरफील्ड की सुरक्षा को चर्चा में ला दिया है, लेकिन इस घटना में किसी की जान नहीं गई और विमान में सवार दोनों लोग सुरक्षित हैं। अब जांच के नतीजों से यह साफ होगा कि ट्रेनिंग के दौरान विमान रनवे से बाहर क्यों गया और भविष्य में ऐसी घटना को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए। बारामती एयरस्ट्रिप पर पहले हो चुकी घटनाओं को देखते हुए इस बार भी सुरक्षा मानकों की समीक्षा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता घटना की पूरी जानकारी जुटाना और हादसे के वास्तविक कारण का पता लगाना है।
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